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Sunday, March 8, 2026
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होली 14 को नहीं, 15 मार्च यानी शनिवार को: फिर जुमे की नमाज बनाम होली पर बखेड़ा क्यों? 

रांची : उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में वाराणसी से प्रकाशित अति प्राचीन “काशी-विश्वनाथ पंचांग” तथा बिहार के “मिथिला पंचांग” में स्पष्ट है कि होलिका दहन 13 मार्च को होगा और होली 15 मार्च को खेली जाएगी। 14 मार्च को होली इसलिए नहीं खेली जाएगी क्योंकि इस दिन पूर्णिमा तिथि रहेगी। होली चैत्र प्रतिपदा यानी चैत मास के पहले दिन खेलना ही शास्त्र सम्मत है।

बिहार-झारखंड में होली 15 मार्च को

बिहार और झारखंड में पहले 14 मार्च को होली की छुट्टी घोषित थी। धर्माचार्यो द्वारा ध्यान दिलाने के बाद दोनों राज्यों में अब 15 मार्च को होली की छुट्टी घोषित कर दी गई है। सरकारी आदेशानुसार दोनों राज्यों के बैंकों में भी 15 मार्च को छुट्टी रहेगी।

यूपी में 15 की जगह 14 मार्च के दिन होली क्यों ?

बड़े आश्चर्य की बात है कि वाराणसी से प्रकाशित जिस काशी-विश्वनाथ पंचांग के मुताबिक उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में पर्व-त्योहार, विवाह, जनेऊ, मुंडन जैसे तमाम हिंदू धार्मिक कर्मकांड किए जाते हैं, उसकी अवहेलना कर उत्तर प्रदेश में 15 मार्च की जगह 14 मार्च यानी जुमा के दिन होली क्यों मनाई जाएगी ? क्या ऐसा जानबूझ कर भाजपा के प्रिय राजनीतिक एजेंडे “हिंदू-मुसलमान” को चिंगारी देने की साज़िश के तहत हो रहा है ?

क्या काशी-विश्वनाथ पंचांग हिंदू विरोधी है?

सवाल उठना लाजिमी है कि क्या काशी-विश्वनाथ पंचांग हिंदू विरोधी है। क्या इस पंचांग के मुताबिक 15 मार्च को होली की तिथि को शास्त्र सम्मत मानने वाले बिहार और झारखंड मुस्लिम राज्य हैं ? इससे पता चलता है कि मुसलमानों के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश के तहत साम्पदायिकता की चिंगारी को सुलगाने का प्रयास किया जा रहा है.

क्या यूपी के सीएम नहीं पता कि जब होली शनिवार को मनाई जाएगी तो फिर शुक्रवार को जुमे की नमाज अदा करने में किसी को भी एतराज नहीं होना चाहिए. क्या वाराणसी के सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गेरुआ वस्त्र धारण करने वाले मुख्यमंत्री योगी का उत्तर प्रदेश ही असली हिंदू राज्य है ?

(सौजन्य : अशोक वर्मा के फेसबुक वाल से)


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