26 C
Ranchi
Thursday, July 2, 2026
Advertisement
Home Blog Page 23

सांसद प्रतिनिधि राज आर्यन शर्मा को लोगों ने सौंपा स्मार पत्र, जलापूर्ति सुनिश्चित करने का JE को दिया निर्देश

0

धनबाद : सांसद ढुलू महतो जी के निर्देशानुसार सांसद प्रतिनिधि राज आर्यन शर्मा ने सोमवार को धनबाद विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत दामोदरपुर स्थित शांति विहार कॉलोनी का दौरा कर स्थानीय लोगों के साथ समस्याओं का जायजा लिया।

श्री शर्मा ने स्थानीय लोगों के समक्ष संबंधित कनीय अभियंता (JE) से दूरभाष पर वार्ता कर तत्काल आवश्यक कार्रवाई एवं समस्या के शीघ्र समाधान का निर्देश दिया। इसके बाद जेई ने शीघ्र ही सुचारू जलापूर्ति का आश्वासन दिया. उन्होंने आश्वस्त किया कि जनता की मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान ही हमारी प्राथमिकता है।

पाइपलाइन विस्तार नहीं होने से 75 में से 60 घरों में नियमित जलापूर्ति नहीं 

इससे पूर्व क्षेत्रवासियों की शिकायत पर मौके पर पहुंचे सांसद प्रतिनिधि ने जलापूर्ति व्यवस्था की बदहाली, क्षतिग्रस्त पाइपलाइन एवं पानी की बर्बादी का निरीक्षण किया। स्थानीय लोगों ने उन्हें एक आवेदन पत्र सौंपते हुए बताया कि लगभग 8 वर्ष पूर्व मुख्य मार्ग में पेयजल पाइपलाइन बिछाई गई थी, लेकिन कॉलोनी की अधिकांश गलियों में पाइपलाइन विस्तार नहीं होने के कारण लगभग 75 घरों में से 60 घर आज भी नियमित जलापूर्ति से वंचित है।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि पिछले कुछ समय से जलापूर्ति शुरू होने के बावजूद अधिकांश घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों ने सभी गलियों में पाइपलाइन विस्तार, घर-घर जल कनेक्शन एवं नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।

राम भक्तों के लिए

वारंटी आरोपी को गोमिया पुलिस ने दबोचा, पॉक्सो मामले में चल रहा था फरार

0

News – Kahkashan Farooqi 

गोमिया (बोकारो), 1 जून। कानून से बचने की कोशिश कर रहे एक वारंटी आरोपी को गोमिया थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस की इस कार्रवाई को क्षेत्र में अपराध एवं फरार आरोपियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान की महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार गोमिया थाना कांड संख्या 25/2026, दिनांक 7 मार्च 2026, में दर्ज मामले के नामजद आरोपी हजारी बस्की (पिता- स्व. तेलो मांझी), निवासी नगर टोला, थाना गोमिया, जिला बोकारो, के विरुद्ध माननीय न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज है।

न्यायालय के आदेश के आलोक में गोमिया थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।

इस अभियान का नेतृत्व गोमिया थाना प्रभारी प्रफुल्ल कुमार महतो ने किया। उनके साथ पुलिस अवर निरीक्षक अरुण कुमार, सहायक अवर निरीक्षक अखिलेश कुमार एवं सशस्त्र बल के जवान शामिल रहे। पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए आरोपी को दबोचने में सफलता हासिल की।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फरार आरोपियों एवं वारंटियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। न्यायालय से निर्गत वारंटों के निष्पादन को प्राथमिकता देते हुए विधि-व्यवस्था बनाए रखने तथा अपराध पर अंकुश लगाने के लिए ऐसी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि अपराधियों के विरुद्ध लगातार हो रही कार्रवाई से क्षेत्र में कानून का भय और लोगों का भरोसा दोनों मजबूत हो रहे हैं।

