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Tuesday, June 30, 2026
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कोड़वाटांड़ पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र भवन का शिलान्यास, हर पंचायत तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य : सुनिता देवी

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News – Kahkashan Farooqi 

गोमिया– गोमिया प्रखंड के कोड़वाटांड़ पंचायत में जिला परिषद द्वारा 15वें वित्त आयोग (स्वास्थ्य मद) के तहत निर्मित होने वाले उप स्वास्थ्य केंद्र भवन का शिलान्यास जिला परिषद अध्यक्ष श्रीमती सुनिता देवी ने नारियल फोड़कर किया। इस अवसर पर पंचायत के मुखिया बबलू हेम्ब्रम एवं रामजी तिवारी भी उपस्थित रहे।
शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला परिषद अध्यक्ष सुनिता देवी ने कहा कि कोड़वाटांड़ पंचायत सहित पूरे बोकारो जिले में जिला परिषद की ओर से 28 उप स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व भी जिला परिषद के माध्यम से 14 उप स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण कराया जा चुका है, जहां ग्रामीणों की सुविधा के लिए डॉक्टर, एएनएम एवं जीएनएम नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार की प्राथमिकता गांव-गांव तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है। इसी उद्देश्य के तहत वर्ष 2027 तक बोकारो जिले की प्रत्येक पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर-दराज नहीं जाना पड़ेगा तथा स्वास्थ्य सुविधाएं उनके घर के नजदीक उपलब्ध हो सकेंगी।
कार्यक्रम में समाजसेवी एवं युवा नेता चितरंजन साव, हरीश तिवारी, पंचायत समिति सदस्य रूबेदा परवीन, वार्ड सदस्य मनोज करमाली सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। सभी ने इस पहल को ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

राम भक्तों के लिए

गोमिया एवं जारंगडीह गुरुद्वारों में श्रद्धा और सेवा भाव के साथ मनाया गया गुरु अर्जुन देव जी का 420वां शहीदी दिवस

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News – Kahkashan Farooqi 

गोमिया–सिख धर्म के पांचवें गुरु श्री गुरु अर्जुन देव जी महाराज का 420वां शहीदी दिवस गोमिया और जारंगडीह स्थित गुरुद्वारा साहिबों में श्रद्धा, भक्ति एवं सेवा भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संगत ने गुरुद्वारों में पहुंचकर मत्था टेका तथा गुरु महाराज के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के तहत संगत द्वारा सामूहिक रूप से सुखमणि साहिब का पाठ किया गया तथा श्रद्धापूर्वक शबद-कीर्तन प्रस्तुत किया गया। गुरुद्वारों के ग्रंथी एवं बाबा जी ने गुरु अर्जुन देव जी महाराज के जीवन, त्याग, तपस्या और मानवता के लिए दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान पर प्रकाश डालते हुए संगत को उनके आदर्शों को अपनाने का संदेश दिया। इसके उपरांत अरदास कर संगत के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।
गोमिया गुरुद्वारा साहिब श्री गुरु सिंह सभा में महिलाओं द्वारा शबद-कीर्तन प्रस्तुत किया गया। वहीं स्त्री सत्संग समिति की ओर से शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में पिछले 11 दिनों से प्रतिदिन सुखमणि साहिब का पाठ एवं कीर्तन आयोजित किया जा रहा था। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद, चना तथा शीतल जल का वितरण किया गया।
वहीं जारंगडीह गुरुद्वारा साहिब में भी संगत द्वारा विशेष धार्मिक आयोजन किए गए। अरदास के बाद श्रद्धालुओं के बीच चना प्रसाद एवं ठंडे जल का वितरण किया गया।
शहीदी दिवस के अवसर पर दोनों स्थानों पर सेवा की परंपरा को निभाते हुए विशेष छबील लगाई गई। गोमिया गुरुद्वारा के मुख्य द्वार तथा जारंगडीह मुख्य मार्ग स्थित सरदूल सिंह मार्केट एवं गुरुद्वारा मार्केट के समीप राहगीरों को रोक-रोककर चना प्रसाद, मीठा ठंडा जल एवं शरबत वितरित किया गया। भीषण गर्मी के बीच सेवा के इस कार्य की लोगों ने सराहना की।
इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारों में पहुंचकर गुरु घर का आशीर्वाद प्राप्त किया। गोमिया गुरुद्वारा में लंगर का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने लंगर प्रसाद ग्रहण किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में गोमिया गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान इंद्रजीत सिंह, सचिव राजेंद्र सिंह सलूजा सहित कमेटी के सदस्यों एवं जारंगडीह गुरुद्वारा के सचिव सरदूल सिंह, सुरजीत सिंह, राजू सिंह, योगेंद्र सिंह, अमनदीप सिंह, प्रिंस, रॉकी सहित दर्जनों सिख परिवारों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
गुरु अर्जुन देव जी महाराज के शहीदी दिवस पर आयोजित इन कार्यक्रमों ने समाज में सेवा, समर्पण, भाईचारे और मानवता का संदेश प्रसारित किया।

