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Sunday, July 5, 2026
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गुमला में पुलिस पदाधिकारियों का फेरबदल

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न्यूज – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला: गुमला के पुलिस अधीक्षक हरिश बिन जमां ने जिले में प्रशासनिक कसावट लाने के उद्देश्य से 4 पुलिस पदाधिकारियों का तबादला किया है।अरविंद कुमार को चैनपुर थाना का नया थाना प्रभारी नियुक्त किया गया है।नीरज कुमार सिसई के नए थाना प्रभारी होंगे।संतोष कुमार सिंह को भरनो थाना का प्रभारी बनाया गया है।भरनो के निवर्तमान प्रभारी कंचन प्रजापति को पुलिस केंद्र, गुमला भेजा गया है।एसपी ने सभी पदाधिकारियों को तत्काल अपने नए पदस्थापन स्थान पर योगदान देने का निर्देश दिया है।

राम भक्तों के लिए

जल महोत्सव पखवाड़ा के अंतर्गत विश्व प्लम्बर दिवस पर जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन

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न्यूज – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला गुमला जिला में पेयजलापूर्ति योजनाओं के बेहतर संचालन एवं रखरखाव, पेयजल संरक्षण और पेयजल प्रबंधन में बेहतर काम करने हेतु सभी प्रखंडों के नल जल मित्रों को वितरित किये गये प्लम्बिंग टूल्स और किया गया सम्मानित, गुमला उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के निर्देश के आलोक में जल जीवन मिशन के अंतर्गत विश्व प्लम्बर दिवस के अवसर पर समाहरणालय सभागार, गुमला में जल महोत्सव पखवाड़ा के तहत जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ की गई।

कार्यक्रम के दौरान पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, गुमला के कार्यपालक अभियंता अनुज कुमार मिश्रा ने उपविकास आयुक्त का स्वागत करते हुए जल महोत्सव पखवाड़ा के दौरान आयोजित की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, पेयजल की गुणवत्ता एवं उसके सतत प्रबंधन में नल जल मित्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर जिला समन्वयक एवं कनीय अभियंता पीपीटी के माध्यम से नल जल मित्रों के कौशल विकास के निमित्त तथा झारखंड राज्य पेयजलापूर्ति संचालन एवं सम्पोषण नीति-2025 के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई तथा जल जीवन मिशन के उद्देश्यों और ग्रामीण क्षेत्रों में इसके महत्व और जल जीवन मिशन मे नल जल मित्रों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

कार्यक्रम के दौरान पेयजल एवं स्वच्छता के क्षेत्र में सक्रिय योगदान एवं कार्य के लिए 50 नल जल मित्रों को प्लम्बिंग टूल्स, नल जल मित्र प्रमाण पत्र एवं शाल देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर उपविकास आयुक्त गुमला,जिला समाज कल्याण पदाधिकारी,जिला कल्याण पदाधिकारी, विभिन्न प्रखंडों से आई जलसहियाएं, विभिन्न पंचायतों के नल जल मित्रगण , सहायक अभियंता, कनीय अभियंता, सभी प्रखंड वॉश समन्वयक सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन जल जीवन मिशन के जिला समन्वयक सूर्यकान्त सुमन द्वारा किया गया।

घर घर नल से जल की आपूर्ति को बनाये रखने ,लीकेज और पाइपलाइन की मरम्मति, जल गुणवता प्रभावित करने वाले कारणों को ठीक करने एवं ग्रामीण स्तर पर अच्छी जल सेवा सुनिश्चित करने मे नल जल मित्रों की भूमिका को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया गया l

राम भक्तों के लिए

उपायुक्त ने कामडारा प्रखंड के उरुगुट्टू गांव का किया दौरा, विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं का लिया जायजा

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न्यूज – गणपत लाल चौरसिया 

खूंटी जिला की बॉर्डर से सटे सुदूरवर्ती क्षेत्र में स्थित है उरुगुट्टू गांव, जहां लगभग 200 नागरिकों की है आबादी

महिला समूहों की भागीदारी से बढ़ रही आजीविका एवं कृषि गतिविधियां

इसी मॉडल पर अन्य गांवों में भी कार्य करने का उपायुक्त ने दिया निर्देश

गुमला : – गुमला उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित द्वारा प्रोजेक्ट द्वार के तहत कामडारा प्रखंड के रामतोलिया पंचायत अंतर्गत उरुगुट्टू गांव का दौरा किया गया। यह गांव अत्यंत सुदूरवर्ती क्षेत्र में स्थित है तथा खूंटी जिला की सीमा (बॉर्डर ) के समीप अवस्थित है। उपायुक्त ने गांव में विभिन्न विभागों एवं सहयोगी संस्था प्रदान (PRADAN) के समन्वय से संचालित योजनाओं एवं विकासात्मक कार्यों का अवलोकन करते हुए समीक्षा की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उपायुक्त ने कहा कि उरुगुट्टू गांव को क्लस्टर बेस्ड अप्रोच के तहत विकसित करते हुए इसे ‘जल पर्याप्त गांव’ बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि यह गांव एक मॉडल के रूप में विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि इस मॉडल के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए इसी तर्ज पर अन्य गांवों में भी योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा।