राम भक्तों के लिए

सड़क विहीन – लाधुडेरा गांव में प्रसव पीड़ा होने पर गर्भवती महिला को चार किलोमीटर दूर बहंगी और टोकरी पर उठाकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया

0

गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

दशकों से चुनावी तथाकथित जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए आश्वासन – आश्वासन ही रह गया हैं

गुमला : – गुमला जिला अंतर्गत स्थित पालकोट प्रखंड मुख्यालय के डेराबिलिंगबिरा पंचायत के लाधुडेरा गांव में आजादी के इतने वर्ष बाद भी बुनियादी सुविधाओं

का घोर अभाव बना हुआ है. चुनाव के समय तथाकथित जनप्रतिनिधियों का आश्वासन – आश्वासन ही रह गया है, फलस्वरूप क्षेत्र की आम जनता प्रतिदिन विभिन्न आकार प्रकार के समस्याओं से रूबरू होते रहते है और सालों भर परेशान रहते हैं , बरसात के मौसम में ओम ग्रामीण छोटी मोटी समस्याओं और इलाज के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर रोटी रोजी की समस्या में सालों भर उलझे रहते हैं, कोई नहीं है देखनहरा चुनाव के समय जनप्रतिनिधियों का जमावड़ा लगा रहता है इस गांव में और चुनाव के जीतने के बाद किसी का चेहरा नजर नहीं आता है . ताजा मामला लाधुडेरा गांव का है, जहां सड़क विहीन रास्ते के कारण एक गर्भवती

महिला को परिजन और ग्रामीणों ने बहंगी (बहंगी और टोकरी ) के सहारे टांगकर आनन फानन में इलाज के लिए चार किलोमीटर दूर स्थित अस्पताल पहुंचाया, प्राप्त जानकारी के अनुसार , लाधुडेरा निवासी पैरू खड़िया की गर्भवती पत्नी सुषमा देवी को अचानक तीव्र प्रसव पीड़ा शुरू हुई. और एंबुलेंस से संपर्क करने का प्रयास किया,

लेकिन गांव तक पक्की सड़क न होने और रास्ता अत्यंत दुर्गम व पथरीला होने के कारण, सड़क विहीन उक्त गांव तक एंबुलेंस या कोई अन्य वाहन गांव तक नहीं

पहुंच सका.और स्थिति गंभीर और बिगड़ते देख ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीका अपनाया और उक्त महिला को बहंगी टोकरी में बैठ कर और कंधे पर लाठी के सहारे उठाकर चार किलोमीटर का सफर तय करते हुए बिलिंगबिरा पंचायत मुख्यालय पहुंचाया गया और पंचायत मुख्यालय पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने आनन-फानन में एक निजी वाहन की व्यवस्था कर उक्त पीड़ित महिला

को पालकोट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों की देखरेख में उक्त महिला का इलाज चल रहा है। उक्त घटना को लेकर ग्रामीणों में स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के

खिलाफ भारी आक्रोश देखा गया। ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को आकर्षित होते हुए बताया कि

लाधुडेरा गांव आजादी कितने वर्ष बाद भी विकास की मुख्यधारा

से पूर्णतः कटा हुआ है. गांव में पक्की सड़क नहीं होने के कारण सबसे बड़ी परेशानी गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को होती है. इसके अलावा गांव में शुद्ध पेयजल समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं का भी घोर अभाव है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अविलंब गांव में सड़क निर्माण और पेयजल व्यवस्था बहाल करने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी को मूलभूत सुविधाओं से वंचित न होना पड़े ।