राम भक्तों के लिए

मेहनत की कमाई बचाइए, बाइक को सुरक्षित रखिए: गोमिया पुलिस की अनोखी पहल

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गोमिया। एक बाइक खरीदने के लिए आम आदमी को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। कई लोग अपनी जरूरतों में कटौती कर पैसे जुटाते हैं, तो कई लोग लोन लेकर वाहन खरीदते हैं और लंबे समय तक उसकी किस्तें चुकाते हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही उनकी मेहनत की कमाई पर भारी पड़ सकती है।

इसी को लेकर गोमिया थाना पुलिस ने वाहन मालिकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। थाना प्रभारी प्रफुल्ल कुमार महतो ने कहा कि अक्सर लोग बाजार, पार्टी, शादी समारोह या अन्य कार्यक्रमों में बाइक को केवल हैंडल लॉक लगाकर छोड़ देते हैं। वहीं कई लोग रात में घर के बाहर ही बाइक खड़ी कर सो जाते हैं। अपराधी ऐसे ही अवसरों की तलाश में रहते हैं और मौका मिलते ही बाइक चोरी कर लेते हैं।
पुलिस के अनुसार चोरी की गई बाइकों का हुलिया बदलकर उन्हें दूसरे क्षेत्रों में भेज दिया जाता है, जहां उनका उपयोग अवैध गतिविधियों, विशेषकर कोयला ढुलाई जैसे कार्यों में किया जाता है। इससे वाहन मालिक को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ता है।

थाना प्रभारी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अपनी मेहनत की कमाई से खरीदी गई बाइक की सुरक्षा स्वयं सुनिश्चित करें। वाहन को सुरक्षित स्थान पर पार्क करें और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों का उपयोग करें।

गोमिया पुलिस ने एक सराहनीय पहल करते हुए कहा है कि जिन लोगों के पास घर में बाइक रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, वे अपनी बाइक थाना परिसर में पार्क कर सकते हैं। पुलिस के अनुसार थाना परिसर में वाहन सुरक्षित रहेगा और चोरी की आशंका भी काफी हद तक कम हो जाएगी।

इस जागरूकता अभियान में थाना प्रभारी प्रफुल्ल कुमार महतो के साथ एएसआई अखिलेश कुमार एवं एएसआई बिनोद कुमार मुंडा भी लोगों से वाहन सुरक्षा को लेकर सजग रहने की अपील कर रहे हैं।

राम भक्तों के लिए

8वें केंद्रीय वेतन आयोग के संयुक्त सचिव सह केंद्रीय प्रभारी अधिकारी ने गुमला में की आकांक्षी जिला व ब्लॉक कार्यक्रम की समीक्षा, औरापाठ मॉडल ग्राम का किया दौरा

