26.1 C
Ranchi
Friday, November 6, 2026
Advertisement
Home Blog Page 770

A Farzi Star – Jaswant Dalal

0

Bollywood is a tough industry to break into, and for every success story, there are countless strugglers who never make it. However, every now and then, we hear stories of strugglers who persevered through the difficulties and eventually found success. One such story is that of Jaswant Singh Dalal , a Bollywood actor who started as a struggler but is now a respected name in the industry.

Jaswant Dalal is an acting graduate from the Film and Television Institute of India, Pune (FTII) and from Shri Ram Centre for Performing Arts, New Delhi (SRC). He hails from the state of Haryana and did his schooling from the Army School, Ranikhet. After completing his acting training, he moved to Mumbai, the hub of the Indian film industry, to try his luck in Bollywood.

Besides acting, he has produced and conceptualized several brand commercials
However, as is the case with most strugglers, Jaswant struggled to find work in the beginning. He appeared in a few small roles in TV shows and films, but nothing substantial came his way. He even went through a bad phase.

But Jawant was determined to make it in the industry. He kept auditioning and taking acting classes, and eventually, he landed in a big role in the film “Good luck Jerry” While the role was good, it was enough to catch the attention of filmmakers, and he started getting more offers.

Jawant’s breakthrough came with the Amazon prime webseries “Farzi!” in Feb 2023. The webseries was critically acclaimed and commercially successful, and Jaswant’s performance as the character Shekhar Ahlawat, a member of CCFART d was praised by critics and audiences alike. This is just the start of a successful run for Jaswant, and now he is line up with many more new ventors Hope he will deliver critically acclaimed performances in up comming films

However, it was his performance in the Webseries “Farzi” that really cemented his place as a respected actor in Bollywood. The Webseries, which is one of the most watched Indian webseries till date leaving Mirzapur behind and is widely praised for its realistic portrayal of the Fake currency Network

Apart from his acting skills, Jaswant is also known for his dedication to his craft. He is known to immerse himself completely in his roles.

Jaswant’s success story is an inspiration to all those who are trying to make it in the film industry. He is proof that hard work, perseverance, and dedication can pay off in the end. His story is also a reminder that success in the film industry is not just about having connections or good looks, but also about talent and hard work.

In conclusion, Jaswant Dalal is a Bollywood struggler who has made it big in the industry. From humble beginnings, he has worked his way up to become one of the most respected actors in Bollywood today. His story is an inspiration to all those who are trying to make it in the industry, and his dedication to his craft is a reminder that success is not just about talent, but also about hard work and perseverance.

[advanced_iframe src=”//rootrider.in/amazon/carvacum1.html” width=”100%” height=”700″]

राम भक्तों के लिए

सना से क्यों हैं न्यूज एंकर परेशान

0
नई दिल्ली - दो दिन पहले देश ने एक बड़े न्यूज़ चैनल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न्यूज़ एंकर,  सना को हमारे सामने प्रस्तुत किया , सना एक AI टूल की मदद से बनाई गई आभासी (Virtual) Anchor है , जो मानव की तरह ही समाचार पढ़ सकती है और मौजूदा मानव समाचार वाचक (News Anchor) की जगह ले सकती है , इसके साथ ही ये बहस छिड़ गई है की क्या आने वाले दिनो मे न्यूज़ एंकर  की नौकरी खतरे मे है क्या AI न्यूज़ एंकर की जगह ले पाएगा , हमारे लिए खुशी के बात ये होगी की अब हम अब सुकून से समाचार सुन पाएंगे , शोर शारबे वाले न्यूज़ अंकर से छुटकारा मिलेगा |  चलिये जानते है इनके फायदे और नुकसान 

हाल के वर्षों में, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में प्रगति ने एआई एंकरों का विकास किया है जो मानव समाचार एंकरों को बदलने की क्षमता रखते हैं। एआई एंकरों का उदय पत्रकारिता सहित विभिन्न उद्योगों में ऑटोमेशन की दिशा में व्यापक रुझान का हिस्सा है। हालांकि कुछ लोग यह तर्क दे सकते हैं कि एआई एंकर एक लागत प्रभावी समाधान है जो समाचारों को जल्दी और सटीक रूप से वितरित कर सकता है, दूसरों को डर है कि वे मानव पत्रकारों की जगह ले लेंगे और समाचारों की विश्वसनीयता को कम कर देंगे।



