जेएमएम का दावा…भाजपा का 11 जिलों में खाता नहीं खुलेगा. जहां कड़ा संघर्ष की बात कही गई है, उनमें 23 में से कांग्रेस की 14 सीटें फंसी हुई हैं. कांग्रेस के प्रदर्शन से झामुमो खेमा असंतुष्ट नजर आया, इसके बावजूद सरकार बनाने का दावा
नारायण विश्वकर्मा
रांची : झारखंड विधानसभा चुनाव के परिणाम को लेकर एनडीए के पक्ष में जितने भी एक्जिट पोल जारी किये गए हैं, उसे इंडिया गठबंधन ने खारिज कर दिया है. वैसे भी एक्जिट पोल को लेकर विश्वसनीयता तेजी से घटी है.
लेकिन झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने तो अपना ही एक्जिट पोल जारी कर सनसनी फैलाने की कोशिश की है. इसलिए चुनाव परिणाम से पूर्व जेएमएम की ओर से जारी 59 सीटों की सूची की चर्चा अधिक हो रही है. झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्या ने 21 नवंबर को बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर सूची जारी की है.
हालांकि चुनाव परिणाम से पूर्व राजनीतिक दलों के नेताओं के भी अपने-अपने दावे-प्रतिदावे होते हैं. जिनसे एक्जिट वोट का मिलान नहीं हो पाता है. जेएमएम ने कुछेक में कड़ा संघर्ष बताते हुए इंडिया गठबंधन की सरकार बनाने का दावा ठोंक जरूर दिया है.
जेएमएम की ओर से जारी प्रेस रिलीज पर अगर गौर करें तो सरकार बनाने का दावा ठोकते हुए कहा गया है कि भाजपा का 11 जिलों में खाता नहीं खुलेगा. जहां कड़ा संघर्ष की बात कही गई है, उनमें 23 में से कांग्रेस की 14 सीटें फंसी हुई हैं.

जेएमएम की सूची में कांग्रेस कहीं कमजोर कड़ी तो नहीं…!
जेएमएम की इस सूची में कांग्रेस को कमजोर कड़ी माना जा रहा है. यानी चुनाव कैंपनिंग में जेएमएम ने अपना काम बखूबी निभा दिया है. लेकिन कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है.
शायद सुप्रियो कांग्रेस के खराब प्रदर्शन की ओर इशारा कर रहे हैं. इस सूची पर कांग्रेस की ओर से किसी भी तरह की प्रतिक्रिया नहीं आने से इस संदेह को और बल मिल रहा है. दरअसल, झामुमो के लिए यही चिंता का सबब बना हुआ है. कांग्रेसी खेमे में अजीब तरह का सन्नाटा है. कांग्रेसी कुछ भी कहने से बचते दिख रहे हैं.
अधिकतर सीटों पर क्लोज फाइट
दरअसल, 2019 के मुकाबले 2024 के विधानसभा चुनाव में अधिकतर सीटों पर क्लोज फाइट होने से हार-जीत का फासला बहुत कम होने की बात कही जा रही है. चुनाव के बाद इस बार झारखंड में ऐसे हालात बने हैं कि ज्योतिष भी अपनी भविष्यवाणी करने से शायद परहेज करें.
इसके बावजूद झारखंड में तमाम सोशल मीडिया के पत्रकार और विश्लेषक सही आकलन करने में लगे हुए हैं. वैसे किस एजेंसी या कि किस चैनल ने क्या कहा और किस नेताओं के बयान में किसकी सरकार बन रही है. सभी अपने-अपने हिसाब गुणा-भाग करने में मशगूल हैं.
इसपर हम गौर करें तो झारखंड विधानसभा की 81 विधानसभा सीटों पर सत्तापक्ष 59 पर तो विपक्ष 50 से अधिक सीटों पर अपनी जीत की दावेदारी कर रहा है. वहीं अधिकतर एक्जिट पोल में एनडीए को बढ़त बतायी जा रही है. कुछेक में इंडिया गठबंधन को दुबारा सत्तासीन होने का संकेत दे रहा है.
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और धनवार से प्रत्याशी बाबूलाल मरांडी ने तो झारखंड में भाजपा की सरकार का ऐलान करते हुए कह दिया है कि एनडीए 50 से अधिक सीट ला रहा है।
कांग्रेस को 20 से अधिक सीटें नहीं मिलनी चाहिए थी…!
इस संबंध में कुछेक झामुमो कार्यकर्ताओं ने बताया कि कांग्रेस की स्थिति को देखते हुए इस बार झामुमो को कम से कम 55 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए था. कांग्रेस को 20 से अधिक सीट नहीं देनी चाहिए थी. बताया गया कि कोल्हान में जगन्नाथपुर सीट पर झामुमो को अपना उम्मीदवार देना चाहिए था.
