संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर पर कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी क्रम में, झारखंड के कोडरमा में दलित शोषण मुक्ति मंच के बैनर तले जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने गृहमंत्री अमित शाह का पुतला फूंका और संविधान व बाबा साहेब के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए नारेबाजी की।
क्या था विवाद का कारण?
मंगलवार को संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान भारतीय संविधान के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में चर्चा हो रही थी। इस दौरान, गृहमंत्री अमित शाह ने टिप्पणी की:
“एक नया फैशन चल गया है, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर। अगर इतना नाम भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता।”
यह बयान संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर और उनके योगदान का अपमान करने वाला समझा गया। इसके बाद से देशभर में अंबेडकर समर्थक और विपक्षी दल सड़कों पर उतर आए हैं।
कोडरमा में प्रदर्शनकारियों का आक्रोश
1. गृहमंत्री का पुतला दहन
कोडरमा के अंबेडकर पार्क में दलित शोषण मुक्ति मंच के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ।
- प्रदर्शनकारियों ने गृहमंत्री अमित शाह का पुतला दहन किया।
- संविधान और डॉ. अंबेडकर के प्रति असम्मान को लेकर जमकर नारेबाजी की गई।
2. इस्तीफे और माफी की मांग
प्रदर्शनकारियों ने गृहमंत्री के इस्तीफे और सार्वजनिक माफी की मांग की। उनका कहना था कि यह टिप्पणी न केवल संविधान का अपमान है, बल्कि बाबा साहेब के विचारों और उनके संघर्ष को भी कमतर आंकने की कोशिश है।
प्रमुख प्रदर्शनकारी और उनके विचार
1. अर्जुन पासवान
अर्जुन पासवान ने कहा:
“डॉ. अंबेडकर का योगदान हर भारतीय के लिए अमूल्य है। उनके प्रति अपमानजनक शब्दों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
2. सिकंदर अम्बेडकर
सिकंदर अम्बेडकर ने गृहमंत्री को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह बयान दलित समाज को अपमानित करने की कोशिश है। उन्होंने कहा:
“ऐसी टिप्पणियां संविधान की आत्मा पर चोट करती हैं। सरकार को माफी मांगनी चाहिए।”
3. महिला प्रदर्शनकारियों की भूमिका
प्रदर्शन में कई महिलाएं भी शामिल हुईं, जैसे काजल पासवान और आंचल पासवान, जिन्होंने गृहमंत्री की टिप्पणी को महिलाओं और बच्चों तक अंबेडकरवादी विचारों की पहुंच में बाधा बताया।
देशभर में प्रदर्शन और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
1. विपक्षी दलों का विरोध
- कांग्रेस, बीएसपी, और अन्य विपक्षी दलों ने गृहमंत्री के बयान की आलोचना की।
- उन्होंने इसे संविधान और लोकतंत्र के प्रति असम्मानजनक बताया।
2. सामाजिक संगठनों की सक्रियता
देशभर में अंबेडकरवादी संगठनों ने प्रदर्शन आयोजित किए। उन्होंने गृहमंत्री से माफी मांगने और भविष्य में ऐसे बयानों से बचने की मांग की।
गृहमंत्री के बयान का असर और आगे की राह
1. संवैधानिक मूल्यों की सुरक्षा
डॉ. अंबेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि समानता और न्याय के प्रतीक हैं।
- उनकी विरासत पर इस प्रकार की टिप्पणियां समाज में असंतोष और विभाजन पैदा कर सकती हैं।
- सरकार को चाहिए कि वह संवेदनशील मुद्दों पर सावधानीपूर्वक बयानबाजी करे।
2. न्यायिक हस्तक्षेप की मांग
कुछ संगठनों ने इस मामले में न्यायालय से हस्तक्षेप की भी मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह की टिप्पणियों को कानूनी दायरे में लाकर रोका जाना चाहिए।
अंबेडकरवादी विचारों की सुरक्षा जरूरी
डॉ. अंबेडकर के प्रति सम्मान केवल दलित समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि वे भारत के हर नागरिक के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
- गृहमंत्री की टिप्पणी ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में गहरी नाराजगी पैदा की है।
- यह समय है कि सरकार और राजनीतिक नेता संविधान और इसके निर्माताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाएं।न्यूज़ Praveen Kumar
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