राम भक्तों के लिए

सिसई के लकैया गांव में गोवंशीय अवशेष मिलने से तनाव, बजरंग दल का गंभीर आरोप

0

गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला जिला अंतर्गत जिला सिसई थाना क्षेत्र के लकैया गांव के गंझू तालाब गौझिन डोभा में सोमवार को कथित रूप से गोवंशीय हड्डियां और मांस के अवशेष मिलने के बाद पूरे इलाके में भारी तनाव फैल गया है। घटना की सूचना आग की तरह फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और हिंदू संगठनों से जुड़े लोग मौके पर एकत्र हो गए और अपना कड़ा विरोध शुरू कर दिए, स्थिति की संवेदनशीलता और ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए सिसई थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए और अतिरिक्त सशस्त्र बल पुलिस घटना स्थल पर पहुंचेगी और पुलिस ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए और शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उक्त घटनास्थल पर मोर्चा संभाला और तालाब (डोभा) से उक्त अवशेषों को बाहर निकालने के लिए प्रशासन द्वारा जेसीबी मशीन और ट्रैक्टर मंगवाई गई और फिलहाल पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है और अपने वरिष्ठ पदाधिकारी गुमला पुलिस कप्तान हरिश बिन जामां ने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुरेश प्रसाद यादव थाना प्रभारी सिसई सहित अन्य पुलिस अधिकारियों द्वारा लोगों से शांति व सौहार्द बनाए रखने की अपील की जा रही है। तनावपूर्ण स्थिति के बीच ग्राम लकैया के आक्रोशित ग्रामीणों ने सिसई थाना प्रभारी को एक लिखित आवेदन सौंपकर त्वरित और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों द्वारा हस्ताक्षरित इस शिकायत पत्र में कहा गया है की सिसई थाना अंतर्गत स्थित “ग्राम-लकैया के गौझिन डोभा में गौ मांस एवं गाय काटे जाने के बाद बचा हुआ अवशेष फेंका गया है। उक्त डोभा को देखने से ऐसा प्रतीत होता है की इससे पूर्व भी यहाँ ऐसे अवशेष फेंके गए हैं। इससे साफ पता चलता है कि आसपास अवैध बूचड़खाना चलाया जा रहा है, जहाँ प्रतिबंधित गौवंश की हत्या की जा रही है।” इस आवेदन पर राजकुमार उरांव, रबि भारती, राजा वर्मा, दिलीप महतो, राहुल सारंगी, छोटू गोप, रौशन ठाकुर सहित दर्जनों ग्रामीणों और स्थानीय युवाओं के हस्ताक्षर मौजूद हैं, जिन्होंने आरोपियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है ताकि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो। इस घटना को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल गुमला जिला इकाई ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह कृत्य जानबूझकर हिंदू आस्थाओं को ठेस पहुंचाने उद्देश्य से और उक्त क्षेत्र का माहौल खराब करने के लिए किया गया है। संगठन ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी तीखा हमला बोला है। बजरंग दल का आरोप है कि सिसई विधायक जिगा सुसारण होरो और जिला प्रशासन के कथित संरक्षण में क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध बूचड़खाने और गौ तस्करी का धंधा संचालित हो रहा है। बजरंग दल के पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है की उक्त क्षेत्रों में लगातार हो रही गौ माता की हत्याओं को संगठन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। अतः जिला प्रशासन अविलंब सिसई थाना क्षेत्र के

लकैया गांव की घटना की जांच करे और अवैध बूचड़खानों व तस्करी पर पूर्ण विराम लगाए। यदि प्रशासन ने इस पर त्वरित कार्रवाई नहीं की, तो बजरंग दल सड़कों पर उतरने को बाध्य होगा और पूरे जिले के सभी प्रखंड स्तरों पर उग्र आंदोलन छेड़ेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी सरकार और जिला प्रशासन की होगी।

राम भक्तों के लिए

जिला भू-अर्जन एवं सड़क निर्माण योजनाओं की प्रगति की उपायुक्त ने की समीक्षा, लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन के दिए निर्देश

0

गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में जिला भू-अर्जन कार्यालय, गुमला द्वारा संचालित राष्ट्रीय राजमार्ग एवं राजकीय राजमार्ग से संबंधित विभिन्न सड़क निर्माण योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी महेश महतो सहित संबंधित विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित पलमा-गुमला पथ चौड़ीकरण योजना, भारतमाला परियोजना अंतर्गत सीजी/झारखंड बॉर्डर से गुमला तक (एनएच-43), गुमला बाईपास सड़क निर्माण योजना एवं एनएच-143 डी जमटोली-रांची-संबलपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर सहित विभिन्न योजनाओं की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त राजकीय राजमार्गों से संबंधित संचालित योजनाओं की प्रगति एवं भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

