23.7 C
Ranchi
Thursday, April 3, 2025
Advertisement
HomeNationalJRSU : VC का पद डेढ़ माह से खाली, RTI एक्टिविस्ट इंद्रदेव...

JRSU : VC का पद डेढ़ माह से खाली, RTI एक्टिविस्ट इंद्रदेव लाल ने राज्यपाल से रजिस्ट्रार के कार्यकाल की जांच की गुहार लगाई

 

नारायण विश्वकर्मा

रांची : राजधानी रांची में जब झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी, तब लगा था कि यहां पढ़नेवालों छात्रों का भविष्य संवर जाएगा. 2016 में स्थापना के मात्र छह साल बाद ही झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय  के छात्रों का भविष्य असुरक्षित हो गया है. सच कहा जाए तो विश्वविद्यालय के वर्तमान स्वरूप में ही दीमक लगना शुरू हो गया है. नए कुलपति की नियुक्ति के लिए न तो अबतक विज्ञापन निकला और न ही किसी को कुलपति का प्रभार दिया गया है. 26 जून से कुलपति का पद रिक्त है. फिलहाल रजिस्टार के पद पर काबिज सेना से रिटायर्ड कर्नल राजेश कुमार ही विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेवारी संभाल रहे हैं. इनपर कई तरह की अनियमितताओं का आरोप चस्पां हो गया है.  

रजिस्ट्रार पर आंतरिक ऑडिट नहीं कराने का आरोप

आरटीआई एक्टिविस्ट इंद्रदेव लाल ने 10 जुलाई को राज्यपाल को पत्र लिखकर कर्नल राजेश कुमार के अबतक के कार्यकाल की जांच की गुहार लगाई है. राज्यपाल को लिखे पत्र में इंद्रदेव लाल ने आरोप लगाया है कि वित्त पदाधिकारी के पद पर रहते हुए (2016) राजेश कुमार ने बगैर टेंडर के सामग्रियों का अधिक मूल्य पर खरीदारी की है. इनपर आवंटित राशि में भी भी हेरफेर करने की शिकायतें मिल रही हैं. इतना ही नहीं उन्होंने उप कुलाधिपति के आदेश की अवहेलना करते हुए विश्वविद्यालय का आंतरिक ऑडिट तक नहीं होने दिया. इंद्रदेव लाल का आरोप है कि राजेश कुमार ने वित्त पदाधिकारी और फिर  रजिस्ट्रार बनने के बाद दो जगहों से, एक सेना से और दूसरा रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय से वेतन एवं अन्य भत्ता ले रहे हैं. आंतरिक ऑडिट होने के बाद ही इसका खुलासा हो पाएगा. रजिस्ट्रार नहीं चाहते कि किसी भी हालत में ऑडिट हो. इंद्रदेव लाल ने राज्यपाल से ऑडिट कराने का आग्रह किया है.

उप कुलपति का प्रभार पाने की जुगत भिड़ा रहे हैं रजिस्ट्रार

उन्होंने बताया कि राजेश कुमार कई गोपनीय और महत्वपूर्ण फाइलों को गायब करने की फिराक में हैं, इसलिए अपने द्वारा लिए गए वित्तीय लाभ एवं सामग्रियों की खरीद की फाइलें गायब करवा दी हैं. अगर निष्पक्ष जांच हुई तो इसका खुलासा हो जाएगा. इसके अलावा इनके द्वारा हजारों रुपए लेकर तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की बहाली करने का आरोप है. जांच होने पर इसका भी खुलासा हो जाएगा. उन्होंने बताया कि वित्त पदाधिकारी से विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार बनने के बाद राजेश कुमार अब वीसी बनने की जुगत भिड़ा रहे हैं. इंद्रदेव लाल ने राजभवन को लिखे पत्र में कहा है राजेश कुमार राजनीतिक लाबिंग के जरिए उप कुलपति का प्रभार प्राप्त करना चाहते हैं. वर्तमान में शैक्षिक सत्र 2023-24 के एडमिशन की प्रक्रिया शुरू है. इस बीच जुलाई-अगस्त कई संविदा में कार्यरत शिक्षक की अवधि कुछ की समाप्त हो गई तो, कुछ की होनेवाली है. अभी करीब डेढ़ माह से कुलपति का पद रिक्त है. सभी संविदा कर्मचारियों ने इस मामले में राज्यपाल व सीएम हेमंत सोरेन से अविलंब हस्तक्षेप करने की मांग की है.   