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गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला दौरे के क्रम में स्वास्थ्य एवं पोषण में सुधार पर विशेष जोर,गर्भवती महिलाओं के शत-प्रतिशत एएनसी पंजीकरण और ‘लो बर्थ वेट’ (कम वजन के नवजात) की समस्या के मूल कारणों पर काम करने के सख्त निर्देश देते हुए, एजुकेशन डेटा का बारीकी से विश्लेषण करने के निर्देश; सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के आंकड़े दुरुस्त कर शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने पर बल दिया गया और नीति आयोग की आजीविका परियोजनाओं (प्रोजेक्ट पहल, मशरूम और बाँस शिल्प) के माध्यम से सुदूरवर्ती क्षेत्रों के जनजातीय परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की सराहना, और समीक्षा के बाद केंद्रीय प्रभारी अधिकारी ने आकांक्षी प्रखंड डुमरी के मॉडल ग्राम ‘औरापाठ’ का जमीनी दौरा कर लाभार्थियों से सीधा संवाद किया।
भारत सरकार के 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के संयुक्त सचिव सह गुमला जिले के केंद्रीय प्रभारी अधिकारी अमित सतीजा (आईएएस) की अध्यक्षता में गुरुवार को नया समाहरणालय भवन, चन्दाली के सभाकक्ष में आकांक्षी जिला ( एडीपी ) एवं आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम ( एबीपी ) की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में जिले के विकास संकेतकों की बारीकी से समीक्षा करते हुए स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि क्षेत्र में बुनियादी सुधार लाने के कड़े निर्देश दिए गए। बैठक में मुख्य रूप से उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो, उप विकास आयुक्त अनिमेश रंजन और जिला योजना पदाधिकारी रमण कुमार , पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि सहित सभी जिला स्तरीय पदाधिकारी मौजूद थे।
समीक्षा के दौरान केंद्रीय प्रभारी अधिकारी सतीजा ने स्वास्थ्य संकेतकों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने जिले में प्रसव पूर्व देखभाल (एएनसी) पंजीकरण के पिछले वर्ष के 88 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत होने पर संतोष जताया, लेकिन इसे शत-प्रतिशत करने का निर्देश दिया। उन्होंने पिछले कुछ समय में कम वजन के बच्चों (लो बर्थ वेट) के जन्म लेने के मामलों पर चिंता व्यक्त की और जिला समाज कल्याण विभाग को इसके मूल कारणों की पहचान कर ‘रेडी टू ईट’ पूरक पोषण वितरण प्रणाली को दुरुस्त करने को कहा। इसके साथ ही टीबी मरीजों की स्क्रीनिंग, प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने और डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए ठोस प्रयास करने के निर्देश दिए गए।
शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए संयुक्त सचिव ने स्पष्ट कहा कि केवल नामांकन के आंकड़ों से संतुष्ट न होकर अधिकारी इस बात का पूरा विवरण रखें कि कितने बच्चे सरकारी और कितने निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से छूटना नहीं चाहिए। इसके अलावा सभी सरकारी विद्यालयों में पेयजल, क्रियाशील शौचालय और बिजली की शत-प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित करने की हिदायत दी गई। वहीं, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की जमीनी हकीकत जानने के लिए उन्होंने उप विकास आयुक्त को फील्ड में रैंडम निरीक्षण (आकस्मिक चेकिंग) करने की जिम्मेदारी सौंपी। बैठक में मृदा स्वास्थ्य कार्ड, पशु टीकाकरण, वित्तीय समावेशन और कौशल विकास की प्रगति की भी बिंदुवार समीक्षा की गई।
प्रशासनिक चुनौतियों पर चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि गुमला को वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित जिलों की सूची से बाहर किए जाने के बाद विशेष केंद्रीय सहायता के तहत स्वीकृत 40 करोड़ रुपये के सापेक्ष मात्र 15 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं, जिससे वेंडरों का लगभग 23 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। इस पर केंद्रीय स्तर से आवश्यक समन्वय करने का आश्वासन दिया गया। साथ ही, एबीपी पोर्टल पर डुमरी ब्लॉक में संचालित 94 आंगनवाड़ी केंद्रों का डेटा तकनीकी विसंगति के कारण ‘शून्य’ दिखने की समस्या को भी जल्द ठीक करने के निर्देश दिए गए ताकि ब्लॉक की रैंकिंग प्रभावित न हो।
बैठक के समापन के उपरांत केंद्रीय प्रभारी अधिकारी अमित सतीजा ने प्रशासनिक टीम के साथ आकांक्षी प्रखंड डुमरी के सुदूरवर्ती औरापाठ मॉडल गाँव का विस्तृत क्षेत्र भ्रमण किया। यहाँ उन्होंने नीति आयोग के सहयोग से चल रहे प्रोजेक्ट ‘पहल’ के तहत आदिम जनजाति (पीवीटीजी) परिवारों के लिए किए जा रहे बकरी व मुर्गी पालन और जल संरक्षण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने मशरूम उत्पादन से जुड़े लाभार्थियों से सीधा संवाद कर उनके आय स्तर और क्यूआर कोड के माध्यम से मिल रहे डिजिटल भुगतान की सराहना की। इसके बाद उन्होंने औरापाठ आंगनवाड़ी केंद्र का निरीक्षण कर बच्चों के पोषण स्तर और ‘प्रोजेक्ट हैबिट चेंज’ (व्यवहार परिवर्तन) गतिविधियों को देखा तथा प्राथमिक विद्यालय औरापाठ पहुंचकर बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता को परखा।
बैठक के दौरान मिले निर्देशों के आलोक में उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो ने पूरी प्रशासनिक टीम को सभी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। वहीं, उप विकास आयुक्त अनिमेश रंजन ने केंद्रीय प्रभारी अधिकारी को आश्वस्त किया कि जिले के सभी प्रमुख विकास संकेतकों पर पूरी तरह केंद्रित होकर तकनीकी तरीके से कार्य किया जाएगा, ताकि गुमला और इसके आकांक्षी प्रखंडों को राज्य व देश के अग्रणी क्षेत्रों की श्रेणी में लाया जा सके।

राम भक्तों के लिए

गुमला जिला के 6 वर्षीय मासूम गुमशुदगी मामला हाई कोर्ट में उपस्थित हुए मुख्य सचिव डीजीपी समेत अन्य संबंधित पदाधिकारी

