गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय स्थित सूचना भवन के सभागार में जिले के पत्रकारों के साथ एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता अपर समाहर्ता,शशिंद्र कुमार बड़ाइक गुमला ने की, जबकि जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी ललन कुमार रजक की उपस्थिति में कार्यशाला का संचालन हुआ। कार्यशाला का मुख्य विषय “बदलते परिवेश में मीडिया की भूमिका” था, जिस पर जिले के वरिष्ठ पत्रकारों ने अपने विचार साझा किए।
कार्यशाला की शुरुआत जिला जनसंपर्क पदाधिकारी एवं सभी वरीय पत्रकारों के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। अपने उद्घाटन संबोधन में जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी ने कहा,
“पत्रकार प्रशासन और आम जनता के बीच की कड़ी हैं। निष्पक्ष पत्रकारिता से समाज को सही दिशा मिलती है। पुराने और नए तजुर्बे के साथ हम एक नए उन्नत आयाम का निर्माण कर सकते हैं।”
पत्रकारों ने रखे अपने विचार
वरिष्ठ पत्रकार बलदेव शर्मा ने कहा “पहले पत्रकारिता पर व्यापक चर्चा होती थी, क्योंकि अखबार ही एकमात्र संचार माध्यम था। समाज और सरकार की बातें अखबारों के माध्यम से ही जनता तक पहुंचती थीं। आजादी की लड़ाई में पत्रकारिता का अहम योगदान था। पहले यह एक मिशन थी, लेकिन अब यह कमीशन का जरिया बनती जा रही है। हालांकि, यह भी सच है कि पत्रकार अपनी तकलीफें छिपाकर समाज की आवाज बनते हैं।”
उन्होंने आगे कहा,
“हमारी जिम्मेदारी है कि आने वाली खबरों की सटीकता की जांच करें और बिना पुष्टि किए कोई भी समाचार प्रकाशित न करें।”
वरिष्ठ पत्रकार के.ए. गुप्ता ने कहा “मीडिया का काम केवल खबरों को दिखाना ही नहीं, बल्कि समाज और सरकार के बीच एक मजबूत पुल का निर्माण करना भी है। पत्रकारों को सरकार की योजनाओं पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि यह पता चले कि योजनाओं का क्रियान्वयन कितना प्रभावी है। बेहतर पत्रकारिता के लिए अध्ययन आवश्यक है, क्योंकि शब्दों की ताकत समाज को बदलने की क्षमता रखती है।”
वरिष्ठ पत्रकार गणपत लाल चौरसिया ने अपने संबोधन में पत्रकारिता की विशेषता पर प्रकाश डाला, साथ ही उन्होंने जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी का धन्यवाद भी किया जिन्होंने इस प्रकार के कार्यशाला का आयोजन किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला समय समय पर किया जाना चाहिए ताकि पत्रकारों के मन के विचारों को रखने का एक मंच एवं अवसर मिल सके। साथ ही उन्होंने कई समस्याओं को भी साझा किया तथा पत्रकारों के सम्मान के सम्बन्ध में भी एक कटाक्षता जाहिर की।
पत्रकार अंजुम जी ने कहा “पहले पत्रकारों एवं प्रशाशन के बीच बेहतर समन्वय था, लेकिन अब यह कम होता जा रहा है। अधिकारियों से संवाद स्थापित करना कठिन होता जा रहा है, जिसे ठीक करने की आवश्यकता है।सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बावजूद प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की विश्वसनीयता बनी हुई है। मेरा आग्रह है कि अधिकारी पत्रकारों का सहयोग अवश्य करें ताकि समुचित सूचना का आदान-प्रदान हो सके।”
पत्रकार संतोष कुमार ने कहा “मीडिया और प्रशासन के बीच पारदर्शिता होनी चाहिए। अधिकारियों को जानकारी साझा करने में सहजता दिखानी चाहिए, ताकि सही सूचना जनता तक पहुंचे।”
पत्रकार शहजाद अनवर ने कहा “पत्रकारों को अपनी छवि, लेखनी और कार्यशैली पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। तभी हम समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को सही तरह से निभा पाएंगे।”