एआई एंकर का उपयोग करने के प्राथमिक लाभों में से एक गति है। एआई एंकर मानव एंकर की तुलना में बहुत तेजी से समाचार पढ़ सकता है और बिना किसी ब्रेक के 24/7 समाचार प्रस्तुत कर सकता है। इसका अर्थ यह है कि समाचारों को जनता तक बहुत तेजी से पहुँचाया जा सकता है, और ब्रेकिंग न्यूज को तुरंत रिपोर्ट किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, एआई एंकर एक साथ कई कहानियों पर काम कर सकते हैं, जिससे पत्रकारों की एक बड़ी टीम की आवश्यकता कम हो जाती है।


एआई एंकर का एक अन्य लाभ सटीकता है। मानव एंकर त्रुटियों के लिए प्रवण होते हैं, जैसे नामों का गलत उच्चारण करना या तथ्यों को गलत करना। दूसरी ओर, एआई एंकरों को सटीक सटीकता के साथ समाचार देने के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है। उन्हें वास्तविक समय में जानकारी की तथ्य-जांच करने के लिए भी प्रोग्राम किया जा सकता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि समाचार विश्वसनीय और विश्वसनीय है।


हालांकि, कुछ तर्क देते हैं कि एआई एंकर मानव समाचार एंकरों के लिए नौकरियों के नुकसान का कारण बनेंगे। जैसा कि समाचार संगठन लागत कम करना चाहते हैं, वे मानव पत्रकारों के सस्ते विकल्प के रूप में एआई एंकरों की ओर रुख कर सकते हैं। इससे मानवीय पत्रकारों के लिए उपलब्ध नौकरियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आ सकती है और इच्छुक पत्रकारों के लिए उद्योग में प्रवेश करना अधिक कठिन हो सकता है।


एक अन्य चिंता यह है कि एआई एंकर समाचारों की विश्वसनीयता को कम कर सकते हैं। हालांकि वे सटीक और विश्वसनीय हो सकते हैं, उनमें मानवीय स्पर्श की कमी होती है जो मानव एंकर समाचारों में लाते हैं। मानव एंकर भावना, सहानुभूति व्यक्त कर सकते हैं और दर्शकों से इस तरह जुड़ सकते हैं जैसे एआई एंकर नहीं कर सकते। यह मानवीय तत्व दर्शकों के साथ विश्वास बनाने और यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि समाचार को विश्वसनीय माना जाए।


इसके अलावा, एआई एंकर भाषा और संस्कृति की बारीकियों को समझने के लिए संघर्ष कर सकते हैं। भाषा जटिल है, और यहां तक ​​कि प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण में नवीनतम प्रगति के साथ, एआई एंकर व्यंग्य, विडंबना या सांस्कृतिक संदर्भों को समझने के लिए संघर्ष कर सकते हैं जो कुछ क्षेत्रों या समुदायों के लिए विशिष्ट हैं। इससे समाचार की गलतफहमी या गलत व्याख्या हो सकती है, जो समाचार की विश्वसनीयता को और कम कर सकती है।


चिंताओं के बावजूद, एआई एंकर पहले से ही कुछ समाचार संगठनों में उपयोग किए जा रहे हैं। चीन की शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने 2018 में अपने पहले एआई एंकर का अनावरण किया, और तब से इसका उपयोग विभिन्न समाचारों पर रिपोर्ट करने के लिए किया जाता रहा है। इसी तरह, दक्षिण कोरिया में, 2020 में देश के चुनाव परिणामों पर रिपोर्ट करने के लिए एआई एंकर का उपयोग किया गया था। इन उदाहरणों से पता चलता है कि एआई एंकरों को पहले से ही समाचार रिपोर्टिंग में एकीकृत किया जा रहा है और भविष्य में इसके और अधिक प्रचलित होने की संभावना है।