निरीक्षण के दौरान बताया गया कि गांव में कृषि विभाग के माध्यम से 30 परिवारों द्वारा सरसों एवं 5 परिवारों द्वारा गेहूं की खेती की जा रही है। वहीं 3 परिवारों द्वारा 6 एकड़ भूमि में ड्रिप सिंचाई की व्यवस्था की गई है। मनरेगा के अंतर्गत 6 कुओं का निर्माण कराया गया है तथा भग्य योजना के अंतर्गत 8 परिवारों को 6 एकड़ भूमि पर लाभान्वित किया गया है। गांव में जल नल योजना के माध्यम से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की गई है तथा 7 नए किसानों के लिए ड्रिप सिंचाई स्वीकृत की गई है।
उद्यान विभाग द्वारा गांव में 4 वर्मी बेड स्थापित किए गए हैं। वहीं मत्स्य विभाग के माध्यम से 3 परिवारों को मत्स्य पालन से जोड़ा गया है। भूमि संरक्षण विभाग द्वारा 2 तालाबों का निर्माण, 1 ट्रैक्टर, 10 पंप एवं एक टैंक उपलब्ध कराया गया है।
सहयोगी संस्था प्रदान द्वारा गांव में 16 तालाबों का निर्माण, 25 एकड़ में ट्रीटमेंट कार्य, 15 एकड़ में खेती-बाड़ी का विकास, 2 परिवारों को ड्रिप सिंचाई, 1 नेटशेड एवं 1 एकड़ में फेंसिंग की व्यवस्था की गई है। गांव के लगभग 50 किसान एफपीओ से जुड़े हुए हैं। गांव की कुल जनसंख्या लगभग 200 है तथा 55 परिवारों को विभिन्न कृषि एवं आजीविका योजनाओं से लाभान्वित किया गया है।

गांव में 4 महिला मंडल समूह सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। समूह से जुड़ी महिलाओं ने उपायुक्त को बताया कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें विभिन्न आजीविका गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिला है, जिससे वे अपने परिवार का बेहतर तरीके से पालन-पोषण कर पा रही हैं। उपायुक्त ने महिलाओं के साथ संवाद करते हुए उन्हें मशरूम उत्पादन एवं अन्य आजीविका गतिविधियों से जोड़ने हेतु अधिकारियों को निर्देश दिया। इस दौरान उपायुक्त ने महिला समूहों के साथ स्मृति स्वरूप सेल्फी भी ली।
दौरे के दौरान ग्रामीणों ने चेक डैम निर्माण की मांग रखी। ग्रामीणों ने बताया कि चेक डैम बनने से क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी और वे गेहूं सहित अन्य फसलों की खेती कर सकेंगे। साथ ही ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि क्षेत्र में लाह की खेती भी की जाती है।
इस अवसर पर जिला कृषि पदाधिकारी एवं भूमि संरक्षण पदाधिकारी द्वारा किसानों को आगामी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया गया कि किसानों को तालाब से लिफ्ट इरीगेशन के माध्यम से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही किसानों के बीच सिंचाई मशीन, मिनी ट्रैक्टर एवं अन्य कृषि उपकरणों का वितरण भी किया जाएगा। उपायुक्त ने अधिकारियों को गांव के अधिक से अधिक किसानों को लिफ्ट इरीगेशन से जोड़ने के निर्देश दिए।
गांव भ्रमण के दौरान ग्रामीणों द्वारा सड़क, शौचालय, सामुदायिक भवन, धूमकुड़िया भवन, नाली निर्माण, राशन व्यवस्था, आंगनवाड़ी केंद्र, विद्यालय तथा पेयजल व्यवस्था से संबंधित मांगें भी रखी गईं। उपायुक्त ने संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
दौरे के क्रम में उपायुक्त ने गांव के विभिन्न खेतों का भी निरीक्षण किया, जहां वर्तमान में धान, तरबूज सहित अन्य फसलों की खेती की जा रही है। उन्होंने तालाब निर्माण को बढ़ावा देने तथा महिला समूहों को उसमें मछली बीज डालकर मत्स्य पालन से जोड़ने के लिए भी प्रेरित किया।

ग्रामीण महिलाओं ने उपायुक्त को बताया कि पूर्व में यह क्षेत्र काफी हद तक बंजर था और यहां कृषि गतिविधियां सीमित थीं, परंतु जिला प्रशासन, JSLPS तथा प्रदान संस्था के संयुक्त प्रयासों से गांव में खेती-बाड़ी और आजीविका गतिविधियों का विस्तार हुआ है तथा महिलाएं भी सक्रिय रूप से कृषि कार्यों में भागीदारी कर रही हैं।

उपायुक्त ने गांव में संचालित कार्यों की सराहना करते हुए अधिकारियों को क्लस्टर आधारित मॉडल के तहत गांव के समग्र विकास को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए तथा ग्रामीणों को हर संभव प्रशासनिक सहयोग का आश्वासन दिया।

मौके पर अनुमंडल पदाधिकारी, जिला मत्स्य पदाधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी, उद्यान पदाधिकारी, सहकारिता पदाधिकारी, भूमि संरक्षण पदाधिकारी, पशुपालन पदाधिकारी, बीडीओ एवं अंचल अधिकारी कामडारा सहित प्रदान संस्था के प्रतिनिधि मेराज तथा अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए

OIL IS NOT WELL

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OIL IS NOT WELL IN COUNTRY

India is facing a growing crisis as the supply of Liquefied Petroleum Gas (LPG) continues to be disrupted across several cities amid the ongoing conflict between Iran and the United States. The geopolitical tensions have significantly affected global energy supply chains, leading to shortages of cooking gas in many parts of the country. The situation has begun to impact daily life, with both households and businesses struggling to access essential fuel for cooking.

One of the worst affected sectors is the restaurant and hospitality industry. In several cities, restaurants, street food vendors, and small eateries have been forced to suspend operations due to the unavailability of commercial LPG cylinders. Restaurant owners say that without a stable supply of cooking gas, running kitchens has become nearly impossible. Many businesses that depend on daily cooking operations are reporting heavy losses as customers are turned away.

