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Sunday, September 6, 2026
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 ये किसे पता था कि इतनी जल्दी विधाता हमसे हमारे प्रिय नेता को छीन लेगा…सोनू भैया को झारखंडियों का आखिरी जोहार…!!

राजकीय सम्मान के साथ हुई अंतिम विदाई में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, स्पीकर व अन्य मंत्री शामिल हुए

कमलनयन

गिरिडीह ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की आन, बान और शान—’सोनू भैया’ के नाम से घर-घर में जाने जाने वाले, हरदिल अजीज, अल्पसंख्यकों के मसीहा और हर एक कार्यकर्ता का नाम याद रखने वाले युगपुरुष का यूं चले जाना तमाम कार्यकर्ताओं को झकझोर गया है.

जो शख्स शनिवार को इस्लामिया उर्दू मिडिल स्कूल, गिरिडीह के शताब्दी समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में पूरी ऊर्जा के साथ यह एलान कर रहे थे कि “राज्य के किसी भी स्कूल को अगर कंप्यूटर की जरूरत हो, वह अगर विभाग से नहीं होगा, तो मेरे विधायक कोटे से दिया जाएगा,” और जो यह कह रहे थे कि “व्यक्ति नहीं रहते, मगर उनके द्वारा बनाई गई संस्थाएं और बलिदान सदैव के लिए रह जाते हैं और वैसे लोग मर कर भी अमर हो जाते हैं”-वही लोकप्रिय नेता अल्पआयु में अचानक इस दुनिया को अलविदा कह जाएंगे! 
ये किसे पता था कि इतनी जल्दी विधाता उन्हें हमारे बीच से इस कदर उठा लेगा और हमें स्तब्ध कर देगा. यकीन नहीं हो रहा है कि झारखंड के मानचित्र पर सुदिव्य कृति रचनेवाले सुदिव्य सोनू पल भर में हमारी आंखों से इस कदर ओझल हो जाएंगे. सुदिव्य कुमार सोनू का रविवार तड़के दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह तो अभी जवान थे. उनकी उम्र मात्र 56 वर्ष थी.

​​शनिवार देर रात (करीब दो बजे) अचानक उनके सीने में दर्द उठा. उन्हें गिरिडीह के मर्सी अस्पताल में भर्ती कराया गया. चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का काफी  प्रयास किया, लेकिन उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई और रविवार तड़के उन्होंने अंतिम सांस ली। सुबह-सुबह गिरिडीह शहर से गांव-कस्बों तक उनके निधन की  खबर आग की तरह फैली. इसके बाद पूरे झारखंड में फैल गई। उनके निधन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंचने लगे।

2019 में पहली बार जीत का स्वाद चखा

हेमंत सोरेन सरकार में वे कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रहे. पार्टी संगठन के रणनीतिकार और विषम परिस्थितियों सरकार और संगठन का ढाल बनकर सामने आए. वे अपने पीछे पत्नी श्वेता शर्मा, दो पुत्रियां एक पुत्र हर्ष समेत भरा पूरा परिवार छोड़ गये।
दरअसल स्मृतिशेष दिशोम गुरु के सानिध्य में जेएमएम के बैनर तले सक्रिय राजनीति में आए सुदिव्य कुमार ने गिरिडीह सदर सीट से वर्ष 2009 में पहला और 2014 में इसी सीट पर दूसरा चुनाव लड़ा और उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा. तीसरी बार 2019 गिरिडीह सदर जीत का स्वाद चखा. 2024 फिर विधायक चुने गए और पहली बार मंत्री बनने का उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ.

सरकार में सबसे ताकतवर मंत्री बन कर उभरे

सुदिव्य कुमार सोनू हेमंत सरकार में सबसे फिट और युवा नेता के रूप में उभरे. सरकार के सबसे सक्रिय और ताकतवर मंत्री जाने और माने जाते थे. उन्हें उनकी बेबाक और मुखर कार्यशैली के लिए जाना जाता था। विधानसभा के अंदर और बाहर, वे विपक्षी दलों को तार्किक रूप से जवाब देने में माहिर थे। गिरिडीह के स्थानीय विकास कार्यों में भी वे व्यक्तिगत रूप से रुचि लेते थे, जिसके कारण आम जनता के बीच उनकी लोकप्रियता और पैठ काफी गहरी थी।