अंत में, समाचार एंकर की भूमिका अंततः एआई एंकरों द्वारा ली जा सकती है। जबकि वे गति और सटीकता के मामले में लाभ प्रदान करते हैं, वे नौकरी के नुकसान और समाचार की विश्वसनीयता के बारे में भी चिंता जताते हैं। यह संभावना है कि एआई एंकर भविष्य में समाचार रिपोर्टिंग में और अधिक प्रचलित हो जाएंगे, लेकिन यह देखा जाना बाकी है कि क्या वे पूरी तरह से मानव पत्रकारों की जगह लेंगे। अंततः, समाचार रिपोर्टिंग की दक्षता में सुधार करने के लिए एआई तकनीक का उपयोग करने के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है, साथ ही मानवीय तत्व को संरक्षित करना जो दर्शकों के साथ विश्वास बनाने के लिए आवश्यक है।


राम भक्तों के लिए

नियोजन नीति के खिलाफ संतालपरगना व कोल्‍हान में हजारों युवा सड़क पर उतरे,दुमका में 4 को नुक्‍कड़ सभा व 5 अप्रैल को मशाल जुलूस निकलेगा

0

रांची: हेमंत सरकार की ताजा नियोजन नीति के खिलाफ सत्‍ताधारी दल झामुमो के गढ़ संतालपरगना और कोल्‍हान में युवाओं का आंदोलन तेज हो रहा है। नियोजन नीति और 60:40 के आरक्षण फार्मूले के विरोध में शनिवार को संतालपरगना के छह जिलों में बंद से आम जनजीवन प्रभावित रहा। बंद का सबसे ज्यादा असर झारखंड की उप राजधानी दुमका और साहिबगंज में देखने को मिला। गोड्डा-पाकुड़ में असरकारक तो, देवघर में बंद का प्रभाव थोड़ा कम दिखा। हजारों की संख्या में छात्र सुबह से ही सड़कों पर उतर आये और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बंद को सफल बनाने में जुट गये। निजी वाहनों का परिचालन भी बुरी तरह प्रभावित रहा।

बाहरी को 40 फीसद आरक्षण देना अनुचित

संतालपरगना के छह जिले में बंद का कॉल दिया गया था। 1932 के खतियान आधारित नियोजन नीति बनाने और 60:40 के आरक्षण नीति को रद्द करने को लेकर छात्र समन्‍वय समिति ने एक अप्रैल को बंद का कॉल दिया था। वहीं तीन अप्रैल को कोल्‍हान के सरायकेला खरसावां जिले में विरोध मार्च का निर्णय किया गया है। यह भी चेतावनी दी गई है कि जल्‍द सरकार ने निर्णय नहीं किया तो, राज्‍य स्‍तर पर आंदोलन चलाया जायेगा। छात्रों का कहना है कि बाहरी को 40 फीसद आरक्षण देना अनुचित है। इस क्रम में दोपहर ने पुलिस प्रशासन ने करीब ढाई सौ आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया जिन्‍हें शाम में छोड़ दिया गया। इधर मूलवासी सदान मोर्चा ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए दुमका में रोस्‍टर में ओबीसी के आरक्षण को शून्‍य किये जाने का विरोध किया है। मोर्चा ने दुमका में चार अप्रैल को नुक्‍कड़ सभा और पांच अप्रैल को मशाल जुलूस निकालने का एलान किया है।

राम भक्तों के लिए

सिद्धू जेल से छूटने के बाद कहा-देश में तानाशाही आई है तो, एक क्रांति भी आई है और उस क्रांति का नाम है राहुल गांधी

0

नई दिल्ली : पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू शनिवार को दस माह बाद पटियाला की सेंट्रल जेल से रिहा हो गए। 59 वर्षीय कांग्रेस नेता सिद्धू ने 1988 के रोड रेज के मामले में एक साल की सजा काटी। पिछले साल 20 मई को सुप्रीम कोर्ट के एक साल सश्रम कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद सिद्धू ने पटियाला की एक अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। जेल से बाहर आए सिद्धू ने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा कि सत्य को दबाने का प्रयास सफल नहीं हो सकता। आज लोकतंत्र बेड़ियों में है।

