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Friday, August 21, 2026
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 कुणाल कामरा के बयान पर उबलनेवाली जमात माता सीता को ‘मौत का सामान’ कहने पर खामोश क्यों है ?  

कामरा को लेकर गोदी मीडिया के प्राइम टाइम पर डिबेट होने लगी थी कि हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं, अब क्या सांप सूंघ गया…!

माता सीता को ‘मौत का सामान’ बोला गया है। फिर भी किसी की भावनाएं आहत नहीं हुई हैं, क्योंकि बोलने वाला व्यक्ति भाजपा का विधायक पन्नालाल शाक्य है. जब कुणाल कामरा ने भगवान राम को ‘सीता का पति’ बोला था तो संघ-भाजपा के नेता और अंधभक्त समाज ऐसे उछलने लगे थे मानो किसी ने कीलों वाली कुर्सी पर बैठा दिया हो। गोदी मीडिया पर प्राइम टाइम डिबेट होने लगी थी कि कामरा ने हिंदुओं की भावनाएं आहत की हैं।

कामरा के शब्द तो यथार्थ थे। भाजपा विधायक ने तो माता सीता को एक ‘सामान’ बता दिया, वो भी ‘मौत’ का। कामरा को जेल भेजने की बात करने वाले संघ और भाजपा की ऐसी क्या मजबूरी है कि वो पन्नालाल को पार्टी से बाहर नहीं कर रहे? क्यों अब तथाकथित हिंदूवादी संगठनों के आतंकी पन्नालाल शाक्य का पुतला नहीं जला रहे? अंधभक्त कौन सी गुफा में छिपकर बैठे हैं?

अब कहां गया राम और सीता के प्रति पाखंडियों का प्रेम और सम्मान ?

हक़ीक़त तो यही है कि कामरा ने हिंदुओं की भावनाएं आहत नहीं की थीं। भावनाएं तो उन ‘हाइब्रिड नस्ल’ वाले हिंदुओं की आहत हुई थीं जिनके लिए भाजपा ही धर्म है और ‘दिल्ली वाला दुर्जन’ उनका भगवान। माता सीता को ‘मौत का सामान’ बताने से इन्हें फ़र्क़ नहीं पड़ेगा, लेकिन अगर दिल्ली वाले दुर्जन को ‘मौत का सौदागर’ बोल दें तो ज़रूर ये आग बबूला हो उठेंगे।

संघ, भाजपा और उनके अंधभक्त समर्थक वास्तव में सनातनी-हिंदू हैं ही नहीं। ये वो ‘हाइब्रिड नस्ल’ है जो हनुमान को चुनावी रैली में नचाकर या पतंग के रूप में उड़ाकर प्रफुल्लित होती है।

ये वो हाइब्रिड नस्ल है जो हाथ में मछली लेकर ‘जय श्री राम’ का नारा लगाती है और ‘दिल्ली वाले दुर्जन’ से छोटा कद भगवान राम का दिखाती है। ये वो हाइब्रिड नस्ल है जो मंदिर लूटती है और तिलक-कलावा बांधकर और भगवा पहनकर चुनावी लाभ के लिए बोटियां चीथती है।

वास्तव में ये शुद्ध सनातनी हैं ही नहीं। ये तो उस असुर प्रजाति के हैं जो वरदान लेने के लिए भगवान शिव और ब्रह्मा का तप करते थे। वरदान मिलते ही उन्हीं शिव, ब्रह्मा और अन्य देवी-देवताओं का अपमान करना शुरू कर देते थे।

फिर भगवान श्री हरि विष्णु अवतार लेकर उन असुरों का अंत करते थे। वर्तमान दौर के इन असुरों का भी एक दिन पाप का घड़ा जरूर भरेगा। तब तक जितना इतराना है, इतरा लें। भूलें नहीं कि रावण और हिरण्यकश्यप ने भी भगवान को खुद से ऊपर माना था और अंहकारी हो गया था. बाद में उनका क्या हश्र हुआ ?

भगवान राम जी को मोदी जी लाने की जब बात होती है तो उनको कोई कुछ नहीं बोल सकता, इसीलिये बीजेपी ने जय सिया राम में से सिया को हटाकर जय श्री राम का नारा दिया है, सीता माता को बीजेपी कुछ भी बोल सकती है भावना श्री राम से आहत होती है, 2014 में आजाद हुए दिमागी पैदल लंडूस अंधभक्तों की भावना सीता माता के अपमान से आहत नहीं होती

पहले राम को लाने का क्रेडिट लिया, अब अंधभक्तों ने ‘राम’ ही बना दिया…!

पहले राम को लाने का क्रेडिट लिया. फिर रामधन चोरी का आरोप लगा. अब अंधभक्तों ने ‘राम’ ही बना दिया !! किन्नर समाज को हथियार बनाया गया है, बिहार में मंदिर बनेगा ! मार्केट में मोदी चालीसा आ गया है लेकिन ये सनातन का अपमान नहीं है? मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का अपमान नहीं है? कपिल मिश्रा का बयान आज भी विधानसभा के रिकॉर्ड में है. उसको खरीदकर पार्टी में मिला लिया. दिल्ली सरकार में अभी मंत्री है.

यह केवल हमारी आस्था का ही नहीं, बल्कि हमारे सनातन धर्म और हमारे आराध्य सभी देवी-देवताओं का सीधा अपमान है। इन्हें हमारी संस्कृति, परंपरा और जन-भावनाओं से कोई सरोकार नहीं है। दुखद तो ये है इस पर हमारे महामानव चुप हैं. जैसे जब उन्हें विष्णु का अवतार या अवतारी पुरुष कहा जाता है तो इसपर वो अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं देते, बल्कि बोलनेवालों को पद-प्रतिष्ठा देकर उपकृत करते हैं.

-दीपक गोस्वामी


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