According to traders and local distributors, the shortage has also led to the emergence of black marketing in several urban areas. In many cities, LPG cylinders are reportedly being sold at prices far higher than the official rates. Some consumers claim they are being forced to pay double or even triple the normal price just to obtain a cylinder. This illegal trade is further worsening the crisis for common citizens who rely on LPG for their daily cooking needs.

Opposition parties have strongly criticized the government over the situation, accusing it of failing to anticipate the impact of the Iran–US conflict on India’s energy supply. Political leaders have questioned the government’s foreign policy and preparedness, arguing that better diplomatic and supply management strategies could have prevented such a severe shortage. They claim that the government should have taken early steps to secure alternative sources of LPG imports.

Meanwhile, consumer groups and business associations are urging authorities to intervene immediately. Industry representatives say the government must ensure emergency supply arrangements, increase domestic distribution, and take strict action against black market operators who are exploiting the crisis.

Experts warn that if the situation is not addressed quickly, the shortage could intensify and affect millions of households across the country. The demand for cooking gas remains high, and any prolonged disruption could have serious economic and social consequences.

As the crisis continues, citizens and businesses alike are looking toward the government for swift and decisive action. Ensuring adequate LPG supply and stabilizing the market has now become an urgent priority to prevent further disruption to everyday life in the country.

राम भक्तों के लिए

राष्ट्रपति का बार-बार अपमान करने में सबसे आगे कौन ? आदिवासी का सम्मान नहीं करने के आरोप पर ममता ने दिखा दिया भाजपा को आईना

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राष्ट्रपति के सम्मान के बहाने ममता बनर्जी को आदिवासी विरोधी बताकर आदिवासी कार्ड खेलने में भाजपा हो गई फेल

नारायण विश्वकर्मा

प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बीच चली जुबानी जंग और उसके बाद उत्पन्न प्रशासनिक विवाद में प्रधानमंत्री की इंट्री ने इस मामले को बेवजह तूल देने की कोशिश की गई. इस मामले में सीएम ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश की सर्वोच्च संवैधानिक कुर्सी का अपमान करने का आरोप लगाया तो टीएमसी सरकार ने पीएम के बयान का मखौल उड़ा दिया. अगर हम पिछले कुछ वर्षों की घटनाओं को देखें, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि कई महत्वपूर्ण अवसरों पर स्वयं भाजपा सरकार ने राष्ट्रपति को वह केंद्रीय स्थान नहीं दिया, जिसकी अपेक्षा संविधान और परंपरा दोनों करते हैं।

प्रोटोकॉल के उल्लंघन के अपने रुख का बचाव करते हुए ममता ने कहा कि सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब बागडोगरा में मुर्मू का स्वागत करने के लिए मौजूद थे। मैं धरने पर बैठी हूं और लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ रही हूं। मैं कैसे जा सकती हूँ? मुझे तो धरने से पहले आपके आने की सूचना भी नहीं थी। यह मेरी प्राथमिकता है क्योंकि इसमें लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन शामिल है.

ममता ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के लिए कथित तौर पर उनकी आलोचना करने के लिए मोदी पर भी जमकर हमला बोला। अपने दावे को पुष्ट करने के लिए ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री की एक बड़ी तस्वीर दिखाई, जिसमें वह भाजपा के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी के साथ एक कार्यक्रम में बैठे हुए थे और राष्ट्रपति उनके बगल में खड़ी थीं। दरअसल, लोकतंत्र में नैतिकता का अर्थ केवल विरोधियों पर आरोप लगाना नहीं होता। नैतिकता का अर्थ यह भी है कि जो मानदंड आप दूसरों के लिए तय करते हैं, उन्हें स्वयं भी समान रूप से लागू करें।

प. बंगाल में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर केंद्र हर स्तर पर ममता बनर्जी को घेरने की फिराक में है. भाजपा ने इस मामले को बड़े राजनीतिक अभियान की तरह पेश किया। भाजपा के कई बड़े नेताओं ने इसे आदिवासी सम्मान और संवैधानिक गरिमा से जोड़ने की कोशिश की. लेकिन तृणमूल कांग्रेस और विपक्ष के कई नेताओं ने राष्ट्रपति को खुद बार-बार अपमान करने और उन्हें उचित सम्मान नहीं देने की याद दिला कर भाजपा को बैकफुट पर ला दिया.

ममता ने तस्वीर दिखा कर पीएम को घेरा

ममता बनर्जी ने भाजपा नेतृत्व को आईना दिखाते हुए वह तस्वीर पेश कर दी जिससे भाजपा को मिर्ची लगी. इसपर अभी तक भाजपा की ओर से कोई सफाई नहीं आई कि आखिर राष्ट्रपति के साथ ऐसा सलूक क्यों किया गया? वह तस्वीर मार्च 2024 में राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा आडवाणी को उनके नई दिल्ली स्थित आवास पर देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, भारत रत्न से सम्मानित करने के कार्यक्रम की है। तस्वीर में दिख रहा है कि प्रधानमंत्री बैठे हैं जबकि राष्ट्रपति खड़े हैं। ममता बनर्जी ने तस्वीर पोस्ट करते हुए कहा कि हम ऐसा कभी नहीं करते। राष्ट्रपति का अपमान करने की संस्कृति भाजपा की है, हमारी नहीं.