समर्थक सुबह से ही पटियाला जेल के बाहर जुटने लगे थे

सिद्धू के समर्थक सुबह से ही पटियाला जेल के बाहर जुटने लगे थे। ढोल वालों को भी बुलाया गया था। इसके बाद सिद्धू की रिहाई का इंतजार शुरू हुआ। शाम छह बजने से कुछ मिनट पहले सिद्धू जेल से बाहर निकले। समर्थकों की नारेबाजी पर सिद्धू ने झुककर उनका अभिवादन किया। बाहर आने के बाद सिद्धू ने कहा कि पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि मुझे दोपहर के आसपास रिहा किया जाना था, लेकिन उन्होंने इसमें देरी की। वे चाहते थे कि मीडिया के लोग चले जाएं। इस देश में जब भी कोई तानाशाही आई है तो, एक क्रांति भी आई है और इस बार उस क्रांति का नाम है राहुल गांधी.

राम भक्तों के लिए

झारखंड सरकार की वेबसाइट की लांचिंग के बाद अबतक 2545 कंपनियों ने खुद को रजिस्टर कराया, पूर्वी सिंहभूम सबसे आगे

0

रांची : झारखंड में शिक्षित बेरोजगारों के लिए हेमंत सरकार तत्पर है. सरकार की ओर से स्थानीय लोगों को रोजगार मिले, इसके लिए झारखंड सरकार ने कानून बनाया है। सरकार की ओर से http://jharniyojan.jharkhand.gov.in नाम से पोर्टल भी शुरू कर दिया गया है। इस पोर्टल में राज्य में संचालित निजी क्षेत्र की कंपनियां खुद को रजिस्टर कर रही हैं। वेबसाइट की लांचिंग को लगभग 15 दिन होने जा रहे हैं। इस पोर्टल पर अब तक 2545 कंपनियों ने खुद को रजिस्टर करा लिया है। औसतन पांच से 10 कंपनियां हर दिन रजिस्टर हो रही हैं।

निजी कंपनियों में नौकरी के लिए प्रक्रिया शुरू

झारखंड राज्य में संचालित निजी कंपनियों में नौकरी मिल सके इसके लिए प्रक्रिया भी शुरू कर दी गयी है। वेबसाइट पर दी गयी जानकारी के अनुसार रजिस्टर्ड 2545 कंपनियों में काम कर रहे कर्मचारियों की संख्या 972 है। इन कर्मचारियों में झारखंड के कर्मचारियों की संख्या महज 351 है। जबकि झारखंड राज्य के बाहर के कर्मचारियों की संख्या 621 है। श्रम विभाग की ओर से बताया गया कि अभी कंपनियों की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया में कंपनियों को ही इस बात की जानकारी देनी है कि उनके यहां किस ग्रेड के कितने कर्मचारी हैं। उनमें कितने लोग झारखंड के हैं और कितने लोग राज्य के बाहर के। रजिस्ट्रेशन के दौरान ऐसा भी देखा जा रहा है कि कई कर्मचारी झारखंड के हैं, पर उनका रेसिडेंट संबंधित डॉक्यूमेंट नहीं होने की वजह से उन्हें झारखंड के बाहर का काउंट किया गया है। इसमें सुधार की प्रक्रिया चल रही है. बहुत जल्द इसमें सुधार की गुंजाइश है.

12 दिनों में कंपनियों के रजिस्ट्रेशन कराने की स्पीड बढ़ी


बताया गया कि बीते 12 दिनों में कंपनियों के रजिस्ट्रेशन कराने की स्पीड सबसे अधिक पूर्वी सिंहभूम जिले से कंपनियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। यहां से 558 कंपनियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। टॉप पांच जिले की बात करें तो पहले नंबर पर पूर्वी सिंहभूम है। यहां से 558 कंपनियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। दूसरे नंबर पर धनबाद है। यहां से 235 कंपनियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। तीसरे नंबर पर बोकारो है। यहां के 228 कंपनियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। चौथे नंबर पर सरायकेला-खरसावां जिला है। यहां से 193 कंपनियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। पांचवें नंबर पर 169 कंपनियों के साथ राजधानी रांची है और गिरिडीह में 76 लोगों ने अबतक रजिस्ट्रेशन कराया है.