समीक्षा के क्रम में पलमा-गुमला पथ निर्माण कार्य के दौरान भू-अर्जन संबंधी विभिन्न बाधाओं एवं समस्याओं की जानकारी प्राप्त हुई। उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को स्थल निरीक्षण कर समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने तथा निर्माण कार्य को निर्बाध रूप से संचालित करने का निर्देश दिया।

बैठक में भूमि अधिग्रहण से संबंधित लंबित एवं विवादित मामलों की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित विवादों का नियमानुसार शीघ्र निष्पादन करते हुए वैध रैयतों एवं दावेदारों को मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

एनएच – 43 परियोजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि भू-अर्जन के एवज में अब तक लगभग 83.1 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है। उपायुक्त ने शेष लंबित भुगतानों को भी निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने का निर्देश दिया।

रायडीह अंचल से संबंधित लंबित भूमि मामलों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने अंचलाधिकारी, रायडीह को आवश्यक प्रतिवेदन अविलंब जिला मुख्यालय को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। वहीं पथ निर्माण विभाग (आरसीडी) को सड़क अलाइनमेंट से संबंधित आवश्यक तकनीकी सुधार एवं समन्वय स्थापित करते हुए कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया गया।

उपायुक्त ने कहा कि जिले में संचालित सभी सड़क एवं आधारभूत संरचना परियोजनाएं विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजा भुगतान की प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न होने देने का निर्देश दिया।

राम भक्तों के लिए

आधुनिक परिवेश में युवा वर्ग क्यों असुरक्षित होता जा रहा है? सामूहिक परिवारों के टूटने और बदलती जीवनशैली पर उठे सवाल

0

गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला: देशभर में केंद्र सरकार, राज्य सरकार, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन द्वारा समय-समय पर नशा मुक्ति अभियान चलाए जाते हैं। जागरूकता कार्यक्रमों, रैलियों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रखने का प्रयास किया जाता है। इसके बावजूद नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी और नशे के कारोबार पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है। ऐसे में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है — सरकार, प्रशासन, अभिभावक, शिक्षक या स्वयं समाज?

समाज के जानकारों का मानना है कि किसी एक पक्ष को दोषी ठहराने के बजाय वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों का गंभीरता से विश्लेषण करने की आवश्यकता है। आधुनिक दौर में युवा वर्ग तेजी से इंटरनेट और सोशल मीडिया की दुनिया में खोता जा रहा है। त्वरित सफलता और तेज रफ्तार जीवन की चाह में कई युवा जोखिम भरे कदम उठा रहे हैं। सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ती मौतें, नशे की लत, मानसिक तनाव, अवसाद और आत्महत्या जैसी घटनाएं समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे सामाजिक ढांचे में आया बदलाव भी एक महत्वपूर्ण कारण है। पहले संयुक्त परिवारों में बच्चों का पालन-पोषण कई लोगों की निगरानी और मार्गदर्शन में होता था। परिवार के बुजुर्ग बच्चों के व्यवहार, शिक्षा और दिनचर्या पर नजर रखते थे, जिससे अनुशासन और सामाजिक मूल्यों का विकास होता था। लेकिन बदलते समय के साथ संयुक्त परिवारों का स्थान एकल परिवारों ने ले लिया है, जहां परिवार अक्सर पति-पत्नी और बच्चों तक सीमित रह गया है।

वर्तमान समय में माता-पिता नौकरी, व्यवसाय या अन्य कार्यों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में बच्चों के साथ बिताया जाने वाला समय कम हो गया है। कई बच्चे छात्रावासों, किराए के मकानों या घर से दूर रहकर पढ़ाई करते हैं, जिससे उन पर प्रत्यक्ष निगरानी कम हो जाती है। ऐसे हालात में गलत संगति, नशे की लत या अन्य भ्रामक गतिविधियों में फंसने का खतरा बढ़ जाता है।

