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Saturday, March 7, 2026
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बिहार जदयू की सियासत में कौन बाजी मारेगा…अशोक चौधरी या ललन सिंह…?दोनों को किसे मिलेगा नीतीश कुमार का साथ…? 

पटना: बिहार में जदयू में सियासत का संग्राम जारी है. जदयू के अंदर की लड़ाई अब खुल कर सामने आ गई है। दरअसल, राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह और नीतीश सरकार में जेडीयू कोटे के मंत्री अशोक चौधरी के घमसान मचा हुआ है। यह टकराव इसी हफ्ते जदयू दफ्तर में नीतीश कुमार के सामने पहली बार दिखा था, जब बरबीघा की राजनीति में दखलंदाजी न करने की सलाह ललन सिंह ने अशोक चौधरी को दी थी। उन्होंने उनके बार-बार के बरबीघा दौरे पर एतराज जताया तो पलट कर चौधरी ने भी ललन सिंह को जवाब दे दिया था कि आप रोकने वाले कौन होते हैं…?

बरबीघा पर बौखलाहट के मायने…?

दरअसल, अशोक चौधरी ने शुक्रवार को बरबीघा में कई कार्यक्रम पहले से ही तय कर रखे थे. उन्हें भवन निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस का उद्घाटन करने के अलावा बरबीघा नगर परिषद की कई सड़कों के उद्घाटन और शिलान्यास करना था. अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह की मनाही के बावजूद अशोक चौधरी लाव-लश्कर के साथ बरबीघा पहुंचने से ललन सिंह बौखला गए। अशोक चौधरी महादलित समाज से आते हैं। बरबीघा उनकी राजनीतिक जमीन रही है। उनके पिता पहले यहां से विधायक रह चुके हैं. बाद में अशोक चौधरी भी पहली बार यहीं से जीते। हालांकि तब वे कांग्रेस के विधायक हुआ करते थे। बाद में नीतीश कुमार से उनकी निकटता बढ़ी और वे जेडीयू का हिस्सा बन गए। नीतीश कुमार भी उन्हें काफी तरजीह देते रहे हैं। इधर, बरबीघा प्रकरण में ललन सिंह आशंका है कि कहीं चौधरी उनकी सीट हथिया न लें। गरमायी सियासत में इस बात की चर्चा है कि कहीं अशोक को नीतीश कुमार की शह तो नहीं दे रहे हैं?

जदयू में चौधरी बनाम ललन की राजनीति पर दोनों हैं आमने-सामने

वैसे राजनीतिक हलकों में सबको पता है कि अशोक चौधरी को नीतीश कुमार तरजीह देते हैं। हाल के दिनों की दो घटनाओं ने भी साबित किया है कि नीतीश कुमार अशोक चौधरी को कितना चाहते हैं। हफ्ता भर पहले ही मीडिया से नीतीश जब बात कर रहे थे तो, माथे पर तिलक लगाए एक पत्रकार ने नीतीश से कोई सवाल पूछा। नीतीश ने उसका जवाब देने के लिए अशोक चौधरी को गर्दन से धकेल कर सामने कर दिया। अशोक चौधरी भी पहले माजरा समझ नहीं पाए। बाद में उन्हें लगा कि वे भी तिलक लगाते हैं, इसलिए पत्रकार के सवाल के जवाब में उन्होंने दो तिलकधारियों को मिलाने की कोशिश की। फिर खुद चौधरी न उस पत्रकार के माथे से अपना माथा सटा दिया। दूसरी घटना उसके दो दिन बाद की है। अशोक चौधरी के गले लिपट कर नीतीश ने पत्रकारों से कहा कि देखिए, हम इन्हें कितना मानते हैं। दोनों नेताओं को करीब से जाननेवाले कहते हैं इस तरह जदयू में चौधरी बनाम ललन का राजनीतिक वितंडा खड़ा हो गया है. हालांकि इस प्रकरण में नीतीश कुमार अंदरूनी रूप से ललन के साथ खड़े दिखते हैं. यह वाकया इस बात की पुष्टि भी करता है.

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