राम भक्तों के लिए

कांग्रेस के सत्याग्रह के तहत नुक्कड़ सभाओं के जरिये कांग्रेसियों ने भाजपा पर हमला किया, कहा-देश में चल रही है तानाशाही

0

गिरिडीह : अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर देशव्यापी चलाए जा रहे हैं जय भारत सत्याग्रह के तहत शनिवार को गिरिडीह शहर के कई स्थानों में नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से कांग्रेस नेताओं ने लोगों को यह बताने की कोशिश की गई कि किस तरह से आज देश में तानाशाह राज चल रहा है. किस तरह से देश में लोकतंत्र को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है. नुकड़ सभाओं में बतौर मुख्य वक्ता जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष सतीश केडिया ने कहा कि हम महंगाई की बात करने नहीं आए हैं. 400 का सिलेंडर जो 1200 हो गया है उसकी बात करने नहीं आए हैं. डीजल ₹50 से ₹100 हो गया है उसकी बात भी करने नहीं आए हैं. जो करोड़ रोजगार प्रतिवर्ष जो देने का वायदा किया गया था उसकी बात करने नहीं आए हैं हम आज देश को बचाने की बात करने आए हैं कि किस तरह से देश के लोकतांत्रिक ढांचे को कुंद करने की कोशिश की जा रही है.

भाजपा की दोहरी नीति के खिलाफ विरोध होना चाहिए

जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष अशोक विश्वकर्मा, महमूद अली खान, नगर अध्यक्ष सद्दाम हुसैन ने एक स्वर में यह कहा कि न्यायपालिका जो कार्य कर रही है, हमें इस बारे में कुछ भी नहीं कहना है. न्याय पालिका के हर निर्णय का सम्मान करते हैं, लेकिन भाजपा की सरकार द्वारा जो दोहरी नीति अपनाई जा रही है. हम उसकी कड़ी आलोचना करते हैं. भाजपा के गुजरात से सांसद नारायण भाई कांछाड़िया को गुजरात की एक अदालत ने 2013 में एक दलित डॉक्टर के साथ मारपीट करने और जातिसूचक अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने और जान मारने की धमकी दिए जाने पर 2016 में 3 वर्ष की सजा सुनाई थी, तो इसी व्यवस्था में उन्हें इतने हफ्ते का समय दिया गया था कि वह उच्च न्यायालय में जा सके लेकिन जब उच्च न्यायालय में उनकी सजा को बरकरार रखा गया, तो उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में गुहार लगाई और सर्वोच्च न्यायालय ने उनको ₹500000 जुर्माने और माफी मांगने की सजा के साथ छोड़ दिया और उनकी सदस्यता बरकरार रखी गई।

केंद्र सरकार विपक्ष के साथ खुलकर भेदभाव कर रही है

वक्ताओं ने कहा कि राहुल के मामले में फैसले के दूसरे दिन उन्हें बंगला खाली करने का आदेश दे दिया. ऐसा ही एक मामला बिहार के भाजपा सांसद द्वारा चुनावी हलफनामे में गलत बातें दर्ज करने के कारण की सदस्यता रद्द कर दी गई थी और राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं देने किया गया था. इसके बावजूद उनकी सदस्यता पूरे संसद के कार्यकाल तक चलती रही थी. इन्हीं सब बातों को लेकर आज हमारा सत्याग्रह चल रहा है. यह देश बचाने की मुहिम है. केंद्र सरकार विपक्ष के साथ खुलकर भेदभाव कर रही है. इस अवसर पर सैफुद्दीन खान, यस सिन्हा सहित दर्जनों कांग्रेसी मौजूद थे.

राम भक्तों के लिए

गिरिडीह में कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर स्वास्थ विभाग ने किया मॉक ड्रिल, DC ने कोविड सेंटर का किया निरीक्षण

0

गिरिडीह : देश में एक बार फिर कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच  सरकार के दिशा-निर्देश पर गिरिडीह स्वास्थ्य विभाग ने भी कमर कस ला है। कोविड सेंटरों में व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर लिया गया है। वहीं शनिवार को बरहमोरिया स्थित कोविड सेंटर और जिला अस्पताल का उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के क्रम में  उन्होंने तैयार हो रहे आरटीपीसीआर लैब, पीसीए प्लांट, वार्ड, कोविड जांच केंद्र, समेत अन्य संसाधनों में जो भी कमी है, उसे दुरुस्त करने के निर्देश दिये। उपाक्क्त ने सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद मिश्रा को सभी व्यवस्थाओं को एर्लट मोड रखने का निर्देश दिया।