सामाजिक चिंतकों का मानना है कि युवाओं की सुरक्षा और बेहतर भविष्य के लिए केवल सरकार या प्रशासन की भूमिका ही पर्याप्त नहीं है। परिवार, विद्यालय, समाज और स्वयं युवाओं को भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा। बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना, उन्हें सही मार्गदर्शन देना और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है।

बढ़ती सामाजिक चुनौतियों के बीच यह प्रश्न आज भी बना हुआ है कि आधुनिक परिवेश में युवाओं को सुरक्षित और सकारात्मक दिशा देने के लिए समाज, परिवार और व्यवस्था को मिलकर कितनी गंभीरता से काम करने की जरूरत है। यही वह सवाल है, जिसका जवाब आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को तय करेगा।

राम भक्तों के लिए

देश में पुलों के गिरने का सिलसिला कब थमेगा? बिहार में ही सबसे अधिक पुल क्यों गिरते हैं? जांच रिपोर्ट कहां गुम हो जाती है? सबसे बड़ा सवाल…जवाबदेही कब तय होगी?

0
– नारायण विश्वकर्मा-
देश में पुलों के गिरने के बाद जांच रिपोर्ट आने का इंतजार रहता है. जांच रिपोर्ट कब आती है और कब कहां दब जाती है, ये किसी को भी मालूम नहीं चलता तबतक दूसरा-तीसरा और फिर दर्जन भर पुल नदी में समा जाता है. पुल गिरने  सिलसिला बिहार में लंबे समय से चल रहा है. बिहार में 2024 में दस दिन के भीतर ही 5 पुल धराशायी हो गए. राज्य के अररिया, सिवान, पूर्वी चंपारण, किशनगंज और मधुबनी ज़िलों में पुल गिरे.इन पुलों में से तीन निर्माणाधीन और दो निर्मित पुल गिरे. पुल निर्माण में होनेवाले करोड़ों रुपये भी नदियों बह जाते हैं. इस बीच वहां के लोगों को लंबे समय तक के लिए आवागमन के लिए मोहताज रहना पड़ता है.  

एक ही पुल, एक ही परियोजना और तीन बड़े हादसे

बिहार में गंगा नदी पर बन रहा अगुआनी-सुल्तानगंज 4 लेन पुल लगभग 1710 करोड़ रुपये की लागत का प्रोजेक्ट था। निर्माण भाजपा-नीतीश गठबंधन सरकार के दौरान चल रहा था। अप्रैल 2022 में इसका हिस्सा गिरा, फिर 4 जून 2023 को पूरा सुपर स्ट्रक्चर गंगा में समा गया और अगस्त 2024 में फिर पिलर और स्ट्रक्चर का हिस्सा ढह गया। एक ही पुल, एक ही परियोजना और तीन बड़े हादसे।

बाद में विशेषज्ञों द्वारा डिजाइन और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए और परियोजना को नए सिरे से डिजाइन सुधार के साथ आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी। सवाल यह है कि जिस पुल पर 1710 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हों, वह जनता के लिए खुलने से पहले ही तीन बार कैसे गिर जाता है?

विक्रमशिला सेतु से पुराना पुल सुरक्षित खड़ा है

अब भागलपुर का विक्रमशिला सेतु को देखिए। 4.7 KM लंबा यह पुल 2001 में चालू हुआ था। विशेषज्ञ वर्षों से इसके जोड़ों और बियरिंग्स में खराबी की चेतावनी दे रहे थे। लेकिन चेतावनियां फाइलों में घूमती रहीं।

4 मई 2026 को पिलर नंबर 133 के पास का हिस्सा टूटकर लटक गया और पुल बीच से लगभग दो हिस्सों में बंट गया। भारी वाहनों का आवागमन रोकना पड़ा। सौभाग्य से कोई जान नहीं गई, लेकिन यह हादसा भी अचानक नहीं था। चेतावनियां पहले से मौजूद थीं।

