हाईप्रोफाइल केस में गढ़वा के तत्कालीन प्रधान न्यायायुक्त पंकज श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त) और गया सिविल कोर्ट के तत्कालीन न्यायिक दंडाधिकारी राजेश प्रसाद पर भी लगे थे आरोप
मामला तूल पकड़ने के बाद अंतत: सीबीआई ने 2015 में इस केस की जांच शुरू की थी.
नौ साल के अंदर तारा शाहदेव के साथ सीबीआई कोर्ट ने किया इंसाफ और मुजरिमों को सजा मिल पायी
नारायण विश्वकर्मा
रांची : बहुचर्चित नेशनल शूटर तारा शाहदेव से जुड़े नौ साल पुराने यौन उत्पीड़न, दहेज प्रताड़ना, जबरन धर्म परिवर्तन मामले में रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल हसन, उसकी मां कौशल रानी और झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार (निगरानी) मुश्ताक अहमद को सीबीआई की विशेष अदालत ने 5 अक्तूबर को सजा सुना दी है. नौ साल पहले देश को झकझोर देनेवाले मामले की पीड़िता नेशनल शूटर तारा शाहदेव ने सीबीआई कोर्ट से फैसला आने के बाद अदालत का आभार व्यक्त किया। उसने कहा-ये न्याय सिर्फ मेरे लिए नहीं है, बल्कि इससे देश की हर एक बेटी को भरोसा मिलेगा कि उसके साथ जो इस तरह से गलत करेगा, उसे सजा मिलेगी, ताकि इस तरह के कुकर्म करनेवाले आगे डरेंगे। तारा ने कहा कि लव जिहाद शब्द मेरी जिंदगी में जुड़ा, उसके बाद मेरी जिंदगी नरक बन गई। सीबीआई कोर्ट ने नेशनल शूटर तारा शाहदेव मामले में मुख्य आरोपी रंजीत कोहली उर्फ रकीबुल हसन को उम्रकैद, हाईकोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार मुस्ताक अहमद को 15 साल का सश्रम कारावास और रकीबुल हसन की मां कौशल रानी को 10 साल की सजा सुनाई है। इस मामले का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि न्यायिक क्षेत्र से जुड़ी बड़ी हस्तियां भी इस मामले में आरोपी थे, पर भारत के न्यायिक इतिहास में पहली बार झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार को सजा मिली है.

तारा ने कहा-झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार के आरोपी होने के बावजूद मुझे कानून पर भरोसा था
तारा शाहदेव ने कहा कि जब मेरी लड़ाई शुरू हुई तो लोगों ने इसे घरेलू हिंसा का नाम दे दिया, लेकिन मैं इंसाफ के लिए लड़ती रही। जब ये शब्द (लव जिहाद) मेरी जिंदगी में जुड़ा तो, नरक से बदतर जीवन हो गया। इसलिए मैं लड़ी, मेरी कोशिश थी कि जो मेरे साथ हुआ, वो किसी और लड़की के साथ ऐसा न हो। मेरे मामले में एक आरोपी न्यायालय से जुड़ा था, इसके बावजूद मुझे अदालत और कानून व्यवस्था पर भरोसा था। तारा शाहदेव ने कहा कि लोग लव जिहाद शब्द बोलते हुए झिझकते हैं। आए दिन खबरों में पढ़ती कितनी ही लड़कियों को शिकार बनाया जाता है।
जुलाई 2020 में बड़ी मुश्किल से मुझे फोनिक इंटरव्यू दिया था
बता दें कि 7 जुलाई 2014 के बाद तारा शाहदेव का मामला देश भर में सुर्खियां बनी थी. रांची के हरमू रोड, किशोरगंज चौक स्थित उसके आवास पर देश भर के मीडियावाले तारा शाहदेव से मिलकर इंटरव्यू लिया था. सभी इस खबर को प्रमुखता दी थी. उस समय सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तारा शाहदेव और उनके पिता-भाई ने मिलकर न्याय की गुहार लगाई थी. जुलाई माह में ही भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह से तारा शाहदेव मिल कर सीबीआई जांच की मांग की थी. मामला तूल पकड़ने के बाद अंतत: सीबीआई ने 2015 में इस केस की जांच शुरू की। घटना के छह साल बाद जुलाई 2020 को मैंने तारा से मिलकर केस का अपडेट जानने और न्याय में हो रही देरी को लेकर बातचीत करना चाहा था. लेकिन बहुत मुश्किल से उसने फोन पर बातचीत की थी. हालांकि तारा ने साफ कहा था कि वह इस घटना को याद ही नहीं करना चाहती है। बातचीत से मुझे लगा कि जैसेम मैंने उसकी दुखती रग को छेड़ दिया है. उस मनहूस रात की कालिमा जिसने तारा की जिंदगी को झकझोर कर रख दिया था। न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति से तारा शाहदेव ने नाराजगी जतायी है। वह चाहती थी कि इसकी जल्द सुनवाई खत्म हो और दोषियों को सजा मिले।