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गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला गुमला जिला से जुड़ा झारखंड के चर्चित मामला गुमला जिला से वर्ष 2018 से 2023 में लापता हुई 6 वर्षीय बच्ची के मामले में मां चन्द्रमुनि उराइन के द्वारा हेवियस कॉरपस याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए अदालत में मुख्य सचिव, गृह सचिव एवं डीजीपी को तलब किया. जहां अदालत में मुख्य सचिव, गृह सचिव एवं DGP के अलावा पुलिस हेडक्वार्टर के कई अधिकारी सशरीर हाजिर हुए. मामले में हाईकोर्ट के न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायाधीश संजय प्रसाद की खंडपीठ ने मौके पर मौजूद

अधिकारियों से पूछा कि अदालत ने अपने पूर्व आदेश में 2018 से 2023 तक गुमला में पदस्थापित SP के अनुसंधान पर संदेह जताते हुए जांच के आदेश को आखिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती क्यों दी गई? इस पर मुख्य सचिव ने अदालत के समक्ष खेद जताते हुए बताया कि SLP को वापस ले लिया गया. जहां अदालत ने अधिकारियों को ऐसे मामले संवेदनशीलता बरतने का आदेश दिया. लगभग 10 मिनट बाद अदालत में सभी दुबारा हाजिर हुए

उन्होंने कहा कि अदालत बस यह चाहती है कि जब कोई न्याय की गुहार लगाए तो उसे न्याय मिले लेकिन न्यायिक प्रक्रिया का पालन करवाना पुलिस एवं अधिकारियों का काम है. इस दौरान सर्वोच्च न्यायालय में दायर SLP पर जवाब देने के लिए सभी अधिकारियों ने अदालत से 10 मिनट का समय भी लिया, लगभग 10 मिनट बाद अदालत में सभी दुबारा हाजिर हुए.
मुख्य सचिव अदालत में कहा कि ऐसे जांच से अधिकारी हतोत्साहित होते है. इस पर अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारियों का काम है की संवेदनशीलता से कम करें काम करने की बजाय अगर इस प्रकार का व्यवहार होगा तो अदालत इस पर चुप नहीं बैठेगी. अदालत ने अपने पूर्व आदेश को जारी रखते हुए 2018 से 2023 तक गुमला में पदस्थापित सभी SP के कार्यशैली को लेकर जांच के आदेश दिए.

हाईकोर्ट द्वारा गुमला पुलिस को बेहतर अनुसंधान हेतु दिशा निर्देश दिया 

आज दिनांक को 20.04.2026 को गुमला पुलिस को माननीय उच्च न्यायालय, झारखण्ड, राँची में अहतु थाना (गुमला) कांड सं0-03/20, दिनांक-06.02.2020, धारा-363/365/367/368/370/371 भा०द०वि०, 16/15 बंधुआ मजदूर अधि० एवं 75/79 जे0जे0 एक्ट की पीड़िता संजीता कुमारी के लापता होने के मामले की सुनवाई के दौरान कांड में बेहतर अनुसंधान हेतु दिशा निर्देश दिया गया। माननीय उच्च न्यायालय, झारखण्ड, राँची द्वारा दिये गये निर्देश के आलोक में पुलिस अधीक्षक, गुमला के अनुरोध पर अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग, झारखण्ड, राँची द्वारा पीड़िता की बरामदगी हेतु पीड़िता का फोटो एवं सभी विस्तृत विवरणी के साथ Hue and Cry Notice सभी राज्यों के महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षकों को भेजी गई है।

पीड़िता का हुलिया (लापता के समय):- नाम-संजीता कुमारी, उम्र 13 वर्ष (वर्तमान 21 वर्ष),

पिता-स्व० चन्दरू उराँव, सा०-खोरा, जामटोली, थाना+जिला-गुमला, चेहरा-गोल, बाल-काला, लम्बाई-4 फीट।

राम भक्तों के लिए

नगर परिषद क्षेत्र में स्वच्छता, यातायात व्यवस्था एवं नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर जोर, उपायुक्त ने दिए आवश्यक निर्देश