हालांकि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस मामले को जिस तरह सार्वजनिक किया है, वैसा इतिहास में शायद ही किसी राष्ट्रपति ने किया हो. आमतौर पर ऐसे विवाद सार्वजनिक नहीं होते. अधिकारियों या अनौपचारिक मध्यस्थों के जरिए चुपचाप हल निकाल लिया जाता है, लेकिन राष्ट्रपति मुर्मू ने इस बारे में भाषण दिया. यह उनकी गरिमा के प्रतिकूल प्रतीत होता है. उन्होंने इस मुद्दे को व्यक्तिगत बना दिया, जब उन्होंने कहा कि ममता मेरी छोटी बहन जैसी है. मुझे नहीं पता वे मुझसे क्यों नाराज़ हैं. अगर आप भारत की राष्ट्रपति हैं और छोटी बहन से नाराज़ हैं, तो बेहतर यही है कि आप उन्हें फोन कर लेती. अब तक तो यही परंपरा रही है.

टीएमसी का आरोप…राष्ट्रपति का चुनावी राजनीति में मोहरे की तरह हो रहा इस्तेमाल

ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति की हर बात का अपना जवाब दिया है. मुख्यमंत्री के समर्थकों ने यह भी कहा है कि राष्ट्रपति को चुनावी राजनीति में मोहरे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. उनका कहना है कि राष्ट्रपति का खुद को “बंगाल की बेटी” कहना और प्रधानमंत्री का उनके आदिवासी पृष्ठभूमि का ज़िक्र करना इन सबका मकसद यह दिखाना है कि ममता बनर्जी ने एक महत्वपूर्ण आदिवासी नेता का अपमान किया और इस तरह सभी आदिवासियों का अपमान किया है. राष्ट्रपति को समझना चाहिए था कि अगर आप चुनाव से पहले किसी विपक्षी दल की सरकार वाले राज्य में जा रहे हैं, तो बेहतर है कि मुख्यमंत्री के साथ अपने मतभेद को व्यक्तिगत बनाकर सार्वजनिक न करें क्योंकि इसका राजनीतिक इस्तेमाल हो सकता है.

टीएमसी की ओर से कहा गया कि भाजपा प. बंगाल विधानसभा चुनावों में राष्ट्रपति के अपमान को चुनावी मुद्दा इसलिए बना रही है क्योंकि भाजपा के पास जनहित के अन्य कोई मुद्दे नहीं हैं, प. बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राष्ट्रपति की बार-बार यात्राएं उचित नहीं है। राष्ट्रपति का प. बंगाल में अपमान हो और उस पर राजनीति की जा सके, क्या इसी उद्देश्य के चलते राष्ट्रपति को प. बंगाल के दौरे पर भेजा जा रहा है? टीएमसी ने सवाल बार-बार उठाया कि मणिपुर में आदिवासी महिलाओं को निर्वस्त्र किए जाने पर राष्ट्रपति चुप क्यों रहीं?  उद्योगपतियों ने आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन को निगल लिया है, बावजूद इसके राष्ट्रपति खुली आंखों से इन अत्याचारों को क्यों सहन कर रही हैं?

हरियाणा में दो बार सीएम गैरहाजिर रहे, तब राष्ट्रपति-पीएम चुप क्यों रहे?

याद करा दें कि जब द्रौपदी मुर्मू हरियाणा में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हुर्इं, तो उस राज्य के भाजपा मुख्यमंत्री कम से कम दो बार अनुपस्थित रहे। तब भी आदिवासी महिला राष्ट्रपति का अपमान हुआ था, लेकिन इस मामले में राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री मोदी को बुरा नहीं लगा क्योंकि वहां डबल इंजन की सरकार है. भाजपा के अपने कोई विचार नहीं हैं। वह उस समय जो भी मुद्दा मिलता है, उसे उठाती है और चुनाव समाप्त होने तक उस पर स्यापा मचाती रहती है। सच कहा जाए तो मोदी के अमृत काल में राष्ट्रपति भवन की गरिमा धूमिल हुई है.

झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश, प. बंगाल, मणिपुर व अन्य आदिवासी-दलित बहुल राज्यों में आदिवासी मतदाता चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। भाजपा को लगा कि वह चुनाव में इस मामले को उछाल कर वोटरों को लुभा सकते हैं, लेकिन भाजपा की यह चाल सफल नहीं सकी.

राष्ट्रपति ने बंगाल की ट्रेनी डाक्टर पर भी दिया था बयान 

 याद करें जब प. बंगाल में ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए जघन्य अपराध के 20 दिनों बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बड़े बयान ने देश को चौंका दिया था. राष्ट्रपति ने कहा था कि निर्भया कांड के 12 सालों में अनगिनत रेपों को समाज भूल चुका है. यह सामूहिक भूलने की बीमारी सही नहीं है. इतिहास का सामना करने से डरनेवाले समाज सामूहिक स्मृति लोप का सहारा लेते हैं. अब भारत के लिए इतिहास का सामना करने का समय आ गया है. उनका बयान उस समय आया था जब 25 अगस्त को भाजपा ने बंगाल बंद का आह्वान किया था. उस ऐसा लगा था कि बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है.

मणिपुर की हिंसा पर मौन क्यों रही?

