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Wednesday, March 11, 2026
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बांग्ला: विश्व की मधुर भाषा में प्रथम स्थान पर – डॉ. कृष्ण कुमार गुप्ता

हजारीबाग – अन्नदा महाविद्यालय परिसर में आयोजित निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन के दूसरे दिन, भाषा और साहित्य प्रेमियों ने “बांग्ला के साथ अन्य भाषाओं का मेल बंधन” विषय पर गहन चर्चा की। इस विमर्श में, मुख्य वक्ता विनोबा भावे विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण कुमार गुप्ता ने बांग्ला भाषा की उत्पत्ति, विकास और इसकी विशिष्टताओं पर प्रकाश डाला।


बांग्ला: एक सशक्त और समृद्ध भाषा

1. बांग्ला का उद्भव और वैश्विक स्थान

  • डॉ. गुप्ता ने बताया कि बांग्ला भाषा ने अपने संस्कार और गुणों के कारण वैश्विक मंच पर छठा स्थान हासिल किया है।
  • भारत में हिंदी के बाद, यह दूसरी सबसे व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषा है।
  • यूनेस्को ने इसे “दुनिया की सबसे मधुर भाषा” का खिताब दिया है।

2. संस्कृत से गहरा संबंध

  • बांग्ला भाषा की जड़ें संस्कृत में हैं। इसके तत्सम शब्द इसे अद्वितीय और समृद्ध बनाते हैं।
  • यह अन्य भाषाओं के शब्दों को आत्मसात करने में भी सक्षम है, जिससे इसका साहित्य और भी प्रभावशाली बनता है।

बांग्ला का अन्य भाषाओं से संबंध

1. मैथिली और बांग्ला: एक डाली के दो फूल

  • दूसरे वक्ता श्री हितनाथ झा ने मैथिली और बांग्ला भाषाओं के बीच समानताओं को रेखांकित किया।
  • उन्होंने कहा कि दोनों भाषाएं एक सांस्कृतिक विरासत साझा करती हैं और एक-दूसरे के साथ गहरे जुड़े हुए हैं।

2. विभिन्न भाषाओं का समावेश

  • रांची से आईं श्रीमती सुदीप्तो भट्टाचार्जी ने बांग्ला की लचीलापन और समावेशिता पर प्रकाश डाला।
  • उन्होंने बताया कि बांग्ला ने समय के साथ कई भाषाओं के शब्दों को अपनाया है, जिससे इसका स्वरूप और मजबूत हुआ है।

बांग्ला साहित्य: एक सांस्कृतिक धरोहर

1. विदेशी हस्तक्षेप और बांग्ला की शक्ति

  • डॉ. गुप्ता ने बताया कि बांग्ला ने विदेशी शासकों के हस्तक्षेप के बावजूद अपनी पहचान और सशक्तता बनाए रखी है।
  • इसका समृद्ध साहित्य भारतीय संस्कृति को जीवंत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

2. नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

  • बांग्ला साहित्य केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का साधन भी है।

सम्मेलन के अन्य पहलू

1. मंच संचालन और अध्यक्षीय भाषण

  • इस सम्मेलन का संचालन श्री मनोज सेन ने किया।
  • अध्यक्षीय भाषण में श्रीमती भट्टाचार्जी ने बांग्ला भाषा की समावेशी प्रकृति पर जोर दिया।

2. सहभागिता और उत्साह

  • साहित्य प्रेमियों और विद्वानों ने बांग्ला भाषा की गहराई को समझने और साझा करने के लिए उत्साहपूर्वक भाग लिया।

बांग्ला: भारतीय भाषाओं का गर्व

बांग्ला केवल एक भाषा नहीं, बल्कि संस्कृति, साहित्य और पहचान का प्रतीक है। यह भाषा अपने मधुरता, समृद्ध साहित्य, और संस्कारों के कारण अद्वितीय है।


बांग्ला से भारतीय भाषाओं का मेल

निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन ने भाषाओं के बीच एकता और सहयोग के महत्व को दर्शाया। बांग्ला की यह अनोखी विशेषता है कि यह अन्य भाषाओं के साथ मेलजोल बढ़ाकर अपनी धरोहर को समृद्ध करती है।

आइए, बांग्ला और अन्य भाषाओं के इस सांस्कृतिक मेल को सम्मान दें और भाषा की शक्ति को समझें।

News – Vijay Chaudhary


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