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गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो की अध्यक्षता में नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यों एवं नागरिक सुविधाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में शहर की स्वच्छता व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, जलापूर्ति, बाजार व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, सौंदर्यीकरण तथा अन्य नगर विकास संबंधी कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में उपायुक्त ने नगर परिषद क्षेत्र में संचालित मीट दुकानों को निर्धारित नियमों एवं मानकों का पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि खुले में मांस की बिक्री एवं कटाई पर रोक सुनिश्चित की जाए तथा संबंधित दुकानदारों को निर्धारित प्रावधानों का अनुपालन कराने हेतु आवश्यक कार्रवाई की जाए।
टंगरा मार्केट की व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने निर्देश दिया कि नगर परिषद द्वारा निर्मित शेड के बाहर अनधिकृत रूप से बैठकर व्यवसाय करने वालों के विरुद्ध नियमित अभियान चलाया जाए तथा बाजार क्षेत्र में सुव्यवस्थित व्यापारिक गतिविधियां सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने शहर में बढ़ती यातायात समस्या एवं जाम की स्थिति पर विशेष ध्यान देते हुए नियमित निगरानी एवं प्रभावी प्रबंधन के निर्देश दिए।
बैठकर में शहर की साफ-सफाई व्यवस्था को और सुदृढ़ करने पर बल देते हुए उपायुक्त ने निर्देश दिया कि प्रतिदिन शाम के समय सफाई कार्य सुनिश्चित किया जाए ताकि प्रातः काल शहर स्वच्छ एवं व्यवस्थित दिखाई दे। साथ ही वर्षा ऋतु को देखते हुए सभी नालियों की प्राथमिकता के आधार पर सफाई कराने तथा जलजमाव की संभावनाओं को कम करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
उन्होंने फॉगिंग अभियान को नियमित रूप से संचालित करने, नालियों एवं सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने तथा नागरिकों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक कदम उठाने को कहा। साथ ही शहर के सौंदर्यीकरण, सार्वजनिक स्थलों के रखरखाव एवं ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए भी आवश्यक निर्देश दिए गए।
उपायुक्त ने शहर में स्थापित सीसीटीवी कैमरों की समीक्षा करते हुए सभी कैमरों को क्रियाशील रखने का निर्देश दिया। समीक्षा के दौरान बताया गया कि शहर में लगभग 91-92 सीसीटीवी कैमरे फंक्शनल है, लगभग 4-5 कैमरे तकनीकी कारणों से बंद हैं। इस पर उपायुक्त ने सभी खराब कैमरों की शीघ्र मरम्मत कर उन्हें पुनः चालू करने का निर्देश दिया।
बैठक में कचहरी परिसर स्थित दुकानों, पेयजल सुविधा एवं अन्य आधारभूत व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने कचहरी परिसर में संचालित दुकानों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करते हुए नियमानुसार हस्तांतरण की प्रक्रिया सुनिश्चित करने तथा न्यूनतम शुल्क पर दुकानों के आवंटन की संभावनाओं पर कार्य करने का निर्देश दिया। साथ ही कचहरी परिसर स्थित जलापूर्ति टावर में पेयजल कनेक्शन को प्राथमिकता के आधार पर चालू कराने तथा परिसर में शौचालय सुविधाओं के समुचित संचालन एवं रखरखाव को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
नगर भवन एवं बख्तर साय स्टेडियम में मरम्मत एवं विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने संबंधित कार्यों में तेजी लाने तथा जल्द ही कार्य पूर्ण करने का निर्देश दिया। बैठक में कचरा उठाव हेतु उपलब्ध वाहनों की संख्या कम होने से उत्पन्न चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। इस संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी (सदर) ने व्यवस्थित कार्ययोजना एवं प्रणालीबद्ध तरीके से कचरा प्रबंधन कार्यों के निष्पादन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उपायुक्त ने नगर परिषद पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि नागरिक सुविधाओं से जुड़े सभी कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए तथा स्वच्छ, सुंदर एवं व्यवस्थित शहर के निर्माण हेतु समन्वित प्रयास किए जाएं।
बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी (सदर), नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सहित नगर परिषद के संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए

अनुबंध और आउटसोर्सिग कर्मचारियों को पांच माह से वेतन नहीं, लगे हैं भूखे प्यासे कम पर

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गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला मुख्यालय स्थित सिविल सर्जन कार्यालय के समक्ष19.062026दिन शुक्रवार को झारखण्ड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ, झारखण्ड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, झारखण्ड राज्य अनुबंध कर्मचारी संघ, आउटसोर्सिंग कर्मचारी संघ के द्वारा धरना प्रदर्शन सिविल सर्जन,गुमला के सामने किया जाएगा, अनुबंध कर्मियो का 8सूत्री एवं चिकित्सा संघ का 16 सूत्री मांग पत्र जिसमें मुख्य रूप से 5 महीने से बकाया मानदेय,वेतन, पारिश्रमिक का एकमुश्त भुगतान करने, शोषण करने पर रोक, चैनपुर के बीपीओ द्वारा अनुपस्थिति के नाम पर रिश्वत लेने की बात प्रकाश में आया है, सिविल सर्जन से उसे तत्काल हटाने,जांच करने, पदस्थापित अवधि में कराए गए कार्यों का जांच, महिला कर्मियों को महीने में 2 दिन विशेष अवकाश, मैटरनिटी अवकाश, माह की 5 वीं तारीख तक वेतनादि का भुगतान, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को मासिक मानदेय में बढ़ोतरी के लिए आंदोलन किया जा रहा है।