इस मामले में विपक्ष और प. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी का यह आरोप था कि राष्ट्रपति का बयान उस समय क्यों नहीं आया जब मणिपुर को हिंसा की भट्ठी में झोंक दिया गया था. राष्ट्रपति के बंगाल पर दिए गए बयान को मणिपुर हिंसा से जोड़कर देखा जा रहा था. उस दौरान मणिपुर के सीएम का वह शर्मनाक बयान आया था कि इस तरह की तमाम घटनाएं यहां होती रहती हैं. वहीं दूसरी ओर वहां की पूर्व राज्यपाल अनुसुइया उइके राष्ट्रपति से मिलकर नम आंखों से वहां के बेकाबू हालात के बारे में बताया था. मीडिया से उन्होंने कहा था कि मैंने जिंदगी में ऐसी इतनी हिंसा नहीं देखी. ऐसी जघन्य घटनाओं पर केंद्र से मार्मिक अपील की थी कि मणिपुर के हालात बदतर है, वहां कानून-व्यवस्था बेकाबू है. सख्त कदम उठाने की जरूरत है. इसके बावजूद राष्ट्रपति के रोंगटे खड़े नहीं हुए. इसके लिए मणिपुर की आदिवासी जमात शायद ही उन्हें माफ करे. सैकड़ों भुक्तभोगियों ने मणिपुर के सीएम को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की गुहार लगाई पर राष्ट्रपति का दिल नहीं पसीजा. इसके अलावाहाथरस, उन्नाव और अंकिता भंडारी जैसे जघन्य दुष्कर्म हत्याकांड पर राष्ट्रपति खामोश रहीं.

सीएम हेमंत सोरेन ने मणिपुर हिंसा पर राष्ट्रपति को पत्र भेज कर आदिवासी बहनों की सुरक्षा की गुहार लगाई थी

मणिपुर हिंसा से व्यथित झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने 22 जुलाई 2023 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम मार्मिक चिट्ठी लिखी. बंगाल के संदर्भ में राष्ट्रपति के बयान आने के बाद हेमंत सोरेन के उस पत्र के मार्मिक पहलुओं पर हमें गौर करना चाहिए. हेमंत सोरेन ने मणिपुर हिंसा पर राष्ट्रपति को चुप्पी तोड़ने का आग्रह किया था. पत्र में उन्होंने कहा था कि क्रूरता के सामने चुप्पी साधना भी भयानक अपराध है. झारखंड के मुख्यमंत्री और देश के जिम्मेदार नागरिक होने के नाते मणिपुर घटना को लेकर काफी व्यथित और चिंतित हूं. सीएम ने लिखा था कि दो दिन पहले मणिपुर का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ, जिसमें महिलाओं के साथ ऐसी बर्बरता दिखी है, जिसके बारे में जिक्र भी नहीं किया जा सकता. इस वीडियो ने हम सभी को व्याकुल कर दिया है.

मणिपुर हिंसा पर कोई आधिकारिक बयान क्यों नहीं आया?

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पत्र में कहा था कि मणिपुर में आदिवासी महिलाओं के साथ जिस तरह से बर्बरतापूर्ण व्यवहार हुआ, वह अत्यंत चिंतनीय और निंदनीय है. इस घटना ने पूरे देश को अंदर तक झकझोर कर रख दिया है. भारत के संविधान में देशवासियों को प्राप्त सम्मान के अधिकार को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है. राष्ट्रपति से मुख्यमंत्री ने पत्र में आग्रह किया था कि मणिपुर और देश के सामने संकट की इस घड़ी में हम आपको आशा और प्रेरणा के अंतिम स्रोत के रूप में देखते हैं जो इस कठिन समय में मणिपुर के लोगों को रोशनी दिखा सकतीं हैं. हमें अपने साथी आदिवासी भाइयों और बहनों के साथ हो रहे बर्बर व्यवहार को रोकना होगा.
मणिपुर हिंसा को लेकर राष्ट्रपति की खामोशी पर विपक्ष ने सवाल उठाए थे, लेकिन इस संबंध में कभी कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। आमतौर पर राष्ट्रपति सरकार की सलाह पर कार्य करते हैं, और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दों पर उनकी चुप्पी को संवैधानिक सीमाओं या सरकार के रुख से जोड़कर देखा जाता है।

नये संसद भवन के उद्घाटन में राष्ट्रपति की उपेक्षा क्यों ?

नए संसद भवन के उद्घाटन के समय संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति के पद की गरिमा को तार-तार किया गया. 28 मई 2023 के दिन नये संसद भवन का उद्घाटन हुआ. भारतीय लोकतंत्र के इस ऐतिहासिक दिन में राष्ट्रपति को आमंत्रण नहीं मिलना संसदीय परम्परा का अपमान था. कायदे से तो नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति को करना चाहिए था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ऐतिहासिक क्षण को अपने नाम दर्ज करना चाहते थे. हालांकि इसके पक्ष-विपक्ष में कई तर्क गढ़े गए. लेकिन अधिकतर लोगों ने यही कहा कि आदिवासी होने के कारण द्रौपदी मुर्मू को नए संसद भवन से दूर रखा गया. लेकिन संवैधानिक अधिकार होने के बावजूद राष्ट्रपति ने इस पूरे प्रकरण में चुप्पी साधे रखी. यह उनकी मजबूरी थी. देश भर में इस प्रकरण में लंबी बहस छिड़ गई थी. कई संवैधानिक विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों ने सवाल उठाया कि क्या यह राष्ट्रपति पद की गरिमा को कमतर करने वाला कदम नहीं था। फिर कैसे माना जाए कि भाजपा वास्तव में राष्ट्रपति पद के सम्मान को लेकर गंभीर है.

राम मंदिर समारोह से राष्ट्रपति को क्यों दूर रखा गया ?