डीसी ने देखा मॉक ड्रिल

मौके पर स्वास्थ्य महकमे की ओर से उपायुक्त को मॉक ड्रिल कर दिखाया गया। इस दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने दिखाया गया कि कोविड मरीज मिलने पर कैसे उसे पीपीइ किट पहन कर एम्बुलेंस से सेंटर लाया जाएगा और फिर जांच कर उन्हें जरुरी सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी।

डीसी ने डॉक्टरों को एलर्ट मोड में रहने का दिया निर्देश

इस बाबत उपायुक्त श्री लकड़ा ने कहा कि कोविड के केसों में इजाफा देखते हुए व्यवस्थाओं का मुआयना किया गया। अगर कोरोना के मामले आते हैं तो उसके लिए पर्याप्त तैयारी की गयी है। साथ ही अन्य व्यवस्थाओं को भी दुरुस्त किया जा रहा है। उन्होंने जिले के सभी सदर अनुमंडल और प्रखंड अस्पतालों के डॉक्टरों को एलर्ट मोड रहने का निर्देश दिया है.

राम भक्तों के लिए

छात्र राजनीति के बाद अब मजदूरों की राजनीति करेंगे इंदरजीत सिंह, असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस के बने प्रदेश उपाध्यक्ष

0

रांची : 13 साल से छात्र राजनीति कर रहे और कांग्रेस के उभरते युवा नेता इंदरजीत सिंह की कर्मठता और  ईमानदारी को देखते हुए उन्हें अखिल भारतीय असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ उदित राज जी ने उन्हें झारखंड का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने इंदरजीत सिंह के नाम की अनुशंसा की है. श्री ठाकुर ने कहा है कि इंदरजीत सिंह कांग्रेस पार्टी के एक सक्रिय सदस्य रहे हैं, वे पूरी मेहनत के साथ कांग्रेस पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। अखिल भारतीय असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस के झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष ओमकार नाथ पांडेय जी ने इंदरजीत सिंह को कॉल कर बधाई दी एवं संगठन के प्रति पूरी मेहनत एव ईमानदारी से काम करने को कहा है।

अब मजदूरों के हक की आवाज बुलंद करेंगे

उपाध्यक्ष चुने जाने पर इंदरजीत सिंह ने कहा कि इतने सालों से छात्र राजनीति की है, अब मजदूरों के हक़ की आवाज बुलंद करेंगे और उनके लिए संघर्ष करेंगे. उनका मानना है कि मोदी सरकार के राजकाज में सबसे अधिक मजदूर वर्गों पर ही जुल्म हुआ है. कोरोनाकाल में जब लाखों असंगठित मजदूरों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था, तो मोदी सरकार ने इन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया था. इतना ही नहीं केंद्र सरकार के पास असंगठित मजदूरों का डेटा तक उपलब्ध नहीं है. उन्होंने कहा कि मजदूरों के पलायन पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार से बातचीत की जाएगी और प्लेसमेंट एंजेसियों के कार्यकलापों पर भी कड़ी निगाह रखी जाएगी. उन्होंने इसके लिए टास्क फोर्स के गठन की वकालत की है.  

कांग्रेसियों ने इंदरजीत सिंह को बधाई दी

इंदरजीत सिंह के प्रदेश उपाध्यक्ष बनने पर झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम, कृषि मंत्री बादल पत्रलेख, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, खिजरी विधायक राजेश कच्छप, महागामा विधायक दीपिका पांडेय, विधायक अम्बा प्रसाद, रांची महानगर अध्यक्ष कुमार राजा, यूथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अभिजीत राज, महिला प्रदेश अध्यक्ष गुंजन सिंह एवं कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी उन्हें बधाई एवं आशीर्वाद दिये।

एनएसयूआई के लिए भी काम किया

बता दें कि इंदरजीत सिंह 2009 में कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुए हैं. लगातार 13 सालों तक छात्र संगठन एनएसयूआई के लिए काम किया। उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग सिविल से बी.टेक एवं एमटेक किया है। उनके पिताजी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं। उन्होंने पूरे झारखंड में अपने काम से नाम बनाने की कोशिश की है। इसमें वे अबतक सफल भी रहे हैं.  