‘बस मुझे उस दिन का इंतजार है, जब सभी मुजरिमों को कानून सजा देगा’
मैंने तारा को बहुत करेदा तो उसने कहा कि मैं सब कुछ भूलकर अपने इंटरनेशनल कैरियर पर ध्यान देना चाहती हूं. मैं उस घटना को किसी बुरे सपने की तरह उसे भूल जाना चाहती है। वह कहती है कि 2014 के बाद से ही उसका पूरा ध्यान अपने इंटरनेशनल कैरियर पर है। ये अब उसके जीवन का लक्ष्य बन गया है। उसका जज्बा अब आसमान में सुराख करने का है। उसकी तमन्ना राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय फलक पर जाने की है। वह छोटी सी उम्र की भयंकर महाभूल को याद कर अपने लक्ष्य से नहीं भटकना नहीं चाहती। उसने बताया कि बस मुझे उस दिन का इंतजार है, जब सभी मुजरिमों को कानून सजा देगा। क्योंकि उस वक्त शारीरिक-मानसिक प्रताड़ना का जो दौर मैंने झेला, वह किसी को सजा मिल भी जाये तो, भी मेरे जख्मों के घाव नहीं भर सकेंगे। तारा जिन्दगी की तमाम उलझनों के बीच उसने इतिहास में रांची विश्वविद्यालय से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण हुई।
मुश्ताक अहमद ने न सिर्फ पद का दुरुपयोग किया, बल्कि न्यायिक व्यवस्था को भी कलंकित करने का काम किया था: भानू प्रताप शाहदेव
तारा प्रकरण शाहदेव में शुरू से जुड़े रांची के अधिवक्ता, भाजपा के वरिष्ठ नेता व समाजसेवी भानु प्रताप शाहदेव ने कहा कि देश और झारखंड के न्यायिक इतिहास में पहली बार पूर्व रजिस्ट्रार मुश्ताक अहमद को 15 साल की सजा मिली है, यह कोई मामूली घटना नहीं, बल्कि इसे ऐतिहासिक माना जाएगा. श्री शाहदेव ने कहा कि हालांकि इस मामले में मामले में कई जज भी आरोपी थे, पर मुश्ताक अहमद ने रकीबुल अंसारी उर्फ रंजीत का भरपूर साथ दिया था. इस मामले में उनका नाम आने के बाद झारखंड हाईकोर्ट में खलबली मच गई थी. इसलिए झारखंड हाईकोर्ट ने उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया था. श्री शाहदेव ने कहा कि लव जिहाद को आगे बढ़ाने में अपने पद का दुरुपयोग कर मुश्ताक अहमद ने न्याय व्यवस्था को कलंकित करने का काम किया था. सभ्य समाज उन्हें कभी माफ नहीं करेगा. क्योंकि तारा शाहदेव की जिंदगी बरबाद करने में उनकी मुख्य भूमिका रही. उन्होंने कई तरह के प्रलोभन देकर तारा शाहदेव को बरगलाने का काम किया था. उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक फैसले में बाद यह कहा जा सकता है कि न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा और बढ़ा है और लव जिहाद को बढ़ावा देनेवालों के लिए यह सबक होना चाहिए.
तारा मामले में पहली बार न्यायिक क्षेत्र से जुड़ी बड़ी हस्तियां शामिल थीं
उल्लेखनीय है कि तारा शाहदेव के मामले में पहली बार न्यायिक क्षेत्र से जुड़ी हस्तियां शामिल थीं. जुलाई 2019 में तारा शाहदेव प्रकरण में गढ़वा के तत्कालीन प्रधान न्यायायुक्त पंकज श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त), गया सिविल कोर्ट के तत्कालीन न्यायिक दंडाधिकारी राजेश प्रसाद पर लगे थे आरोप. हाईकोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार मुस्ताक अहमद भी शामिल थे, जिन्हें 15 साल का सश्रम कारावास की सजा मिली है. अन्य न्यायिक अधिकारियों दोषमुक्त कर दिया गया. चार्जशीट के ढाई साल बाद आरोप तय हुए। जैसे-जैसे तफ्तीश आगे बढ़ी तो, फिर कई सफेदपोश चेहरों के नाम भी सामने आने लगे थे. हाईप्रोफाइल मामले में शायद तारा शाहदेव परिवार को भी यकीन नहीं था कि नेता-मंत्रियों और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े बड़े-बड़े नाम सामने आने के बाद न्याय मिल पाएगा. इसके बावजूद नौ साल के अंदर तारा शाहदेव के साथ कोर्ट ने इंसाफ किया और मुजरिमों को सजा मिली.
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