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Saturday, March 7, 2026
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झारखण्ड का २० साल का दिव्यांग, राजनीति के सोशल मीडिया का है चैम्पियन

झारखण्ड का २० साल का दिव्यांग, राजनीति के सोशल मीडिया का है चैम्पियन

रांची – चंदनकियारी विधानसभा के एक देहात गाव से उभरता हुआ सितारा झारखंड राजनीती के सोशल मीडिया में एक जाना माना नाम है निलकमल रजवार, सोशल मीडिया में बहुत ही एक्टिव रहते है और अपनी पार्टी के लिए सोशल मीडिया रणनीति तैयार करते हैं ।आईये जानते हैं हम इनके बारे में इन्ही की जुबार्नी , मेरा नाम नाम निलकमल रजवार,गांव कुमारदागा,थाना पिंड्राजोरो प्रखंड – चास,जिला- बोकारो चंदनकियारी विधानसभा (झारखंड) पढ़ाई 10 पास तक की है मैं शारीरिक रूल से विकलांग हूँ,कुछ तकलीफ के वजह से से पढ़ाई छोड़नी पड़ी सोशल मीडिया से जुड़े 2015 में, मेरी जब से राजनीति को सोचने और समझने की ज्ञान हुई तब से राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री आदरणीय बाबूलाल मरांडी जी द्वारा की गए कार्य गांव देहात में उनकी चर्चा हमेशा होती रहती थी,लोग उनकी सोच की तारीफ करते थे,जिसे हम अक्सर सुनते थे ओर सोचते थे कि हम भी जब राजनीति में कदम रखेंगे,कम उम्र होंने की वजह से राजनीति में कदम रख नही पाए,मगर मेरी सोच थी कि जब भी कोई पार्टी जॉइन करेंगे तो वो आदरणीय बाबूलाल जी की पार्टी जॉइन करेगे ओर बाबूलाल जी के साथ एक अच्छे ओर खुशहाल झारखंड बनाने में हम भी सर का साथ दे कर उनके आवाज़ बुलन्द करेंगे,और हमने अपना प्रयास सोशल मीडिया के माध्यम से शुरू किया, सोशल मीडिया में अपनी प्रयत्न जारी रखने लगे धीरे धीरे पार्टी के तमाम लोगों से सोशल मीडिया के द्वारा जुड़ने लगे ओर आखिर टाइम आ गया उस वक़्त की जो मुझे बेसब्री से इंतज़ार था वो पल 2016 में में रांची जेवीएम ऑफिस में आदरणीय बाबुलाल मरांडी सर से मुलाकात हुई,और मेरे आत्मविश्वास को और अधिक बल मिला,वहीं से मेरी सोशल मीडिया में एक नई पहचान मिली,इसी क्रम में बाबुलाल मरांडी सर लगातार हमारे हौसला बढ़ाते रहे उसके बाद हमें बोकारो जिला कमेटी द्वारा पार्टी के सोशल मीडिया प्रभारी बनाया गया, भले ही हम पढ़ाई छोड़ चुके हैं फिर भी हमारा शौक पढ़ना है चाहे वह न्यूज़ पेपर हो, न्यूज़ हो, नॉवेल हो, जी के बुक हो या किसी भी अच्छे लेखक द्वारा लिखी गई ज्ञानवर्धक किताब हो। मैं हमेशा कहानी की किताबें, समाचार पत्र, पत्रिकाएं, और किसी भी अन्य सामग्री को पढ़ता हूं जो मुझे अपने खाली समय में दिलचस्प लगता है। मेरी किताबों को पढ़ने का यह शौक पहली बार मेरे पिता ने देखा था और उन्होंने मुझे यह कहकर प्रेरित किया कि यह मेरे बेटे को स्वाभाविक रूप से दी जाने वाली एक बहुत अच्छी आदत है, इस आदत को कभी दूर न करें और इसे अभ्यास में रखें। मैं सिर्फ एक छोटा लड़का था और मुझे अपने माता-पिता द्वारा दी गई परीओ की कहानियों और अन्य कहानियों को पढ़ने में बहुत दिलचस्पी थी। सोशल मीडिया के बारे में कहना चाहूंगा आज यह गर्व से कह सकता हूँ कि यह सोशल मीडिया-इन्टरनेट की ताकत ही है कि तमाम अनजाने लोगो से मेरी जान-पहचान हुई और उनके स्नेह ने मुझे दिनों दिन हौसला दिया। अब मेरी स्थिति सभी स्नेही जनों के आशीर्वाद से अच्छी है। में उन लोगों धन्यवाद जिन्होंने मेरा साथ दिया आज मैं फेसबुक के सभी मित्र आज मुझे अपने परिवार के ही लगते हैं। मेरा अनुभव तो यही है इस सोशल मीडिया अंतर्जाल के सन्दर्भ में ……मैं तो सोशल मीडिया पर बने रिश्तों-अपने मित्रों से बहुत लाभान्वित हुआ हूँ, दुखी भी हुआ हूँ, दुःख भी साझा किया है और संघर्ष भी किया है साथ-साथ। सोशल मीडिया आम जन हेतु अभिशाप तो कतई नहीं है मेरी नजर में, यह समाज के हाथों में एक हथियार है जिसके उपयोग की प्रवृत्ति से यह निश्चित किया जा सकता है कि अमुक मामले में यह अभिशाप साबित हुआ और अमुक में वरदान। सोशल मीडिया रूपी यह धारदार हथियार समाज के हाथों में है और इसका गलत प्रयोग करने वाले व्यक्ति,समूह की प्रवृत्ति का दोष सोशल मीडिया के मंच पर ही थोपना उचित नहीं है।सोशल मीडिया पर लोग अपनी बात धड़ल्ले और बेबाकी से लिख रहे हैं। अख़बारों के पत्रकारों-सम्पादकों और चिंतकों से ज्यादा लोकप्रिय चेहरे सोशल मीडिया पर सुर्खियां और टिप्पणियां बटोर रहे हैं। आज कल तक अनजान रहे चेहरों की लेखन के पीछे बड़े-बड़े चिंतक, लेखक, पत्रकार दौड़ लगा रहे है,उस लिखत की भर्त्सना या प्रशंसा कर रहे हैं और यही तो सोशल मीडिया की असली ताकत है।


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