राम भक्तों के लिए

Tadi – The Natural Beer.

0

Tadi, also known as toddy, is a popular drink in many parts of the world, particularly in India and Sri Lanka. It is made from the sap of palm trees, and is a natural and refreshing alternative to many other alcoholic beverages.

 

The process of making tadi starts with tapping the sap from the palm tree. The sap is collected in a container and left to ferment naturally, usually for a period of several hours. During this time, yeast present in the air or on the surface of the container will begin to consume the sugars in the sap, producing alcohol and carbon dioxide.

 

 

The resulting liquid is typically cloudy and slightly sweet, with a mildly sour taste. It is often consumed fresh, either straight from the container or poured over ice. In some cases, it may be further processed to produce a more concentrated form of alcohol, such as arrack, which is a popular spirit in Sri Lanka.

 

Tadi has a long history in many parts of the world. It was consumed by ancient cultures such as the Maya and Aztecs in Central America, and has been a staple of traditional medicine in many parts of Asia for centuries. In India, it is commonly associated with the state of Kerala, where it has been a popular beverage for centuries.

 

 

In addition to its refreshing taste, tadi has a number of potential health benefits. It is a natural source of probiotics, which can help to support digestive health and boost the immune system. It also contains a range of vitamins and minerals, including potassium, magnesium, and B vitamins.

 

However, it is important to note that tadi can also have some negative effects on health if consumed in excess. The fermentation process can lead to the growth of harmful bacteria, which can cause food poisoning and other health problems. In addition, tadi is a relatively high-calorie beverage, and should be consumed in moderation as part of a balanced diet.

 

 

In some parts of the world, tadi production is also associated with a number of social and economic issues. In India, for example, many palm trees are owned by large corporations or wealthy landowners, who often exploit workers and pay low wages for the collection of sap. This has led to calls for greater regulation and fairer working conditions in the tadi industry.

 

 

Despite these challenges, tadi remains a popular and beloved beverage in many parts of the world. Its natural and refreshing taste, combined with its potential health benefits, make it an attractive alternative to other alcoholic beverages. With greater awareness and understanding of the challenges faced by the tadi industry, it may be possible to support the sustainable production of this delicious and unique drink for generations to come.Regenerate response

 

 

Powered by myUpchar

Powered by myUpchar

Powered by myUpchar

Powered by myUpchar

Powered by myUpchar

Powered by myUpchar

राम भक्तों के लिए

विश्वकर्मा युवा मंच रांची के तत्वधान में राम नवमी के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई

0

विश्वकर्मा युवा मंच रांची के तत्वधान में राम नवमी के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा विश्वकर्मा सेवा भवन जयप्रकाश नगर से निकाली गई और चूना भट्ठा गाड़ी खाना चौक अपर बाजार शहीद चौक मेन रोड होते हुए विश्वकर्मा मंदिर गई।
मेन रोड अल्बर्ट एका चौक के पास राज्यसभा सांसद माननीय श्रीमती महुआ मांझी जी एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री माननीय श्री सुबोध कांत सहाय, अरुण वर्मा , शोमित मांझी के द्वारा विश्वकर्मा युवा मंच के पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया। मंदिर में शोभा यात्रा का स्वागत किया गया।
गाड़ी खाना चौक समीप मुस्लिम भाइयों के द्वारा विश्वकर्मा युवा मंच के शोभायात्रा को स्वागत किया गया। शोभा यात्रा की अध्यक्षता विश्वकर्मा युवा मंच के अध्यक्ष विक्रांत विश्वकर्मा ने किया और संचालन महासचिव राकेश कुमार शर्मा ने किया इस अवसर पर मंच के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं सदस्यगण उपस्थित थे। सभी को विश्वकर्मा युवा मंच के द्वारा आभार प्रकट करते हैं।

राम भक्तों के लिए
IIT - Polo Tshirt - Premium