सोनू हेमंत और कल्पना का रक्षा कवच बने रहे 

जब सरकार छात्र आंदोलन में चारों तरफ से निशाने पर थी, तो सुदिव्य कुमार सोनू ही थे जो मुख्यमंत्री को सबसे उपयुक्त लगे छात्रों से संवाद के लिए सुदिव्य जानते थे की बात नहीं बनने पर उनका जो अंदाज है उसके कारण वो विलेन बन जायेंगे और वो विलेन बने भी.
विधानसभा में जब झामुमो और कांग्रेस के बीच शीतयुद्ध चल रहा था, कांग्रेस बार बार झामुमो कोटे के मंत्रियों पर सवाल खड़े कर रही थी, तब सुदिव्य सोनू ही कांग्रेस विधायकों को जवाब देते थे. जब झामुमो विधायक भी अपने मंत्रियों पर सवाल खड़े कर दे रहे थे, तब भी सुदिव्य सोनू अपने विधायकों को भी जवाब देते थे. सोनू हेमंत और कल्पना का रक्षा कवच बने रहे  और इसी कारण कई सहयोगियों की आँखों को भी वो चुभते थे. भाषा पर जबरदस्त पकड़, मुद्दों की समझ, सटीक राजनीति, लहजे में सख्ती और अपनी बात पर अडिग रहनेवाला झामुमो का सिपाही दूसरा कोई न था.
2024 में जब हेमंत पर जेल का संकट था तो उन्होंने कल्पना सोरेन को गांडेय से जिताया. जब JTET में भाषा को लेकर झंझट चल रहा था, तब उन्होंने कठोरता से कहा-मगही, भोजपुरी, अंगिका नाय चलतो.

राज्यपाल मंत्री के निधन से मर्माहत हुए

झारखंड के राज्यपाल ने सोशल मीडिया में पोस्ट कर लिखा कि राज्य के मंत्री सुदिव्य कुमार के असामयिक निधन का समाचार अत्यंत दुखद एवं हृदयविदारक है. उनका निधन राज्य के लिए एक अपूरणीय क्षति है. ईश्वर शोकाकुल परिजनों एवं समर्थकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

झामुमो के समर्पित सिपाही थे सोनू भैया: हेमंत सोरेन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर कहा कि झारखंड आंदोलन के दौर से ही सुदिव्य कुमार सोनू स्मृति-शेष बाबा दिशोम गुरुजी के साथ पूरी निष्ठा और मजबूती से खड़े रहे. झारखंड मुक्ति मोर्चा के समर्पित सिपाही के तौर पर उन्होंने अपना जीवन झारखंड की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई को समर्पित किया. हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंडियत के प्रति सुदिव्य कुमार सोनू का समर्पण और उनकी जुझारू भावना हमेशा याद की जाएगी.
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सोनू भैया का स्नेह, उनका संघर्ष और झारखंड के लिए उनकी प्रतिबद्धता जीवनभर उनके साथ रहेगी. भावुक संदेश के अंत में सीएम हेमंत सोरेन ने लिखा ‘सोनू भैया, आपका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है. आपकी कमी हमेशा महसूस होगी।

बाबूलाल ने अपूरणीय क्षति बताया

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर गहरा दुःख जताते हुए कहा कि निधन की खबर से अत्यंत व्यथित हैं. वे कुशल जनप्रतिनिधि एवं जनसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व थे. उनका निधन झारखंड की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है. ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोक संतप्त परिजनों एवं समर्थकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें. केन्द्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी  राज्य सभा सांसद डा सरफराज अहमद ने अपने शोक संवेदना में कहा कि झारखंड ने एक प्रखर राजनेता और व्यवहार कुशल जनप्रतिनिधि खो दिया, जिसकी भरपायी काफी कठिन है।

सोनू के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए झामुमो कार्यालय लाया गया

झारखंडी जननेता के रूप लोगों के दिलों में रचे-बसे सुदिव्य कुमार की लोगों के बीच लोकप्रियता का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है कि निधन की सूचना पर सुबह चार बजे से ही मर्सी अस्पताल के बाहर अंतिम दर्शन के लिए भारी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई, जिसमें हर वर्ग के आम और खास शामिल थे।
लगभग 7-30 बजे शव वाहन पर रखकर उनके शव को निजी आवास उत्सव उपवन के लिए रवाना किया गया। रास्ते में सबसे पहले कुछ देर के लिए जेएमएम के जिला कार्यालय लाया गया, जहां जिला अध्यक्ष संजय सिंह समेत सैकड़ों लोगों ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी.