उधर, 1975 में इंदिरा गांधी के समय बना फरक्का बैराज रेल-सड़क पुल आज भी भारी मालगाड़ियों और सड़क यातायात का भार उठा रहा है। विक्रमशिला सेतु से कहीं पुराना होने के बावजूद वह सुरक्षित खड़ा है। कारण सिर्फ एक है, निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव।

हमीरपुर में निर्माणाधीन पुुल का हिस्सा तेज आंधी में ढह गया

29 मई 2026 को उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में बेटवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का हिस्सा तेज आंधी और बारिश के दौरान ढह गया। मलबे में दबकर 6 मजदूरों की मौत हो गई। करोड़ों रुपये की परियोजना पर काम चल रहा था। हादसे के बाद जांच के आदेश दिए गए। हमारे यहां जांच अक्सर हादसे के बाद शुरू होती है, हादसे से पहले नहीं।

9 जुलाई 2025 को गुजरात के वडोदरा जिले में महीसागर नदी पर बना गंभारी-मुजपुर पुल अचानक ढह गया। कई वाहन नदी में गिर गए। लगभग 9 लोगों की मौत हुई। हादसे के बाद पूरे गुजरात में 2100 से अधिक पुलों का आपातकालीन स्ट्रक्चरल ऑडिट करवाया गया और 5 अन्य पुलों को खतरनाक मानकर बंद करना पड़ा।

पुराने पुल नए पुलों को मुंह चिढा रहे

दूसरी तरफ इतिहास देखिए। 1959 में पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय बना राजेंद्र सेतु। उस दौर में लगभग 7 करोड़ रुपये की लागत से बना यह पुल आज भी उपयोग में है। 1982 में इंदिरा गांधी के समय बना महात्मा गांधी सेतु दशकों तक बिहार का मुख्य जीवनमार्ग बना रहा। लाखों वाहन गुजरे, भारी ट्रैफिक चला, बाद में उसके स्टील सुपर स्ट्रक्चर को और मजबूत किया गया, लेकिन निर्माण के दौरान तीन बार गिरने जैसी नौबत नहीं आई।

फिर गुजरात का मोरबी पुल हादसा याद कीजिए। मच्छु नदी पर बना ऐतिहासिक सस्पेंशन ब्रिज। मरम्मत और नवीनीकरण पर लगभग 2 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 30 अक्टूबर 2022 को पुल जनता के लिए खुला और कुछ ही दिनों बाद टूटकर नदी में गिर गया। 135 से अधिक लोगों की मौत हुई। दर्जनों परिवार तबाह हो गए।

जांच में सवाल उठे कि पुराने केबल बदले क्यों नहीं गए? सुरक्षा परीक्षण कितने व्यापक थे? जिम्मेदारी किसकी थी? लेकिन भक्तों ने इन सवालों पर चर्चा करने के बजाय सवाल पूछने वालों पर ही हमला करना ज्यादा जरूरी समझा।

1992 में पी. वी. नरसिम्हा राव के समय 388 करोड़ रुपये की लागत से बना विद्यासागर सेतु भी एक केबल आधारित पुल है। वह आज भी कोलकाता में लाखों वाहनों का भार उठा रहा है। न वह तीन बार गिरा, न उसके उद्घाटन के कुछ दिनों बाद कोई त्रासदी हुई। फर्क सिर्फ इतना है कि वहां इंजीनियरिंग परिणाम से आंकी जाती है, प्रचार से नहीं।
1987 में राजीव गांधी के समय असम की ब्रह्मपुत्र जैसी विशाल और उग्र नदी पर बना कोलिया भोमोरा सेतु आज लगभग चार दशक बाद भी खड़ा है। हर साल बाढ़ आती है, तूफान आते हैं, नदी अपना रौद्र रूप दिखाती है, लेकिन पुल अपनी जगह खड़ा रहता है। शायद उस समय कैमरों की संख्या कम थी और इंजीनियरों की जिम्मेदारी ज्यादा।

हजारों करोड़ की लागत से पुल निर्माण के दौरान ही गिरे, तो इसका इलाज क्या है?