अयोध्या में बने राम मंदिर को भाजपा ने अपने राजनीतिक और सांस्कृतिक अभियान का सबसे बड़ा प्रतीक बनाया। भूमि पूजन से लेकर प्राण प्रतिष्ठा समारोह तक हर बड़े कार्यक्रम में प्रधानमंत्री और भाजपा नेतृत्व रहा। लेकिन देश की राष्ट्रपति को उस ऐतिहासिक अवसर पर वह प्रमुख स्थान नहीं मिला, जिसकी उम्मीद की जा सकती थी।

राजनीतिक लाभ के लिए आदिवासी पहचान का इस्तेमाल करने के लिए राष्ट्रपति पद पर आदिवासी महिला का होना निश्चित रूप से एक सकारात्मक संदेश हो सकता था। लेकिन अगर उसी समय आदिवासी क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण, खनन परियोजनाओं और विस्थापन के सवाल उठते रहें, तो यह प्रतिनिधित्व केवल प्रतीकात्मक बनकर रह जाता है। इस बारे में राष्ट्रपति ने अपनी कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? पूर्व राष्ट्रपति रामकोविंद को भी समारोह से दूर रखा गया. इससे भाजपा की मानसिकता उजागर हो गई. लेकिन सत्तापक्ष की ओर तमाम कुतर्क पेश किए गए. यही काम मेनस्ट्रीम मीडिया ने भी किया.

दरअसल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सम्मान के बहाने ममता बनर्जी को आदिवासी विरोधी बताकर आदिवासी-दलित कार्ड खेलने का प्रयास किया जा रहा है. लेकिन राष्ट्रपति का कई बड़े अवसरों पर जिस तरह से अनादर किया गया, वह भारतीय राजनीतिक इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है. सत्ता के इशारे पर राष्ट्रपति हो या राज्यपाल, इन्हें काम करना पड़ता है, यह भी इतिहास में दर्ज होता रहा है और  आगे भी होता रहेगा. यही भी कटू सत्य है.

राम भक्तों के लिए

रांची में घरेलू गैस की पर्याप्त आपूर्ति, घबराकर बुकिंग न करें – उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री

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शीर्षक: रांची में घरेलू गैस की पर्याप्त आपूर्ति, घबराकर बुकिंग न करें – उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री

रांची: रांची जिले में घरेलू रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता है और आम लोगों को किसी भी प्रकार की घबराहट या अनावश्यक बुकिंग करने की जरूरत नहीं है। यह जानकारी उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के साथ आयोजित बैठक में आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल के प्रतिनिधियों ने दी। कंपनियों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि जिले में गैस की आपूर्ति सामान्य है और पैनिक बुकिंग के कारण कंपनियों के सॉफ्टवेयर पर दबाव बढ़ गया है। फिलहाल सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन का कार्य जारी है और कुछ ही दिनों में बुकिंग व्यवस्था पूरी तरह सामान्य हो जाएगी।

25 दिनों के बाद ही दूसरी बुकिंग संभव

बैठक में बताया गया कि भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार एक सिलेंडर की बुकिंग के बाद अगली बुकिंग 25 दिनों के बाद ही की जा सकेगी। हालांकि आपात स्थिति में उपभोक्ता 2 किलो और 5 किलो के छोटे सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं। कंपनियों के अनुसार एचपीसीएल और बीपीसीएल के 5 किलो वाले सिलेंडर बाजार में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, जिन्हें उपभोक्ता आधार कार्ड दिखाकर प्राप्त कर सकते हैं।

IVR, ऐप और वेबसाइट से करें बुकिंग

गैस कंपनियों के प्रतिनिधियों ने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे गैस बुकिंग के लिए आईवीआर, मिस्ड कॉल, मोबाइल ऐप और वेब आधारित सेवाओं का उपयोग करें। एजेंसियों के कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं है। बुकिंग में हो रही देरी केवल सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन के कारण है, जिसे जल्द ही ठीक कर लिया जाएगा।

कालाबाजारी पर होगी कड़ी कार्रवाई

उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी गैस एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत गैस की आपूर्ति पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जिला स्तर पर बनेगी मॉनिटरिंग कमेटी

उपायुक्त ने अस्पतालों, आंगनवाड़ी केंद्रों, ओल्ड एज होम, अनाथालय, जेल और अन्य संस्थानों में गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी बनाने का निर्देश दिया। साथ ही गैस आपूर्ति से संबंधित शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए अबुआ साथी हेल्पलाइन (9430328080) पर संपर्क करने की अपील की गई।

टीम इंडिया, टीम झारखंड और टीम रांची बनकर करें काम

उपायुक्त ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सभी विभागों, कंपनियों और नागरिकों से मिलकर “टीम इंडिया, टीम झारखंड और टीम रांची” की भावना से काम करने की अपील की, ताकि जिले में रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति बनी रहे।

News Desk


राम भक्तों के लिए

सीआईएसएफ के 57वें स्थापना दिवस पर भव्य परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित

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न्यूज – कहकशां फारूकी 

गोमिया____ बी एंड के एरिया स्थित परेड ग्राउंड में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के 57वें स्थापना दिवस के अवसर पर भव्य परेड एवं विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ढोरी एरिया के महाप्रबंधक रंजय सिन्हा थे। कार्यक्रम की शुरुआत में सीसीएल करगली के कमांडेंट राज प्रताप सिंह ने मुख्य अतिथि का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।
इस अवसर पर उप कमांडेंट गारा अभिलाष, सहायक कमांडेंट सार्थक बाबाजी, के.वी. अनंथा श्रीधर सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। स्थापना दिवस पर आयोजित परेड में तीन टुकड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। परेड का नेतृत्व परेड कमांडर निरीक्षक (कार्य) प्रदीप कुमार सिंह तथा उप परेड कमांडर उपनिरीक्षक (कार्य) हरेश कुमार सिंह कर रहे थे। जब सुसज्जित टुकड़ियां मंच के सामने से कदमताल करती हुई गुजरीं, तो उपस्थित सैकड़ों अतिथियों, जवानों के परिजनों और बच्चों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया। परेड के दौरान मुख्य अतिथि को सलामी दी गई।
मुख्य अतिथि रंजय सिन्हा ने अपने संबोधन में सीसीएल परियोजनाओं में उत्खनन कार्य के दौरान सीआईएसएफ द्वारा निभाई जा रही सुरक्षा जिम्मेदारियों की सराहना की और कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी बल के जवान पूरी निष्ठा और तत्परता से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कमांडेंट राज प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में बल के अनुशासन और कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए हाल ही में आयोजित साइक्लोथॉन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि साइक्लोथॉन का उद्देश्य जवानों में शारीरिक फिटनेस को बढ़ावा देना, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना तथा स्वस्थ जीवन शैली के प्रति प्रेरित करना है।
परेड के बाद श्वान दस्ते द्वारा आकर्षक प्रदर्शन, सीआईएसएफ कमांडो द्वारा हथियारों का डेमो, टग ऑफ वॉर सहित कई मनोरंजक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इसके अलावा पारिवारिक आवास परिसर के बच्चों और महिलाओं के लिए लेमन रेस जैसी प्रतियोगिताएं भी कराई गईं। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कमांडो द्वारा हथियारों का लाइव प्रदर्शन रहा, जिसे देखने के लिए लोग उत्साहित नजर आए।
इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले बल के सदस्यों को पुरस्कृत किया गया तथा उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों के लिए विशेष जलपान की व्यवस्था भी की गई।
कार्यक्रम का संचालन महिला निरीक्षक कुमारी आरती सिंह और निरीक्षक (कार्य) अजय कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में उप कमांडेंट गारा अभिलाष, सहायक कमांडेंट सार्थक बाबाजी, के.वी.ए. श्रीधर, निरीक्षक चंदन कुमार, अमित कुमार झा, पी.के. सिंह, निकुज कुमार, दीपक कुमार, उपनिरीक्षक संतोष कुमार तिवारी, प्रदीप कुमार, अमित कुमार, हरेश कुमार सिंह, संदीप कुमार, सहायक उपनिरीक्षक एस.के. सिंह सहित कई अधिकारियों और जवानों का योगदान सराहनीय

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रांची में ‘क्लाइमेट रेजिलिएंट WASH इन स्कूल्स’ क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित, मंत्री योगेंद्र प्रसाद हुए शामिल

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न्यूज – कहकशां फारूकी 

राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता तथा उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने बुधवार को रांची स्थित Hotel Chanakya BNR में आयोजित “Climate Resilient WASH in Schools” विषय पर क्षेत्रीय कार्यशाला एवं स्वच्छ एवं हरित मुख्यमंत्री स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार (2025-26) कार्यक्रम में भाग लिया। यह कार्यक्रम स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग तथा UNICEF, झारखंड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम की शुरुआत मंत्री योगेंद्र प्रसाद के आगमन पर पुष्पगुच्छ एवं पौधा भेंट कर भव्य स्वागत के साथ हुई। इसके पश्चात उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया।
अपने संबोधन में मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि विद्यालयों में स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल और बेहतर शौचालय व्यवस्था बच्चों के स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की बुनियाद है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए स्कूलों में WASH (Water, Sanitation and Hygiene) व्यवस्था को मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है, ताकि बच्चों को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल वातावरण मिल सके।
उन्होंने आगे कहा कि स्वच्छ एवं हरित विद्यालय की अवधारणा केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। मंत्री ने इस दिशा में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और यूनिसेफ झारखंड द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए सभी विद्यालयों से स्वच्छता और हरित वातावरण को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने मुख्यमंत्री स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार 2025-26 के विजेता विद्यालयों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इसके साथ ही उन्होंने स्वच्छता और विद्यालयी वातावरण से संबंधित एक पुस्तक का भी विमोचन किया।
इस अवसर पर राज्य के विभिन्न जिलों से आए शिक्षा पदाधिकारी, शिक्षक, विशेषज्ञ तथा संबंधित विभागों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

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गुमला पुलिस कप्तान हरिश बिन जामां ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि एक विक्षिप्त महिला को बच्चा चोर समझ कर लाठी डंडे से मार कर उसकी हत्या कर दी गई

