न्यूज – गणपत लाल चौरसिया
गुमला : – गुमला नगर भवन गुमला में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में 90 से अधिक सेविकाओं ने लिया भाग, उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित रहीं मुख्य अतिथि, उत्कृष्ट कार्य करने वाली तीन सेविकाएं सम्मानित, सेविकाओं के बीच TLM शिक्षण सामग्री का वितरण किया गया,
*गुमला उपयुक्त प्रेरणा दीक्षित ने सभागार में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा की “दुनिया भर के सारे बच्चे हमारे ही हैं, हर बच्चे को अपना समझकर उसकी देखभाल करना ही हमारी सच्ची जिम्मेदारी है।*
गुमला जिले के समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों में सकारात्मक बदलाव सुनिश्चित करने तथा बच्चों को सुरक्षित बचपन और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा सभी प्रखंडों में प्रारंभिक बाल देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। जिसके तहत 5,00 सेविकाओं को प्रारंभिक बाल देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कुल 12 बैचों में आयोजित किया जा रहा है। प्रत्येक बैच में सेविकाओं को तीन दिवसीय प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम 5 फरवरी से प्रारंभ होकर 18 मार्च तक जिले के विभिन्न प्रखंडों में चरणबद्ध रूप से संचालित किया जा रहा है।
इसी क्रम में आज गुमला सदर प्रखंड की आंगनबाड़ी सेविकाओं के लिए नगर भवन, गुमला में मुख्य प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित शामिल हुईं।
कार्यक्रम में सदर प्रखंड की लगभग 90 से अधिक आंगनबाड़ी सेविकाओं ने भाग लिया। इसके साथ ही विभिन्न प्रखंडों के प्रखंड विकास पदाधिकारी, जिले की महिला पर्यवेक्षिकाएं एवं सीडीपीओ भी कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। जिला स्तरीय इस कार्यक्रम का आयोजन जिला समाज कल्याण विभाग द्वारा किया गया, जिसका संचालन जिला समाज कल्याण पदाधिकारी आरती कुमारी द्वारा किया गया।
जिला स्तरीय चयन समिति के अनुमोदन के आलोक में Vikramshila Education Resource Society के माध्यम से यह प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में संस्था के मुख्य प्रशिक्षक ऋति मुखर्जी, सहायक प्रशिक्षक बर्णा चक्रवर्ती, पिंटू दास, सुमन गोस्वामी एवं प्रशांत महतो भी उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण के दौरान सेविकाओं को “नन्हें कदम” पुस्तक सहित आवश्यक शिक्षण सामग्री (TLM) भी उपलब्ध कराई गई।
*कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने कहा* कि छोटे बच्चे मिट्टी की तरह होते हैं, उन्हें बचपन में जो सिखाया जाता है वही उनके व्यक्तित्व का आधार बनता है। इसलिए आंगनबाड़ी सेविकाओं की भूमिका बच्चों के शारीरिक, बौद्धिक और भावनात्मक विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सेविकाओं को बच्चों को स्वच्छता की आदतें सिखाने, प्रार्थना एवं सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने तथा डेढ़ वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को शारीरिक गतिविधियों में शामिल कराने पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
उपायुक्त ने सेविकाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि _“दुनिया भर के सारे बच्चे हमारे ही हैं। हर बच्चे को अपना समझकर उसकी देखभाल करना ही सच्ची जिम्मेदारी है।_” उन्होंने कहा कि जब तक हर सेविका केंद्र में आने वाले बच्चों को अपने बच्चे की तरह नहीं समझेगी, तब तक वास्तविक बदलाव संभव नहीं होगा।
इस अवसर पर उपायुक्त ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली तीन आंगनबाड़ी सेविकाओं – आराधना कुजूर (विशुनपुर, कोयनाटोली), अनिमा मिंज (डुमरी, रुद्रपुर) एवं रोस एक्का (रायडीह, भलंडा) को सम्मानित किया। साथ ही सेविकाओं के बीच आवश्यक शिक्षण सामग्री (TLM) का वितरण भी किया गया।
उपायुक्त ने यह भी घोषणा की कि उत्कृष्ट कार्य करने वाली सेविकाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक माह 2 से 3 सेविकाओं को प्रोत्साहन राशि एवं प्रशस्ति पत्र देकर देकर सम्मानित किया जाएगा, ताकि सेविकाओं का मनोबल बढ़े और वे और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित हों।
उपायुक्त ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि बच्चों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा से संबंधित योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यह एक संवेदनशील पहल है और सभी के सामूहिक प्रयास से ही आंगनबाड़ी केंद्रों में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
ज्ञात हो कि उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के नेतृत्व में जिले में बच्चों के पोषण और समग्र विकास के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं। “आदि फूल सुपोषित अभियान” के तहत SAM एवं MAM श्रेणी के बच्चों की नियमित निगरानी करते हुए संबंधित अधिकारियों द्वारा होम विजिट के माध्यम से उनके स्वास्थ्य में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं “हैबिट चेंज अभियान” के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वच्छता, साफ-सफाई तथा बच्चों में अच्छे व्यवहारिक आदतों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा उपायुक्त के निर्देश पर आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों का जन्मदिन मनाने की पहल भी की गई है, जिससे बच्चों में आत्मीयता और उत्साह का वातावरण बन रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान सेविकाओं में विशेष उत्साह देखा गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि कई आंगनबाड़ी सेविकाएं सुदूरवर्ती क्षेत्रों से 5 से 6 किलोमीटर की दूरी तय कर पैदल प्रशिक्षण में भाग लेने पहुंच रही हैं, जो उनके समर्पण और सीखने की उत्सुकता को दर्शाता है।
जिला प्रशासन द्वारा आंगनबाड़ी सेविकाओं की क्षमता संवर्धन के लिए चलाया जा रहा यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जिले के नन्हे बच्चों को बेहतर देखभाल, पोषण और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।
