नारायण विश्वकर्मा
रांची : लंबे समय से भाजपा दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की वकालत कर रही है. भाजपा ने अपने पिछले सभी चुनावी घोषणा पत्रों में भी इस मांग पर जोर दिया है. 27 साल के बाद अब दिल्ली में डबल इंजन की सरकार है, तो क्या भाजपा अब अपनी मांग पर अमल करेगी? क्योंकि भाजपा दिल्ली सरकार को और अधिक अधिकार और स्वायत्तता दिलाने के पक्ष में शुरू से रही है.
चूंकि दिल्ली वर्तमान में एक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) है और इसका प्रशासन केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच साझा होता है। दिल्ली में पुलिस और भूमि जैसे महत्वपूर्ण विषय केंद्र सरकार के अधीन होते हैं, जबकि अन्य विषयों पर दिल्ली सरकार का नियंत्रण होता है।
भाजपा ने 2015 और 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों के अपने घोषणा पत्र में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का वादा किया था। हालांकि, हाल ही में संपन्न हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव (2025) में इसे प्रमुख चुनावी एजेंडे में शामिल नहीं किया गया था।
भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले और 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का वादा किया था। लेकिन भाजपा केंद्र सरकार में होने के बावजूद इस वादे को पूरी तरह से भूल गई थी. इस मुद्दे पर अक्सर राजनीतिक बहस होती रहती है, और आप पार्टी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग उठाती रही है.
पीएम ने कभी इसकी वकालत नहीं की
अलबत्ता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी भी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की वकालत नहीं की. इसके बजाय पीएम ने दिल्ली के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और एलजी (उपराज्यपाल) को अधिक शक्ति देने की दिशा में जरूर कदम उठाए.
हां, हाल के वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कुछ विधेयकों और अध्यादेशों के कारण दिल्ली की पूर्व केजरीवाल सरकार और दिल्ली के एलजी के बीच शक्तियों को लेकर विवाद बढ़ा. यह मुद्दा दिल्ली के प्रशासनिक ढांचे और शक्तियों के बंटवारे को लेकर था, जो संविधान के अनुच्छेद 239AA के तहत परिभाषित है।

अध्यादेश के जरिए शक्तियों को सीमित कर दिया गया
अगस्त 2023 में केंद्र सरकार ने संसद में एक विधेयक पेश किया, जो मई 2023 के अध्यादेश को कानून का जामा पहना कर दिल्ली के उपराज्यपाल को सेवाओं (कर्मचारियों के प्रबंधन) पर पूर्ण नियंत्रण दिया गया, जबकि दिल्ली सरकार की शक्तियों को कम कर दिया गया. यानी इस अध्यादेश के जरिए, दिल्ली सरकार की शक्तियों को सीमित कर दिया गया और एलजी को अधिक अधिकार दिए गए।
इस अध्यादेश को लाने का कारण सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला था, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली सरकार को सेवाओं पर नियंत्रण का अधिकार होना चाहिए, क्योंकि दिल्ली में चुनी हुई सरकार होने के बावजूद केंद्र सरकार का अत्यधिक हस्तक्षेप लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है।
केजरीवाल सरकार का तर्क था कि केंद्र सरकार ने इस विधेयक के जरिए दिल्ली की चुनी हुई सरकार को कमजोर करने का प्रयास किया है, जो लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी है, और इसकी विशेष स्थिति को देखते हुए केंद्र का कुछ हद तक नियंत्रण आवश्यक है। यानी भाजपा और केंद्र सरकार का तर्क था कि यह कदम दिल्ली के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। आम आदमी पार्टी ने इस कदम को असंवैधानिक और लोकतंत्र विरोधी बताया.
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई 2023 को इस मामले में दिल्ली सरकार के पक्ष में फ़ैसला सुनाया था. शीर्ष अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा था कि अधिकारियों के ट्रांसफ़र और पोस्टिंग का अधिकार दिल्ली सरकार के पास होना चाहिए. लेकिन केंद्र सरकार ने इस फ़ैसले के तुरंत बाद एक अध्यादेश जारी किया जिसके तहत अधिकारियों की ट्रांसफ़र और पोस्टिंग से जुड़ा आख़िरी फैसला लेने का हक़ उपराज्यपाल को वापस दे दिया गया है.

नेहरू भी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं देना चाहते थे
दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए सभी राजनीतिक दलों ने समय-समय इसके लिए आवाज उठायी है. 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले, भाजपा ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का वादा किया था. 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने इस मुद्दे को उठाया था, लेकिन चुनाव हारने के बाद इस मामले में शांत हो गई. वहीं 2014 से अब तक, भाजपा और केंद्र सरकार ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के बजाय, दिल्ली सरकार की शक्तियों को सीमित करनेवाले कदम उठाए.