प्लेसमेंट सेल का गठन नहीं होने से मुश्किल में हैं छात्र

कुछ पूर्ववर्ती छात्रों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि अजय कुमार सिंह के वीसी रहते विश्वविद्यालय प्रशासन ठीकठाक ही चलता रहा, पर उनके जाने के जब कुलपति पीके नायडु ने कार्यभार संभाला, उसके बाद से ही यहां गड़बड़ी शुरू हुई. कुलपति पीके नायडु को कार्यकाल 26 जून तो समाप्त हो गया है, पर नीतिगत फैसले व नई नियुक्ति करने पर रोक लगा दी गई थी. दूसरी तरफ, विश्वविद्यालय में सृजित 41 शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक पदों पर भी नियुक्ति नहीं हो सकी है। अलबत्ता, अनुबंध पर कुछ फैकल्टी की नियुक्ति की गई है। बता दें कि गुजरात और राजस्थान के बाद देश के तीसरे रक्षा विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित इस विश्वविद्यालय में अभी तक स्थायी कुलपति की नियुक्ति नहीं हो सकी है। झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय में नामांकन लेनेवाले छात्र-छात्राओं को उम्मीद थी कि यहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें रक्षा क्षेत्र या पुलिस में अच्छे पदों पर नौकरी मिलेगी। अब हाल यह है कि प्लेसमेंट के लिए विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों के समक्ष छात्र गिड़गिड़ा रहे हैं। दरअसल, विश्वविद्यालय में पढ़ाई पूरी कर निकल रहे विद्यार्थियों की यह स्थिति वहां प्लेसमेंट सेल के गठन नहीं होने से हुई।

संविदा अवधि विस्तारित नहीं होने से कई शिक्षकेतर कर्मी बेरोजगार हुए

बताया गया कि झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष से संविदा पर कार्यरत कई शिक्षकेतर कर्मी बेरोजगार हो गए हैं. इन कर्मियों की संविदा अवधि वर्ष 5 मई को पूरी हो चुकी है. इस कारण शिक्षकेतर कर्मियों की संविदा अवधि विस्तारित नहीं हो पाई. अब इन संविदाकर्मियों के लिए आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है. कई कर्मियों की नौकरी की आयुसीमा भी समाप्त हो गई है. भुक्तभोगी कर्मचारी अपने रोजगार के लिए राजभवन से लेकर सीएमओ व संबंधित विभाग तक गुहार लगा रहे हैं. कर्मचारियों का कहना है कि अनुबंध अवधि विस्तार करने की प्रक्रिया वीसी के लिए रुटीन वर्क ही था. इसमें नई नियुक्ति का कोई संबंध नहीं था. लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने राजभवन को पत्र प्रेषित करके गुमराह किया है. कर्मियों का कहना है कि विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार का कहना है कि कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए सिरे से साक्षात्कार लिया जाएगा. इसके बाद नियुक्ति की जाएगी, जबकि कई वर्षों से इन संविदाकर्मियों को दो दिनों तक ब्रेक देकर अनुबंध विस्तारित कर दिया जाता था. कर्मचारियों ने विवि प्रशासन पर साजिश करने का आरोप लगाया. कहा कि नए सिरे से नियुक्ति के लिए साक्षात्कार तो एक बहाना है, असली मकसद हम सभी कर्मियों को नौकरी से हटाना है. शिक्षेकतर कर्मियों ने यह भी मुद्दा उठाया था कि इन दिनों विवि में तृतीय वर्ग के कर्मचारी नहीं होने के कारण कई महत्वपूर्ण कार्य बाधित हो रहे हैं. वहीं चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों से जबरन तृतीय वर्ग के कर्मचारी का कार्य करवाया जा रहा है.

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments