हरिगोविंद विश्वकर्मा
ज्ञानेश बाबू, थैंक यू! हे स्त्री-निजता और स्त्री-अस्मिता के रक्षक, देश की सारी स्त्रियां आपकी क़र्ज़दार हो गई हैं। रक्षाबंधन बीत गया, वरना स्त्रियां आपको राखी बांधतीं। ख़ैर, यह हसरत स्त्रियां अगले साल पूरा करेंगी। सच, आप कृष्ण स्वरूप हैं। कृष्ण ने द्रौपदी की लाज रखी थी। आप कलियुग में स्त्री की लाज रख रहे हैं। आपको द्वापर युग में भी होना चाहिए था। तब दुर्योधन-दुशासन द्रौपदी की अस्मिता की ओर देखने का दुस्साहस न करते। महाभारत युद्ध भी न होता। ख़ैर अब आप हैं, तो भारतीय स्त्रियां महफ़ूज़ हैं। कोई तो आया सामने स्त्री की निजता, स्त्री की अस्मिता की रक्षा करने। ईश्वर आपको लंबी उम्र दे। हम स्त्रियां सरकार से आग्रह करेंगी कि आपको हमेशा के लिए इस पद आसीन करे दे। नो रिटायरमेंट…!
इस देश का विपक्ष महिला-विरोधी है। महिलाएं समाज का अभिन्न अंग हैं। इस लिहाज़ से विपक्ष समाज-विरोधी भी हुआ। वह मतदान के फुटेज मांग रहा है। बताइए, कोई मतदान का फुटेज मांगता है क्या… नहीं न, लेकिन विपक्ष फुटेज मांग रहा है। मुझे लगता है, विपक्ष इतना ग़ैर-ज़िम्मेदार कभी नहीं रहा, जितना पिछले 10-11 साल से है। मतदान के फुटेज विपक्ष पब्लिक करना चाहता है। स्त्रियों का चेहरा दुनिया को दिखाना चाहता है। स्त्री की निजता-अस्मिता को दुनिया के सामने लाना चाहता है। पर आपने विपक्ष के इस स्त्री-विरोधी मंसूबे को कामयाब नहीं होने दिया। इसलिए आप धन्यवाद के पात्र हैं ज्ञानेश बाबू।
मेरे पति महोदय मेरी निजता की बिल्कुल भी परवाह नहीं करते। हर साल बर्थडे के दिन मेरी फोटो सोशल मीडिया पर डाल देते हैं। मुझे सीधे विश नहीं करते, बल्कि मेरी फोटो सोशल मीडिया पर डाल कर जनता के सामने बर्थडे विश कर हैं। एक बार तो उन्होंने मेरी बीपी रिपोर्ट ही सोशल मीडिया पर डाल दी थी। लिखा था, ‘देखो मेरी बीवी कितना टेंशन लेती है।’
मेरे पति को मेरी निजता-अस्मिता की बिल्कुल भी फ़िक्र नहीं है। ज्ञानेश बाबू, मेरा एक निजी कार्य करेंगे। प्लीज़, मेरे पति से हलफ़नामा ले लीजिए। उनको आदेश दीजिए कि वे देश से, स्त्री समाज से और मुझसे माफ़ी माँगे। वादा करें कि भविष्य में मेरी निजता और अस्मिता को पब्लिक नहीं करेंगे।
लोकसभा में स्त्रियों को भाषण देते समय सीधा प्रसारण बंद करवा दें…!
ज्ञानेश बाबू, मेरे मायके वाले, मेरे रिश्तेदार, पड़ोसी और समाज के लोग भी आए दिन मेरी फोटो पब्लिक करते रहते हैं। संसद में भी स्त्री की फोटो टीवी पर दिखा देते हैं। लोकसभा में स्त्रियों को भाषण देते समय सीधा प्रसारण किया जाता है। स्त्री सभापति होती है तो भी कैमरा बराबर उन पर ही रहता है। स्त्री की निजता भंग करता रहा है।
आप पत्र भेजिए न, स्त्री पीठासीन सभापतियों के लिए… लिखिए, स्पीकर महोदया को कैमरे में दिखाने से देश की ‘नारी गरिमा’ ख़तरे में पड़ती है। आगे से संसद टीवी पर सिर्फ़ पंखा और खिड़कियां दिखाई जाएं। वैसे स्त्रियां अब निश्चिंत हो गई हैं।
अब हमें चिंता नहीं है। आप इस पर भी ध्यान देंगे और संसद की कार्यवाही का सीधा प्रसारण बंद करवा देंगे। उसे एडिट करके उसमें से स्त्रियों की फुटेज निकाल कर उसका प्रसारण करवाएंगे। इससे महिला सांसदों की निजता और अस्मिता की रक्षा हो सकेगी। महिला सांसदों की ओर से आपको धन्यवाद!
शुक्र है आप शेषन जैसे ग़ैर-ज़िम्मेदार नहीं हैं!
आपने विपक्ष को फुटेज देने से इनकार कर दिया। बहुत अच्छा किया। अगर आपकी जगह दूसरा कोई होता तो फुटेज तुरंत दे देता। टीएन शेषन होते तो बिल्कुल उल्टा कर देते। फुटेज को पब्लिक डोमेन में डलवा देते। वह भारतीय संस्कृति के विरोधी थे। उनका बस चलता तो चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी कर देते। हर जगह कैमरा लगवा देते और सीधा प्रसारण करवा देते। वह कह देते, ‘लोगों को सब सच दिखाओ, वरना लोकतंत्र अंधा हो जाएगा।’
आप… आप शेषन जैसे ग़ैर-ज़िम्मेदार नहीं हैं। सो लोकतंत्र की आंख पर पट्टी बाँधे रहना चाहते हैं। यह कार्य भारतीय संस्कृति का असली रक्षक ही कर सकता है।
ऐसा आप जैसा व्यक्ति ही कर सकता है। आप वाक़ई बहुत ज़िम्मेदार और ईमानदार हैं। जो अफ़सर अब होम मिनिस्ट्री में काम कर लेता है। वह बहुत ज़िम्मेदार और ईमानदार हो जाता है। ऐसे ज़िम्मेदार और ईमानदार अफ़सर को स्त्री समाज की ओर से सैल्यूट।
चुनाव के समय स्त्री मतदाताओं के लिए ऐसी व्यवस्था करें ताकि घर से निकलने के बाद कोई उसे देख न पाए…!
इस देश के पुरुष बड़े बदमाश हैं। उनकी नज़र स्त्री मतदाता पर रहती है। स्त्री जब मतदान करने के लिए घर से बाहर निकलती है, तो घूरने लगते हैं। अब तो लोग मतदान के लिए जाती हुई स्त्री की तस्वीर ले लेते हैं। उसका वीडियो बनाने लगते हैं। उसकी निजता को पब्लिक कर देते हैं। ज्ञानेश जी, अब आप चुनाव के समय स्त्री मतदाताओं के लिए विशेष व्यवस्था कीजिए। ताकि घर से निकलने के बाद कोई उसे देख न पाए। उसकी निजता को पब्लिक न करने पाए।
स्त्री मतदाता की गतिविधियों को केवल निर्वाचन आयोग के कैमरा ही कैप्चर कर पाएं। हम स्त्रियों को इलेक्शन कमीशन पर पूरा भरोसा है। आज की तारीख़ में ज्ञानेश बाबू, केवल आप ही स्त्री की निजता और अस्मिता के रक्षक हैं। इसलिए आपको धन्यवाद।
मीडिया वाले को भी महिलाओं का फुटेज टीवी पर दिखाने से रोकवा दें…!
मैं ख़ुद एक भारतीय स्त्री हूं। बहुत परेशानी थी। मेरी निजता पब्लिक हो रही थी। जब भी मतदान करने जाती थी तो, मीडिया वाले भी आ जाते थे। मेरी फुटेज टीवी पर चला देते थे। मेरी निजता को पब्लिक कर देते थे। इससे समाज की ‘स्त्री को परदे में रखने की प्रथा’ का उल्लंघन हो रहा था।
आप स्त्री की निजता के ही नहीं, बल्कि भारतीय प्रथा और रीति-रिवाज़ के संरक्षक के रूप में भी सामने आए हैं। देश को आज़ाद हुए 79 साल बीत गए, लेकिन किसी ने ऐसी हिम्मत नहीं दिखाई। स्त्री की निजता और अस्मिता की परवाह किसी को नहीं थी। लेकिन स्त्री की निजता और अस्मिता की परवाह की। इसके लिए आपको कोटिशः धन्यवाद!
‘डायलॉगबाज़ी में ज्ञानेश बाबू आप नेताओं को भी पीछे छोड़ सकते हैं…!’
अंत में एक और बात। आप ज़िम्मेदार और ईमानदार होने के साथ साथ बहुत सीधे हैं। कुछ ज़्यादा ही शांतिप्रिय हैं। देखिए न विपक्ष आपको ‘वोटचोर’ कह रहा है। और आप क्षमा करने के मूड में हैं। आप अच्छा कर रहे हैं। विपक्ष छोटा है, आप बड़े। तो ‘क्षमा बड़न को चाहिए’ की पॉलिसी पर चल रहे हैं।
सच्चे गांधीवादी हैं आप। सौ साल पहले आप पब्लिक लाइफ़ में आए होते तो गांधी के स्थान पर आप ही होते। एक बात और आप में संभावना दिख रही है। डायलॉगबाज़ी में आपमें बड़ी संभावनाएँ हैं। आप नेताओं को पीछे छोड़ सकते हैं। सफल नेता बन सकते हैं। आपने कहा न, ‘मैं देश के हर मतदाता के पीछे चट्टान की तरह खड़ा हूँ।’ यह डायलॉग स्त्रियों को बहुत पसंद आया। सो आपको पुनः बधाई। और हाँ, हम स्त्रियों की निजता और अस्मिता की रक्षा के लिए चट्टान की तरह खड़े रहने के लिए आपको साधुवाद भी!
आपकी अहसानमंद
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