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न्यूज – गणपत लाल चौरसिया

गुमला पुलिस द्वारा अभियुक्तों को गिरफ्तार कर गुमला जेल भेजा गया

गुमला : – गुमला पुलिस कप्तान हरिश बिन जामां ने अपने सभाकक्ष चांदली गुमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन कर बताया की दिनांक-08.03.2026 को रात्रि करीब 11:30 बजे एक गुप्त सूचना प्राप्त हुआ कि बिशुनपुर थाना अन्तर्गत ग्राम लापु गुड़िया टॉड स्थित तेतरा उराँव के घर के पास एक अज्ञात विक्षिप्त महिला को बच्चा चोर समझकर उनके साथ मारपीट कर बंधक बनाया गया है। सूचना का सत्यापन एवं अग्रतर कार्रवाई हेतु थाना प्रभारी, विशुनपुर को आदेश दिया गया, तत्पश्चात् घायल महिला को प्राथमिक उपचार हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, बिशुनपुर लाया गया, जहाँ चिकित्सक द्वारा उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस संबंध में विशुनपुर थाना काण्ड सं0-06/26 दिनांक-09.03.2026, धारा-103(2)/3(5) BNS-2023 दर्ज किया गया तथा मेरे ( गुमला पुलिस कप्तान हरिश बिन जामां ) निर्देशानुसार पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी गुमला सुरेश प्रसाद यादव के नेतृत्व में एक छापामारी दल का गठन किया गया, उक्त छापामारी दल द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए ग्राम-लापु गुड़िया टाँड स्थित थाना बिशुनपुर में विक्षिप्त महिला के साथ मारपीट कर गंभीर रुप से जख्मी करने एवं ईलाज के क्रम में मृत्यु होने के आरोपी 1. तेतरा उराँव, पिता स्व० सोमरा उराँव, 2. बिरसाई उराँव, पिता स्व०-जितना उराँव, 3. शिबलाल उराँव, पिता स्व० टेले उराँव, 4. एतवा उराँव, पिता स्व० बिफैया उराँव, सभी ग्राम-लापु गुड़िया टांड, थाना-विशुनपुर, जिला-गुमला को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में उपस्थापन के पश्चात मंडलकारा, गुमला भेजा गया है। घटना में प्रयुक्त बरामद समानों को विधिवत जप्त किया गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए छापामारी दल द्वारा ग्राम-लापु गुड़िया टॉड एवं उसके आस-पास के गाँवों में लगातार छापामारी जारी रखा गया, छापामारी के क्रम में पुनः 1. लेटे उराँव, उम्र 20 वर्ष, 2. विशवा उराँव, उम्र 30 वर्ष दोनों पिता-शिवराज भगत, सा०-लबगा, थाना-विशुनपुर, जिला-गुमला. 3. सुदीप उराँव, उम्र 18 वर्ष, पिता जयसवाल उराँव, 4. चन्देश्वर उराँव, उम्र 19 वर्ष, पिता-जितना उराँव दोनों सा०-लापु गुड़िया टाँड, थाना-विशुनपुर, जिला-गुमला को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा रहा है।

बरामद सामग्री का सूचिः-

1. घटनास्थल से खून लगा मिट्टी।

2. घटनास्थल के बगल का बिना खून लगा मिट्टी (कंट्रोल मिट्टी)।

3. खून लगा डंडा ।

4. एक रस्सी।

दिनांक 09.03.2026 गिरफतार अभियुक्तों की सूचि :-

1. तेतरा उराँव, उम्र करीब 45 वर्ष, पिता स्व० सोमरा उराँव

2. बिरसाई उराँव, उम्र करीब 45 वर्ष, पिता स्व० जितना उराँव

3. शिबलाल उराँव, उम्र करीब 50 वर्ष, पिता-स्व० टेले उराँव

4. एतवा उराँव उम्र करीब 64 वर्ष, पिता स्व० बिफैया उराँव चारों सा०-लापु गुड़िया टांड, थाना-बिशुनपुर, जिला-गुमला।

POLICE HELPLINE (EMERGENCY DIAL-112 CHILD HELPLINE-1098

WOMEN HELPLINE-1091

DOMESTIC ABUSE HELPLINE-181 CYBER CRIME HELPLINE-1930

AMBULANCE SERVICE-108

दिनांक 10.03.2026 गिरफ्तार अभियुक्तों की सूचि :-

1. लेटे उरॉव, उम्र 20 वर्ष, पिता शिवराज भगत, सा०- लबगा थाना बिशुनपुर, जिला-गुमला

2. बिशवा उराँव, उम्र 30 वर्ष, पिता-शिवराज भगत, सा०- लबगा थाना-बिशुनपुर, जिला गुमला।

3. सुदीप उराँव, उम्र 18 वर्ष, पिता जयसवाल उराँव, सा०-लापु गुडिया टाँड, थाना-विशुनपुर, जिला-गुमला ।

4. चन्देश्वर उराँव, उम्र 19 वर्ष, पिता-जितना उराँव, सा०- लापु गुड़िया टॉड, थाना-बिशुनपुर, जिला-गुमला।

छापामारी दल में शामिल पदाधिकारीः-

1, सुरेश प्रसाद यादव, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, गुमला।

2. पु०अ०नि० सह थाना प्रभारी, विशुनपुर अर्जुन कुमार यादव।

3. पु०अ०नि० मुकेश प्रसाद टुङ्ग, बिशुनपुर थाना।

4. पु०अ०नि० प्रमोद कुमार, बिशुनपुर थाना।

5. बिशुनपुर थाना स्शस्त्र बल

गुमला पुलिस।

राम भक्तों के लिए

विशेष रक्तदान शिविर आयोजित, उपायुक्त ने स्वयं रक्तदान कर दिया मानवीय सेवा का संदेश

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न्यूज – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के निर्देश के आलोक में चंदौली स्थित समाहरणालय परिसर, गुमला में विशेष रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों, विशेषकर सिकल सेल एवं थैलेसीमिया से जूझ रहे बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं के लिए रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना था।
इस अवसर पर उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने स्वयं रक्तदान कर समाज के प्रति संवेदनशीलता और मानवीय सेवा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि रक्तदान केवल एक चिकित्सा आवश्यकता ही नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वोत्तम उदाहरण है।
शिविर में जिले के वरीय पदाधिकारियों, कर्मियों तथा पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए स्वैच्छिक रक्तदान किया। इस दौरान कुल 21 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया।

उपायुक्त ने जिले के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि जिले में सिकल सेल एवं थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों तथा अन्य जरूरतमंद मरीजों को समय-समय पर रक्त की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदान के माध्यम से हम सभी किसी के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि रक्तदान महादान यज्ञ है।
उन्होंने कहा कि “आपका एक यूनिट रक्त किसी की पूरी जिंदगी बचा सकता है।” इसलिए सभी नागरिकों से समय-समय पर आगे आकर रक्तदान करने तथा इस पुनीत कार्य में सहभागी बनने की अपील की गई।

जिला प्रशासन द्वारा लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक करने तथा अधिक से अधिक नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि जरूरतमंदों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सके और समाज में सेवा एवं सहयोग की भावना को और सशक्त बनाया जा सके।

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