सभी कर्मचारी 12.00 बजे दिन में कचहरी परिसर , टाउन हॉल,गुमला में जमा होंगे,जुलूस पटेल चौक होते हुए सिविल सर्जन कार्यालय पहुंचेगा आम सभा किया जाएगा, मुख्यमंत्री,स्वास्थ्य मंत्री, मुख्य सचिव, अपर मुख्यसचिव, स्वास्थ्य, डायरेक्टर झारखण्ड सरकार रांची के नाम से संलेख,मांग पत्र सिविल सर्जन, गुमला को दिया जाएगा।
भूषण कुमार,जिला सचिव, जीतवाहन उरांव, चिकित्सा संघ, प्रेम प्रसाद,मंजूषा लकड़ा,शैलेश बाखला ,

राम भक्तों के लिए

उपायुक्त के निर्देश पर सदर अनुमंडल पदाधिकारी ने भरनो में विभिन्न योजनाओं एवं संस्थानों का किया निरीक्षण

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गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला उपायुक्त के निर्देशानुसार सदर अनुमंडल पदाधिकारी अखिलेश कुमार द्वारा बुधवार को भरनो प्रखंड अंतर्गत उत्तरी भरनो पंचायत का क्षेत्र भ्रमण कर विभिन्न सरकारी संस्थानों एवं विकास योजनाओं का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र, विद्यालय, पंचायत भवन, स्वास्थ्य उपकेंद्र तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन आवासों की जांच की गई।

भ्रमण के क्रम में अनुमंडल पदाधिकारी ने आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की उपस्थिति, पोषण आहार वितरण, स्वच्छता व्यवस्था एवं संचालित गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने सेविका एवं सहायिका को निर्धारित मानकों के अनुरूप सेवाएं उपलब्ध कराने तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया।

विद्यालय निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों की उपस्थिति, पठन-पाठन की व्यवस्था, मध्याह्न भोजन योजना तथा आधारभूत सुविधाओं की समीक्षा की गई। उन्होंने शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने तथा नियमित रूप से शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन का निर्देश दिया।

पंचायत भवन में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं एवं अभिलेखों की समीक्षा करते हुए उन्होंने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं आम नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने पर बल दिया।

स्वास्थ्य उपकेंद्र निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं, दवा उपलब्धता, टीकाकरण एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों की स्थिति की जानकारी ली गई। उन्होंने संबंधित कर्मियों को स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं जनोन्मुखी बनाने के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन आवासों का निरीक्षण करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी ने लाभुकों से संवाद किया तथा निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों को आवास निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण कराने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए तथा जनहित से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी एवं पारदर्शी संचालन पर विशेष जोर दिया।

राम भक्तों के लिए

राहुल गांधी के आरोप को सावरकर के प्रपौत्र ने ही अदालत में सच साबित कर दिया, अब भाजपाई क्या करेंगे?

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जिस मुकदमे से राहुल गांधी को चुप कराना था- उसी ने सावरकर का सच बाहर निकाल दिया. यह बात किसी कांग्रेसी ने नहीं कही। यह बात किसी इतिहासकार ने नहीं कही। यह बात सावरकर के अपने प्रपौत्र ने पुणे की अदालत में कसम खाकर कही। सावरकर ने अंग्रेजों के सामने दस दया याचिकाएं दायर की थीं।

वही सावरकर जिन्हें भाजपा हर चुनाव में महान क्रांतिकारी बताती है। जिनकी तस्वीर संसद में लगाई गई। जिनके नाम पर राहुल गांधी को अदालत में घसीटा गया। वह अदालत जहाँ सच निकला. पुणे कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ सावरकर पर उनके बयानों को लेकर आपराधिक मानहानि का मामला चल रहा है.

जिरह के दौरान सत्यकी सावरकर ने खुद अदालत में कहा- “दया याचिकाओं का रिकॉर्ड सरकार के पास मौजूद है।”यानी याचिकाएं हुई थीं. यह खुद परिवार मान रहा है। यह कोई विपक्ष का आरोप नहीं। सरकारी अदालत में यह सावरकर के अपने खून का बयान है.

भगत सिंह ने क्या किया था?

उसी दौर में जब सावरकर अंग्रेजों से रिहाई की गुहार लगा रहे थे-भगत सिंह फांसी के फंदे की तरफ बढ़ रहे थे। मदन मोहन मालवीय ने वायसराय से अपील की। गांधी जी ने गुहार लगाई। देश भर से आवाज़ें उठीं। लेकिन भगत सिंह ने खुद माफीनामा लिखने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था- मेरी शहादत से जनता में जो आग जलेगी, वह मेरे जीवित रहने से नहीं जलेगी।

गांधी जी ने खुद 29 मार्च 1931 को लिखा- “भगत सिंह को जीवित रहने की इच्छा नहीं थी। उन्होंने माफी मांगने से इनकार किया।” राजगुरु ने इनकार किया। सुखदेव ने इनकार किया। तीनों हँसते हुए फाँसी पर चढ़ गए। और सावरकर ने दस बार अंग्रेजों से दया माँगी। यह तुलना किसी ने नहीं की. यह इतिहास खुद कर रहा है तो मानहानि किसकी हुई? राहुल गांधी ने सावरकर पर जो कहा, वह इतिहास की किताबों में दर्ज है।