सबसे बड़ा सवाल यह कि अगर ऑडिट पहले हो जाता तो क्या जानें बच सकती थीं? 1965 में लाल बहादुर शास्त्री के समय बना जवाहर सेतु आज 60 वर्ष से अधिक समय बाद भी चालू है। सोन नदी पर बना यह पुल आज भी यातायात संभाल रहा है। उस दौर के इंजीनियरों के पास आज जैसी तकनीक नहीं थी, लेकिन जिम्मेदारी जरूर थी। आज की सरकारें सिर्फ जांच कराने के नाम पर खानापूर्ति करती है. कुछ दिनों बाद जांच की फाइलें कहां गुम हो जाती है. इसपर कोई सवाल नहीं उठाता. 
अब भक्तों से एक छोटा सा सवाल है। अगर नेहरू, शास्त्री, इंदिरा, राजीव और नरसिम्हा राव के समय बने पुल 40, 50, 60 साल बाद भी खड़े हैं, लेकिन आज हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं निर्माण के दौरान ही गिर रही हैं, तो आखिर सवाल पूछना गुनाह क्यों है? अगर 1710 करोड़ का पुल तीन बार गिर जाए तो क्या जनता ताली बजाए? अगर 135 लोग मर जाएं तो क्या सिर्फ श्रद्धांजलि देकर मामला खत्म हो जाए? फिर बार-बार ऑडिट हादसे के बाद हो रहे हैं, इसका इलाज कोई बता पाएगा…?

 

राम भक्तों के लिए

विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर तंबाकू नशा मुक्ति अभियान का शुभारंभ, जागरूकता रथ रवाना

0

गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर रविवार को सदर अस्पताल, गुमला परिसर से उपायुक्त गुमला दिलेश्वर महत्तो, अपर समाहर्ता राजीव नीरज, सिविल सर्जन गुमला शंभूनाथ चौधरी, एलआरडीसी गुमला राजीव कुमार द्वारा संयुक्त रूप से तंबाकू नशा मुक्ति अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर जनजागरूकता हेतु प्रचार-प्रसार करने वाले जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

कार्यक्रम के दौरान तंबाकू सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से हस्ताक्षर अभियान का भी शुभारंभ किया गया। उपस्थित पदाधिकारियों एवं कर्मियों ने तंबाकू मुक्त समाज के निर्माण हेतु जनसहभागिता बढ़ाने तथा लोगों को नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

मौके पर अस्पताल प्रबंधक, जिला परामर्शी (तंबाकू निषेध कोषांग), मनोवैज्ञानिक तंबाकू मुक्ति केंद्र, एफएलसी-एनसीडी के प्रतिनिधि, सहियाएं तथा सदर अस्पताल के चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।

राम भक्तों के लिए

गुमला चैंबर ऑफ कॉमर्स ने फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, रांची के साथ महत्वपूर्ण बैठक

0

गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

व्यापारिक समस्याओं व क्षेत्रीय विकास पर हुई विस्तृत चर्चा

गुमला : – गुमला चैंबर ऑफ कॉमर्स का एक प्रतिनिधिमंडल रांची स्थित फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के पदाधिकारियों से मुलाकात कर गुमला के जनहित के मुद्दों पर वार्ता की। इस अवसर पर गुमला जिले के व्यापार, उद्योग एवं स्थानीय व्यापारियों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं एवं मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने गुमला में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, व्यापारियों की सुरक्षा, ब्लड बैंक को लाइसेंस, बिजली विभाग में उपकरणों की कमी की मांग, आधारभूत सुविधाओं के विकास तथा स्थानीय समस्याओं के समाधान हेतु फेडरेशन से सहयोग एवं आवश्यक पहल करने का आग्रह किया। फेडरेशन के पदाधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल की उक्त बातों को गंभीरता से सुना तथा यथासंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

