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Sunday, March 8, 2026
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आदिवासियों की तेजी से घट रही जनसंख्या पर बाबूलाल ने कहा-संथालपरगना में स्थिति अलार्मिंग…डेमोग्राफी में बड़ा परिवर्तन डेमोक्रेसी के लिए खतरा

सीएम को पत्र लिखकर घटती आबादी की जांच एसआईटी से कराने की मांग

आदिवासी आबादी घटेगी तो, चुनाव सहित सरकारी नौकरियों में भी आरक्षण पर खतरे की आशंका

रांची : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने शुक्रवार को एक बार फिर संथालपरगना की बदलती डेमोग्राफी पर राज्य सरकार को घेरा। श्री मरांडी मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा परिसर में मीडिया को संबोधित कर रहे थे। श्री मरांडी ने कहा कि पूरे प्रदेश में आदिवासियों की आबादी लगातार घट रही है। संथालपरगना क्षेत्र की डेमोग्राफी में तेज गति और अप्रत्याशित बदलाव आए हैं। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर घटती आबादी के कारणों की जांच एसआईटी गठित कर कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि डेमोग्राफी का यह परिवर्तन डेमोक्रेसी के लिए खतरा है, जो सबके लिए चिंता का विषय होना चाहिए. उन्होंने 1951और 2011की जनगणना रिपोर्ट के आधार पर प्रकाशित आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि झारखंड में वर्ष 1951 में आदिवासियों की आबादी 36%, सनातनी हिंदू 87.9% और मुस्लिम आबादी 8.9% थी। जबकि 2011में आदिवासी 26%,हो गए और मुस्लिम 14.5% और सनातनी 81.17% हो गए। यानी कि आदिवासी और सनातनी आबादी घटी और मुस्लिम आबादी बढ़ी।

चुनाव आयोग को ज्ञापन, जांच कराने की मांग

उन्होंने कहा कि 1951 में संथालपरगना में आदिवासियों की जनसंख्या 44.67%, मुस्लिम 9.44% और अन्य 45.9% थी, जबकि 2011 में आदिवासियों की जनसंख्या घटकर 28.11% हो गई और मुस्लिम आबादी बढ़कर 22.73% पहुंच गई। अन्य की आबादी बढ़कर 49.2%ही हुई। पिछले दिनों भाजपा द्वारा किए गए मतदाता सर्वे के आंकड़ों पर गौर  करेंगे तो संथालपरगना के 10 विधानसभा क्षेत्रों में 2019 से 2024 की मतदाता सूची में एक-एक बूथ पर 20 से लेकर 123% तक मतदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मामले में चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपा है और जांच कराने की मांग की है।


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