वह सावरकर के अपने परिवार ने अदालत में माना। तो सवाल यह है, झूठ कहाँ है? जिस बयान को मानहानि बताकर मुकदमा किया गया, वही बयान अदालत में सच साबित हो रहा है। जो मुकदमा राहुल को चुप कराने के लिए दायर किया गया  वह अब सावरकर के अपने परिवार की जुबान से सच उगलवा रहा है।

भाजपा का असली संकट

भाजपा के लिए सावरकर सिर्फ एक नाम नहीं, एक राजनीतिक हथियार है। उनकी तस्वीर संसद में लगी है। उनके नाम पर योजनाएं हैं। उनके नाम पर वोट माँगे जाते हैं। लेकिन उनके अपने प्रपौत्र ने अदालत में कह दिया-“दया याचिकाओं का रिकॉर्ड सरकार के पास है।”

जिस हथियार से राहुल को घायल करने निकले थे, वह हथियार अब खुद उनकी तरफ मुड़ गया है। दो तस्वीरें, फैसला आप करें. एक तरफ भगत सिंह, जिन्होंने फाँसी के सामने भी माफी माँगने से इनकार किया। जिनकी शहादत ने पूरे देश में आज़ादी की आग और तेज़ की। दूसरी तरफ सावरकर, जिन्होंने दस बार अंग्रेजों से दया माँगी। जिनके नाम पर आज संसद में तस्वीर लगी है और इतिहास की किताबें बदली जा रही हैं।

भाजपा ने एक को भुला दिया। दूसरे को महान बना दिया। और अब उनके अपने परिवार ने अदालत में वह सच कह दिया, जो भाजपा दशकों से छुपाती आई थी। इतिहास को झुठलाया नहीं जा सकता. जो लोग राहुल गांधी को सावरकर पर बोलने से रोकना चाहते थे  उन्होंने खुद अदालत का दरवाज़ा खटखटाया। और अदालत ने वह सच बाहर निकाल दिया जो दशकों से दबाया जा रहा था। अब यह मानहानि का मुकदमा नहीं रहा। यह इतिहास का कटघरा बन गया है। और कटघरे में अब वह झूठी छवि खड़ी है, जो भाजपा ने करोड़ों लोगों के दिमाग में दशकों से बनाई थी।

 

राम भक्तों के लिए

अभिषेक मनु सिंघवी ने निष्क्रिय झारखंड कांग्रेस लीगल सेल की गतिविधियों की जानकारी मांगी, हरकत में आए अध्यक्ष, अधिकारियों की खोजबीन हुई शुरू

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रांची :  झारखंड कांग्रेस की कई आनुषंगिक संगठनों की स्थिति बेहतर नहीं, किंतु लीगल सेल तो पूरी तरह की निष्क्रिय बना हुआ है. वर्तमान में लीगल सेल के अध्यक्ष रांची के विधायक रहे जेेेपी गुप्ता हैं. लेकिन पिछले 28 साल से लीगल सेल निष्क्रिय बना हुआ है. इस बीच आईएनसी लीगल सेल के अध्यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी ने झारखंड कांग्रेस लीगल सेल की स्थिति के बारे में एक पत्र भेज कर अपडेट मांगा है. इसके बाद से झारखंड कांग्रेस का लीगल सेल हरकत में आया है. अब लीगल सेल के लोगों को ढूंढ़ा जा रहा है. इस मामले में रांची के अधिवक्ता और लीगल सेल में लंबे समय तक सक्रिय रहे फणीश्वर नाथ नीलेश ने फेसबुक पर लीगल सेल के हालात को दर्शाया है

नीलेश कहते हैं कि वाकई झारखंड में कांग्रेस लीगल सेल की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। राज्य गठन के बाद से लेकर आज तक यह संगठन कभी भी प्रभावी और सक्रिय स्वरूप में सामने नहीं आ सका। पिछले सात वर्षों से कांग्रेस राज्य की सत्ता में सहभागी रही है। इस दौरान संगठन सृजन, सदस्यता अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम और विभिन्न मोर्चों के विस्तार को लेकर कई दावे किए गए, लेकिन लीगल सेल लगातार हाशिए पर ही बना रहा।

