धनवार में बाबूलाल मरांडी तिकाने संघर्ष में घिर गए हैं…निरंजन राय ने भी चुनाव लड़ने का कर दिया है एलान…!
रांची : झारखंड भाजपा इन दिनों डैमेज कंट्रोल में जुटी हुई है. टिकट के आश्वासन के बावजूद बेटिकट हुए रवींद्र राय के कथित अंदरूनी आक्रोश को दबाने के मकसद से उन्हें झारखंड भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। कभी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे रवींद्र राय को विधानसभा चुनाव के दौरान कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के पीछे चुनावी गणित को बिखरने से बचाने की कवायद के सिवा और कुछ नहीं है. ऐसा भाजपा के विघ्नसंतोषी मानते हैं. कुछ दिनों पहले ऐसी खबर चल रही थी कि रवींद्र राय झामुमो में शामिल हो सकते हैं, लेकिन बाद में खुद रवींद्र राय ने इसका खंडन किया था। अभी हाल ही में रवींद्र राय को मनाने असम के मुख्यमंत्री हिमंता विस्वा सरमा उनके आवास पहुंचे थे।
निरंजन राय ने घनवार से चुनाव लड़ने का एलान करते हुए.
भितरघात की आशंका से घबरा उठे हैं बाबूलाल
दूसरी तरफ धनवार सीट से निरंजन राय के निर्दलीय चुनाव लड़ने की भनक लगते ही बाबूलाल मरांडी खेमे के बीच खलबली मच गई थी. सूत्र बताते हैं कि बाबूलाल मरांडी और रवींद राय के खास रहे निरंजन राय ने 25 अक्तूबर को जब चुनाव लड़ने का ऐलान किया तो, बाबूलाल गुट को लगा कि उनके खिलाफ भितरघात हो सकता है. इसलिए आनन-फानन में रवींद्र राय को कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया. अब देखना है कि निरंजन राय बदले हालात में चुनाव लड़ते हैं या फिर रवींद्र-बाबूलाल के कहने पर मान जाते हैं. चूंकि धनवार में बाबूलाल मरांडी की घेराबंदी के लिए इंडिया ब्लॉक ने फ्रैंडली मैच खेलने के नाम पर माले के अलावा झामुमो ने भी अपना प्रत्याशी खड़ा कर दिया है.
धनवार में बाबूलाल मरांडी तिकोने संघर्ष में फंस गए हैं. पिछले चुनाव का माहौल इस बार धनवार में नहीं है. जेवीएम से चुनाव लड़कर बाबूलाल विधानसभा पहुंचे थे. लेकिन इस बार वे भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े रहे हैं इसलिए एंटी भाजपा वोट छिटकने का डर उन्हें सता रहा है. वैसे माले के राजकुमार यादव को धनवार में मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है.
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