पत्रकार सुशील कुमार ने कहा “मीडिया हमेशा समाज की सेवा में रही है और अंतिम व्यक्ति तक की सूचनाएं पहुंचाने का कार्य करती रही है। पत्रकार निःस्वार्थ भाव से काम करते हैं, लेकिन यह भी महत्वपूर्ण है कि प्रशासन को भी यह समझना चाहिए कि मीडिया कर्मी कौन हैं और उनकी भूमिका क्या है।”
पत्रकार प्रवीण कुमार ने कहा “आज के समय में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। यह चिंता का विषय है कि अब लोगों के घरों में अखबार पढ़ने की संस्कृति खत्म होती जा रही है। लोगों को पढ़ने और लिखने के लिए प्रेरित करना चाहिए, ताकि पत्रकारिता को एक सही दिशा दी जा सके।”
वरिष्ठ पत्रकार अमरनाथ कश्यप ने कहा “मीडिया बदली नहीं है, बल्कि चुनौतियां बढ़ गई हैं। आज के दौर में पत्रकारिता के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से संवाद स्थापित करना कठिन होता जा रहा है।
उन्होंने उपायुक्त महोदय के पक्ष में अपनी बात रखने हेतु किसी अधिकारी की नियुक्ति करने की सलाह दी।
वरिष्ठ पत्रकार दुर्जय पासवान ने कहा “पुराने समय के अखबारों ने पत्रकारिता को एक सशक्त माध्यम बनाया, लेकिन आज चुनौतियां कहीं अधिक हैं। अखबार समाज के लिए वह स्तंभ है, जिसे हिलाया नहीं जा सकता। पत्रकारिता करें, लेकिन इसे वसूली का जरिया न बनाएं।”
कार्यशाला में अपर समाहर्ता, गुमला ने अपने विचार साझा करते हुए कहा,
“आप सभी ने अपने व्यस्त समय से समय निकालकर संवाद कायम किया, इसके लिए आप सभी का धन्यवाद। ‘बदलते समय में मीडिया की भूमिका’ एक विस्तृत विषय है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पत्रकारिता एक आंदोलन थी। पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से जनता तक आवाज पहुंचती थी। आज भी पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। जहां प्रशासन नहीं पहुंच पाता, वहां पत्रकारों की लेखनी जनता की आवाज बनती है।”
उन्होंने आगे कहा,
“प्रशासन और मीडिया दोनों का उद्देश्य जनता की सेवा है। हमें आपसी समन्वय और पारदर्शिता को बनाए रखना होगा। हम पूरी कोशिश करेंगे कि पत्रकारों को सही और सटीक सूचना समय पर मिले।”
अपर समाहर्ता ने यह भी कहा कि पत्रकारिता में आज ब्रेकिंग न्यूज की होड़ लगी हुई है, लेकिन इसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, यह भी सोचना जरूरी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासन और मीडिया के बीच संवाद बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि दोनों पक्षों के बीच तालमेल और सहयोग बना रहे।
कार्यशाला में सभी पत्रकारों ने मीडिया की बदलती भूमिका और चुनौतियों पर चर्चा की। कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए, जिनमें पारदर्शिता, प्रशासनिक संवाद, अध्ययन और पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखने पर जोर दिया गया।
बैठक के अंत में अपर समाहर्ता ने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रशासन और मीडिया के बीच सहयोग और बेहतर हो सके।
इस दौरान बैठक में मुख्य रूप से एपीआरओ नेहा पाठक, एडीएफ मीडिया एलीना दास, स्वाति तिर्की, रामलखन कुमार, दिवाकर साहू, सहित जनसंपर्क विभाग के अन्य कर्मी एवं जिले के प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार मौजूद रहें।
न्यूज़ – गणपत लाल चौरसिया
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