भाजपा के पू्र्व सभी सीएम ने पूर्ण राज्य की मांग पर जोर दिया
1990 के दशक और 2000 के शुरुआती वर्षों में दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे मदनलाल खुराना, सुषमा स्वराज और साहिब सिंह वर्मा जैसे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने अतीत में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की पुरजोर मांग की थी। यह मांग विशेष रूप से उठाई गई थी, जब भाजपा दिल्ली में सत्ता में थी या विपक्ष में थी। सच कहा जाए तो मोदी के सत्तासीन (2014) होने के बाद से ही भाजपा ने इस मुद्दे को अपने एजेंडे को हाशिये पर डाल दिया है.
दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने या नहीं देने पर कई तर्क गढ़े जाते हैं. कहा जाता है यहां पर विदेशी दूतावास और उच्चायोग भी हैं. इसलिए इसे दिल्ली सरकार को पूरी तरह से नहीं सौंपा जा सकता. लेकिन केन्द्र सरकार को भी उपराज्यपाल के जरिए दिल्ली सरकार के कामकाज में हस्तेक्षप करना उचित प्रतीत नहीं होता है. ना तो केन्द्र सरकार को सारी शक्तियां दी जा सकती और ना ही दिल्ली सरकार को. अगर ये हुआ तो इनके निरंकुश होने की आशंका बनी रहेगी. इसलिए कोई बीच का रस्ता निकालना होगा ताकि दिल्ली में विकास कार्य होते रहेंगे.

चौधरी ब्रह्म प्रकाश से लेकर केजरीवाल तक लड़ते रहे
नेहरू के शासनकाल के समय चौधरी ब्रह्म प्रकाश की दिल्ली सरकार को अधिक मांगे देने के मसले पर 1956 में प्रधानमंत्री नेहरू ने अपनी कांग्रेस सरकार को बर्खास्त करके दिल्ली विधानसभा को एक नगर निगम में बदल दिया था. क्या वो ही स्थिति फिर तो नहीं बन रही? क्या इतिहास अपने को दोहरा सकता है? क्योंकि दिल्ली में केन्द्र सरकार और आप सरकार के बीच चली खींचतान से दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश की याद आती है.
वैसे यह भी सच है कि भाजपा (पहले जनसंघ) और कांग्रेस की तरफ से लगातार मांग होती रही कि दिल्ली को पूर्ण विधानसभा मिले. ये मांग उठाने में भाजपा सबसे आगे थी. क्योंकि भाजपा को दिल्ली अपनी सी लगती थी. उसका यहां जनाधार भी था. तब जनसंघ के नेता जैसे मदन लाल खुराना, केदारनाथ साहनी, विजय कुमार मल्होत्रा वगैरह के नेतृत्व में मांग हो रही थी कि दिल्ली के चौतरफा विकास के लिए इसे पूर्ण राज्य का दर्जा देना जरूरी है. तब तक यहां महानगर परिषद और नगर निगम काम कर रही थी.
1993 में सीएम रहे मदनलाल खुराना को सांकेतिक शक्तियां ही मिलीं
हालांकि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए बालकृष्ण कमेटी की सिफारिशों को मानते हुए केन्द्र सरकार ने मई 1990 में संसद में एक बिल पेश किया. इसका मकसद दिल्ली को राज्य का दर्जा देना था. साल 1991 में दिल्ली को राज्य का दर्जा तो मिल गया और 1993 के विधानसभा चुनाव में मदन लाल खुराना दिल्ली के मुख्यमंत्री बन गये. लेकिन कहा जा सकता है कि दिल्ली विधानसभा को सिर्फ सांकेतिक शक्तियां ही मिलीं. आगे के सालों में केन्द्र में अटल बिहारी वाजपेयी और दिल्ली में शीला दीक्षित मुख्यमंत्री रहीं. पर कुल मिलाकर दिल्ली सरकार का काम बिना किसी बाधा या अवरोध के चलता रहा. लेकिन दिल्ली सरकार को अधिक अधिकार देने की भी मांग होती रही.