दरअसल, कांग्रेस प्रत्याशी सोनाराम सिंकू को पिछली बार कोड़ा दंपती ने अपनी परम्परागत जगन्नाथपुर सीट उन्हें उपहारस्वरूप भेंट की थी. इसलिए वे आराम से चुनाव जीत गए थे. लेकिन इस बार जगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र का माहौल बदला हुआ है. गीता कोड़ा यहां से भाजपा की प्रत्याशी बनी और वहीं सोना राम सिंकू कांग्रेस से लड़े हैं.
जगन्नाथपुर: झामुमो ने अपना प्रत्याशी नहीं देकर शायद भूल की…!
जानकार बताते हैं कि सोना राम सिंकू के लड़ने से गीता कोड़ा की जीत की राह आसान हो गई. अगर झामुमो यहां अपना प्रत्याशी देता तो परिणाम उनके पक्ष में आ सकता था. 2019 में सोनाराम सिंकू कांग्रेस के उम्मीदवार थे, जबकि मंगल सिंह बोबोंगा जेवीएम के टिकट पर लड़े और 20 हजार से अधिक वोट हासिल किया. इस बार वह निर्दलीय लड़े हैं.
कहा जा रहा है कि झामुमो अगर मंगल सिंह बोबोंगा या फिर जिला परिषद की लक्ष्मी सुरीन के नाम पर विचार करता तो, गीता कोड़ा की परेशानी बढ़ सकती थी. सोना राम सिंकू को मधु कोड़ा का वरदहस्त प्राप्त था. वहां के लोगों का कहना है कि गीता कोड़ा के मुकाबले में आने से वहां के मतदाता गीता कोड़ा को चुनने का मन बना लिया है.

अधिकतर उम्मीदवारों की हार-जीत कम वोटों के अंतर से होना तय
कोल्हान में इस बार भाजपा का प्रदर्शन बेहतर नहीं तो कमतर भी नहीं होगा. वैसे जानकार मानते हैं कि चंपई सोरेन अपने बलबूते बहुत ज्यादा कोल्हाल में इफेक्ट फैक्टर साबित नहीं हो जा रहे हैं. वे अपनी सीट बचा लें यही बहुत होगा. वैसे कोल्हान में गीता कोड़ा और चाईबासा सीट से दीपक बिरुआ को छोड़ बाकी सारे एनडीए या इंडिया गठबंधन के प्रत्याशियों की सीट फंसी हुई है. अधिकतर उम्मीदवारों की हार-जीत कम वोटों के अंतर से होना तय है.
बताया गया कि झामुमो के अंदरखाने में इस बात पर जोर दिया गया था कि कांग्रेस को 20 सीट पर रोका जाए. लेकिन ये मुमकिन नहीं हो सका. जानकार मानते हैं कि कांग्रेस को मुश्किल से 8 से 10 सीट पर जीत मिल सकती है. इसके कारण झामुमो बहुमत के आंकड़े से थोड़ी दूर नजर आ रहा है.
यह भी कहा जा रहा है कि अगर इंडिया गठबंधन 41 के आंकड़े से दूर होता है तो इसका ठीकरा कांग्रेस पर फोड़ा जाएगा. पर यही एनडीए के लिए फायदेमंद भी साबित हो सकता है. क्योंकि यही फैक्टर एनडीए को सरकार बनाने में मदद भी कर सकता है. अब झारखंड में कमजोर कांग्रेस किसके लिए मजबूत कड़ी बनकर उभर सकती है, यह चुनाव परिणाम के बाद पता चल पाएगा.
क्या वोटरों के पलड़े पर दोनों पक्ष हैं भारी…?
अब महज 20-22 घंटे के बाद झारखंड विधानसभा चुनाव के परिणाम आने शुरू हो जाएंगे. सुबह से जो रूझान मिलने लगेंगे, वह दोपहर तक परिणामों में तब्दील होने लगेंगे और शाम होते-होते यह पता चल जाएगा कि किसकी सरकार बनने की संभावना है.
वैसे एक्जिट पोल और झारखंड के सोशल मीडिया और अखबारों ने किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं दिया और त्रिशंकु विधानसभा की आशंका जतायी गई है. यानी झारखंड में खंंडित जनादेश के आसार हैंैं.
त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में एनडीए सरकार बनाने का हरसंभव प्रयास करेगी. वैसे इंडिया गठबंधन को अगर पूर्ण बहुमत मिल गया तो फिर कोई अड़चन नहीं रह जाएगी, बशर्ते एनडीए की ओर से कोई खेेेला न हो जाए. इसकी आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता. वैसे, मतदाताओं के पलड़े पर दोनों पक्ष भारी नजर आ रहे हैं.
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