28 वर्षों से नेतृत्व में बड़ा परिवर्तन नहीं हुआ

झारखंड कांग्रेस में लीगल सेल का अस्तित्व अधिकतर कागजी ही दिखाई देता है। संगठन के अध्यक्ष वर्षों से एक ही व्यक्ति बने हुए हैं। बताया जाता है कि लगभग 28 वर्षों से नेतृत्व में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं हुआ। इससे संगठन में नई पीढ़ी के अधिवक्ताओं को अवसर नहीं मिल पाया और न ही कोई गतिशील कार्य संस्कृति विकसित हो सकी। स्थिति यह है कि प्रदेश स्तर पर लीगल सेल की पूर्ण कार्यकारिणी तक सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। अधिकांश कार्यकर्ताओं और अधिवक्ताओं को यह तक जानकारी नहीं रहती कि संगठन में सक्रिय पदाधिकारी कौन-कौन हैं।

झारखंड में कांग्रेस विचारधारा से जुड़े बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद हैं। जिला अदालतों से लेकर उच्च न्यायालय तक ऐसे अनेक वकील हैं जो वैचारिक रूप से कांग्रेस के साथ खड़े दिखाई देते हैं। चुनावी मामलों, जनहित के मुद्दों और राजनीतिक विवादों में वे व्यक्तिगत स्तर पर पार्टी समर्थक भूमिका निभाते भी हैं। लेकिन इन अधिवक्ताओं के बीच संगठनात्मक समन्वय लगभग नगण्य है। कोई साझा मंच, नियमित संवाद व्यवस्था या विधिक नेटवर्क विकसित नहीं हो पाया है।

सबसे गंभीर तथ्य यह है कि झारखंड कांग्रेस लीगल सेल ने वर्षों में कोई बड़ा राज्यस्तरीय सम्मेलन, अधिवक्ता प्रशिक्षण शिविर, संवैधानिक विमर्श, विधिक संगोष्ठी अथवा संगठित आंदोलन नहीं चलाया। न जिला इकाइयों के गठन की स्पष्ट प्रक्रिया सामने आई और न ही बूथ या प्रखंड स्तर तक विधिक टीम तैयार करने की कोई गंभीर पहल हुई। जबकि दूसरी राजनीतिक पार्टियों ने कानूनी मोर्चे को संगठनात्मक रूप से काफी मजबूत किया है।

यह स्थिति ऐसे समय में और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है जब झारखंड की राजनीति में कानूनी और संवैधानिक विवाद लगातार बढ़े हैं। राज्य के कई बड़े राजनीतिक नेताओं पर विभिन्न न्यायालयों में मामले चल चुके हैं। सरकार से जुड़े निर्णयों, नियुक्तियों, खनन, भूमि, आरक्षण तथा संवैधानिक प्रक्रियाओं को लेकर भी बार-बार न्यायिक हस्तक्षेप देखने को मिला है। इसके बावजूद कांग्रेस का लीगल सेल इन मुद्दों पर संगठित और संस्थागत रूप से शायद ही कभी सक्रिय दिखाई देता है।

लीगल सेल सिर्फ मुकदमे लड़ने का मंच नहीं होता

राजनीतिक दलों के लिए लीगल सेल केवल मुकदमे लड़ने का मंच नहीं होता। यह संगठन कार्यकर्ताओं को कानूनी सहायता देने, संवैधानिक मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखने, चुनाव संबंधी विवादों में समन्वय स्थापित करने, सरकार की नीतियों का विधिक परीक्षण करने और जनआंदोलनों को कानूनी आधार प्रदान करने का माध्यम भी होता है। लेकिन झारखंड कांग्रेस में यह इकाई लंबे समय से निष्क्रियता और उपेक्षा का शिकार बनी हुई है।

प्रदेश नेतृत्व की प्राथमिकताओं में भी लीगल सेल शायद कभी गंभीर विषय नहीं बन पाया। पार्टी के बड़े कार्यक्रमों, बैठकों और राजनीतिक अभियानों में इस संगठन की उपस्थिति बहुत कम दिखाई देती है। कई बार ऐसा प्रतीत होता है कि प्रदेश नेतृत्व और प्रभारी स्तर पर भी लीगल सेल को संगठनात्मक शक्ति के रूप में नहीं देखा जाता। यही कारण है कि वर्षों बाद भी इसकी स्पष्ट संरचना, सक्रिय कार्यक्रम और प्रभावी उपस्थिति विकसित नहीं हो सकी।

झारखंड कांग्रेस के भीतर यह प्रश्न लगातार उठता रहा है कि जब पार्टी के पास अनुभवी और योग्य अधिवक्ताओं की बड़ी संख्या उपलब्ध है, तब भी लीगल सेल संगठनात्मक रूप से इतना कमजोर क्यों है। यह केवल नेतृत्व का प्रश्न नहीं, बल्कि संगठनात्मक इच्छाशक्ति और प्राथमिकता का भी विषय है। जब तक कांग्रेस अपने विधिक संगठन को गंभीरता से नहीं लेगी, तब तक वह आधुनिक राजनीतिक संघर्ष के एक महत्वपूर्ण मोर्चे पर कमजोर बनी रहेगी।

 

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