गुमला चैंबर ऑफ कॉमर्स ने विश्वास व्यक्त किया कि फेडरेशन के सहयोग से जिले के व्यापार एवं उद्योग जगत की समस्याओं के समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल होगी तथा व्यापारियों के हितों को मजबूती मिलेगी। बैठक में चेंबर अध्यक्ष राजेश लोहानी ने फेडरेशन को विभिन्न मामलों के बारे में अवगत कराया और जिला मुख्यालय में सीसीटीवी कैमरे की संख्या को और बढ़ाने पर बल दिया गया। वही गुमला चैंबर सचिव प्रणय कुमार ने गुमला के व्यापारियों से अपील की है कि अपने-अपने प्रतिष्ठानों के बाहर हाई विजन कैमरा अवश्य लगाए ताकि किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना होती है तो उससे निपटने में प्रशासन को सहयोग मिल सके। वही उपाध्यक्ष अभिजीत जायसवाल ने भी व्यापार क्षेत्र को बढ़ाने के लिए जियाडा की खाली जमीनों पर व्यापारियों को दिलाने की अपील की है । मौके पर पी आर ओ प्रतीक अग्रवाल और रितेश गुप्ता भी उपस्थित थे l

राम भक्तों के लिए

निर्माण एवं असंगठित मजदूरों को संगठित करने का अभियान चलाएगी सीटू : राकेश कुमार

0

News – Kahkashan Farooqi 

गोमिया, बोकारो। झारखंड राज्य निर्माण कामगार यूनियन (सीटू) की बोकारो जिला कमेटी की बैठक मंगलवार को आईईएल, गोमिया स्थित सीटू कार्यालय में जिला अध्यक्ष रामचंद्र ठाकुर की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में निर्माण एवं असंगठित मजदूरों की समस्याओं, उनके अधिकारों तथा संगठन विस्तार को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष रामचंद्र ठाकुर ने कहा कि निर्माण एवं असंगठित मजदूरों को राजनीतिक रूप से जागरूक और संगठित करना समय की आवश्यकता है, ताकि वे अपने हक और अधिकारों की रक्षा के लिए वर्तमान व्यवस्था के खिलाफ संगठित संघर्ष कर सकें। उन्होंने मजदूर वर्ग की एकता को मजबूत करने पर बल दिया।

जिला सचिव राकेश कुमार ने कहा कि सीटू ने निर्माण एवं असंगठित मजदूरों के बीच व्यापक सदस्यता एवं संगठन विस्तार अभियान चलाने का निर्णय लिया है। यूनियन कार्यकर्ता विभिन्न कार्यस्थलों पर जाकर मजदूरों को संगठित करेंगे तथा उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेंगे। उन्होंने कहा कि आज भी बड़ी संख्या में निर्माण एवं असंगठित मजदूर शोषण का शिकार हैं और उन्हें निर्धारित न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिल रही है।

राकेश कुमार ने आरोप लगाया कि बोकारो जिले में राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा संचालित कई परियोजनाओं और कार्यस्थलों पर मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा है, जो गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए यूनियन आगामी दिनों में आंदोलनात्मक कार्यक्रम चलाएगी और सड़क पर उतरकर संघर्ष करेगी।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि निर्माण एवं असंगठित मजदूरों की विभिन्न समस्याओं एवं मांगों को लेकर 9 जून 2026 को सहायक श्रमायुक्त कार्यालय, बोकारो थर्मल में यूनियन के बैनर तले एक मांग पत्र सौंपा जाएगा।

बैठक में यूनियन के उपाध्यक्ष जे. एम. रंगीला, कोषाध्यक्ष अजय कुमार नायक, जिला कमेटी सदस्य मनोज कुमार महतो, भारत महतो, नरेश यादव, चमन प्रजापति तथा लोकनाथ ठाकुर सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।

 

राम भक्तों के लिए
IIT - Polo Tshirt - Premium