बहरहाल, दिल्ली आबादी के लिहाज से देश के बड़े राज्यों में शुमार जरूर है. चूंकि दिल्ली में अब भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है. केन्द्र सरकार चाहे तो शक्तियों को लेकर कोई सर्वमान्य नीति बना सकती है. दरअसल, दिल्ली में विवाद की स्थिति इसलिए बनी रहती है क्योंकि शक्तियों का बंटवारा स्पष्ट नहीं है. आनेवाले समय में यह पता चलेगा कि एलजी और नयी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बीच किस तरह का तालमेल रहता है या फिर गृहमंत्री अमित शाह ही दिल्ली के बॉस बने रहेंगे? क्योंकि दिल्लीवासियों को इसकी झलक मिल चुकी है. रेखा गुप्ता पूर्ण राज्य की मांग कर पाएगी,ऐसा नहीं लगता. मौजूदा हालात में पीएम इसकी पहल करेंगे,इसकी संभावना नहीं लगती. अब देखना है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को डबल इंजन की सरकार पूर्ण राज्य का दर्जा देगी या दिल्ली केंद की दासी ही रहेगी या भाजपा की सबसे पुरानी मांग पूरी होगी…?
SWAGR 12 Pairs Sports Cotton Ankle Length Socks for Men, Pack of 12., Assorted
₹184.00 (as of October 22, 2026 12:43 GMT +05:30 - More infoProduct prices and availability are accurate as of the date/time indicated and are subject to change. Any price and availability information displayed on [relevant Amazon Site(s), as applicable] at the time of purchase will apply to the purchase of this product.)Lymio Men Shorts || Cotton Short for Men || with Pocket Style (Shorts-09-12)
₹399.00 (as of October 22, 2026 12:43 GMT +05:30 - More infoProduct prices and availability are accurate as of the date/time indicated and are subject to change. Any price and availability information displayed on [relevant Amazon Site(s), as applicable] at the time of purchase will apply to the purchase of this product.)The Indian Garage Co Men's Slim Fit Casual Striped Cotton Shirt
₹405.00 (as of October 22, 2026 12:43 GMT +05:30 - More infoProduct prices and availability are accurate as of the date/time indicated and are subject to change. Any price and availability information displayed on [relevant Amazon Site(s), as applicable] at the time of purchase will apply to the purchase of this product.)Nermosa Women's Printed Anarkali Kurta Palazzo Set with Dupatta | Kurta sets for women
₹689.00 (as of October 22, 2026 12:43 GMT +05:30 - More infoProduct prices and availability are accurate as of the date/time indicated and are subject to change. Any price and availability information displayed on [relevant Amazon Site(s), as applicable] at the time of purchase will apply to the purchase of this product.)GoSriKi Kurta Set Women Viscose Printed | Kurti Set Woman | Kurta Pant Dupatta 3 Piece Outfit | V-Neck Elbow Length Sleeve Straight Fit Ethnic Wear Ladies Dress Stylish Traditional Clothing
₹615.00 (as of October 22, 2026 12:43 GMT +05:30 - More infoProduct prices and availability are accurate as of the date/time indicated and are subject to change. Any price and availability information displayed on [relevant Amazon Site(s), as applicable] at the time of purchase will apply to the purchase of this product.)SGF11 Women's Kanjivaram Soft Silk Saree With Blouse Piece
₹474.00 (as of October 22, 2026 11:53 GMT +05:30 - More infoProduct prices and availability are accurate as of the date/time indicated and are subject to change. Any price and availability information displayed on [relevant Amazon Site(s), as applicable] at the time of purchase will apply to the purchase of this product.)Yashika Women's Chiffon Saree with Blouse Piece for Traditional Ethnic Wear Sari
₹439.00 (as of October 22, 2026 11:53 GMT +05:30 - More infoProduct prices and availability are accurate as of the date/time indicated and are subject to change. Any price and availability information displayed on [relevant Amazon Site(s), as applicable] at the time of purchase will apply to the purchase of this product.)Yashika Women's Banarasi Kanjivaram Cotton Silk Saree With Unstitched Blouse Material
₹469.00 (as of October 22, 2026 11:53 GMT +05:30 - More infoProduct prices and availability are accurate as of the date/time indicated and are subject to change. Any price and availability information displayed on [relevant Amazon Site(s), as applicable] at the time of purchase will apply to the purchase of this product.)Yashika Women's Pure Kanjivaram Silk Saree Soft Banarasi Style Wedding With Blouse Piece | Saree For Women | New Sari
₹409.00 (as of October 22, 2026 11:53 GMT +05:30 - More infoProduct prices and availability are accurate as of the date/time indicated and are subject to change. Any price and availability information displayed on [relevant Amazon Site(s), as applicable] at the time of purchase will apply to the purchase of this product.)SIRIL Women's Bandhani Printed Embroidery Georgette Saree with Unstitched Blouse Piece
₹499.00 (as of October 22, 2026 11:53 GMT +05:30 - More infoProduct prices and availability are accurate as of the date/time indicated and are subject to change. Any price and availability information displayed on [relevant Amazon Site(s), as applicable] at the time of purchase will apply to the purchase of this product.)Discover more from Jharkhand Weekly - Leading News Portal
Subscribe to get the latest posts sent to your email.