पक्ष-विपक्ष के विधायक-नेताओं ने अंतिम दर्शन किया

मंत्री के आवास उत्सव उपवन में अंतिम दर्शन कर श्रद्धाजंलि देने पहुंचे महामहिम राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो, केन्दीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, मंत्री डा. इरफान अंसारी, विधायक कल्पना सोरेन ने परिजनों को ढांढस बंधाया।
श्रद्धाजंलि देने के लिए विभिन्न दलों के सांसद विधायक समेत हजारों की संख्या में आम और खास शामिल थे। दिवंगत जननेता के उत्सव उपवन से मुक्तिधाम तक की अंतिम यात्रा के दौरान सड़क के दोनों तरफ हजारों की संख्या में महिला-पुरुष-युवा खड़े थे। और सभी की आंखें नम थी।

जब हर्ष ने पिता को मुखाग्नि दी तो, ‘सोनू भैया अमर रहे’ के नारे आकाश में गूंजे

अंतिम संस्कार के दौरान सबसे भावुक क्षण तब आया, जब दिवंगत मंत्री के 12 वर्षीय पुत्र हर्ष कुमार ने अपने पिता के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी। इस मार्मिक दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। मुखाग्नि की रस्म पूरी होते ही वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं और माहौल शोक में डूब गया। इस दौरान लोगों ने दिवंगत मंत्री के सम्मान में ‘सुदिव्य कुमार सोनू अमर रहें’ के नारे लगाए। परिजनों, समर्थकों और कार्यकर्ताओं के लिए यह क्षण बेहद भावुक रहा।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और विधायक कल्पना सोरेन समेत कई प्रमुख नेताओं ने उत्सव उपवन पहुंचकर दिवंगत मंत्री को श्रद्धांजलि दी और शोक संतप्त परिजनों को ढांढस बंधाया। इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद-विधायक और बड़ी संख्या में आम लोग भी मौजूद रहे।

अजीब संयोग… झारखंड के तीसरे शिक्षा मंत्री भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके

हाजी हुसैन अंसारी, जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और अब सुदिव्य सोनू. हेमंत सोरेन के पहले कार्यकाल (2019-24) में दो मंत्री और इस कार्यकाल के दूसरे वर्ष के पूरा होने के पहले दो मंत्री इस दुनिया से विदा ले चुके हैं.
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री रहे हाजी साहब (73).बुजुर्गवार थे. कोरोना से पीड़ित हुए, ठीक हुए और फिर हार्ट अटैक से चल बसे. उनकी जगह उनके बेटे हफीजुल हसन मंत्री बने फिर मधुपुर से उपचुनाव जीता.. 2024 में भी हफीजुल जीते और अभी भी मंत्री हैं..
स्कूली शिक्षा और उत्पाद मंत्री जगरनाथ महतो (56) को भी कोरोना ने लीला। फेफड़े संक्रमित हुए. लंबा इलाज चला पर बच नहीं पाए। 6 अप्रैल 2023 को चेन्नई के एमजीएम हेल्थकेयर अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके स्थान पर उनकी पत्नी बेबी देवी को मंत्री बनाकर डुमरी से उपचुनाव लड़ाया गया. वे जीतीं लेकिन 2024 का चुनाव वे जयराम महतो से हार गईं.
स्कूली शिक्षा, साक्षरता एवं निबंधन मंत्री रामदास सोरेन (62) भी किडनी के प्रत्यारोपण के बाद ज्यादा दिन जीवित नहीं रह सके. 2 अगस्त 2025 को घर के बाथरूम में गिरने के बाद दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान 15 अगस्त 2025 को उनका निधन हो गया. उनके निधन के बाद उनके बेटे सोमेश सोरेन को जेएमएम ने घाटशिला उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया और वे रिकॉर्ड वोटों से जीतकर विधानसभा पहुंचे.
 

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