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Wednesday, November 4, 2026
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सन् 1931 से जुड़ी पूजा परंपरा, मां भवानी-मां दुर्गा की आराधना और शहर की सामुदायिक आस्था का इतिहास

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय स्थित गुमला शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान में श्री बड़ा दुर्गा मंदिर का अपना विशिष्ट स्थान है। यहां मां शेरावाली – मां दुर्गा की आराधना केवल नवरात्र और दशहरा का धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही ऐतिहासिक आस्था, विश्वास, सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। हर वर्ष शारदीय नवरात्र के आगमन के साथ ही श्री बड़ा दुर्गा मंदिर और आसपास का पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से गूंजेमन हो उठता है। पूरे जिले से श्रद्धालु मां भवानी के दर्शन, पूजा-अर्चना और आशीर्वाद के लिए पहुंचते हैं।

बड़ा दुर्गा मंदिर का इतिहास गुमला शहर में माँ दुर्गा पूजा ( त्योहार ) के विकास की कहानी से जुड़ा है। स्थानीय बड़ा बुजुर्गों के अनुसार, गुमला में दुर्गा पूजा की सार्वजनिक परंपरा का पहला महत्वपूर्ण पड़ाव सन् 1921 में बंगाली समुदाय की ओर से शुरू हुई पूजा थी। इसके लगभग दस वर्ष बाद,सन् 1931 में अधिवक्ता टोहन प्रसाद के नेतृत्व में स्थानीय सनातनी हिंदू समाज ने श्री बड़ा दुर्गा मंदिर में मां दुर्गा की भाव्य और आकर्षक प्रतिमा स्थापित कर भक्ति भाव से पूजा अर्चना शुरू की। इस प्रकार श्रीबड़ा दुर्गा मंदिर गुमला की सार्वजनिक मां सती और शक्ति की स्थापना कर माँ दुर्गा पूजा ( त्योहार ) के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन गया।

इतिहास की पृष्ठभूमि : तब गुमला आज जैसा शहर नहीं था

बीसवीं सदी के शुरुआती दशकों में गुमला आज की तरह विकसित शहरी केंद्र भी नहीं था। यहां की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे आकार ले रही थीं। इसी दौर में अलग-अलग समुदायों की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं ने शहर के सार्वजनिक जीवन को समृद्ध करना शुरू किया।

दैनिक हिन्दुस्तान की 9 सितंबर सन् 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, गुमला में सन् 1921 में बंगाली समुदाय ने दुर्गा पूजा की शुरुआत की थी। यह आयोजन जशपुर रोड स्थित दुर्गाबाड़ी में होता हैं। इसके बाद सन् 1931 में अधिवक्ता टोहन प्रसाद के नेतृत्व में स्थानीय हिंदू धर्मावलंबियों ने श्री बड़ा दुर्गा मंदिर में पूजा अर्चना शुरू की। टाइम्स ऑफ इंडिया की सन् 2012 की रिपोर्ट भी दुर्गाबाड़ी की सन् 1921 की परंपरा और बड़ा दुर्गा मंदिर की सन् 1931 में शुरू हुई पूजा का अलग-अलग उल्लेख करती है

सन् 1931 : बड़ा दुर्गा मंदिर की पूजा परंपरा का महत्वपूर्ण पड़ाव

यह शुरुआत उस समय के सामाजिक परिवेश में महत्वपूर्ण थी। उक्त पूजा के आयोजन ने गुमला जिले के लोगों को एक साझा धार्मिक मंच दिया, जहां सामूहिक भागीदारी के माध्यम से परंपरा को आगे बढ़ाया जा सके। समय के साथ श्री बड़ा दुर्गा मंदिर की पूजा अर्चना स्थानीय धार्मिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनती गई।
हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से श्री बड़ा दुर्गा मंदिर के पहले भवन की निर्माण-तिथि, मूल वास्तुशैली, शुरुआती स्थापित मूर्ति के स्वरूप और स्थापना के समय हुए खर्च का पूरा विवरण प्रमाणित नहीं होता। इसलिए इन विषयों पर निश्चित दावा करने के बजाय श्री बड़ा दुर्गा मंदिर समिति के अभिलेखों और पुराने स्थानीय दस्तावेजों से जानकारी जुटाना आवश्यक है।

मां दुर्गा की आराधना और शारदीय नवरात्र

श्री बड़ा दुर्गा मंदिर की पहचान मां दुर्गा की पूजा से है। शारदीय नवरात्र इस परंपरा का सबसे प्रमुख समय होता है। नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं के लिए मां दुर्गा की आराधना और पूजा अर्चना विशेष महत्व रखती है। पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान और दशहरा से जुड़ी गतिविधियां पूरे क्षेत्र का वातावरण को भक्तिमय बना देती हैं।

दुर्गा पूजा का धार्मिक आधार महिषासुर पर देवी दुर्गा की विजय की कथा से जुड़ा है। यह कथा बुराई पर अच्छाई, अन्याय पर न्याय और अहंकार पर धर्म की विजय का प्रतीक मानी जाती है। श्रद्धालुओं के लिए मां दुर्गा शक्ति, साहस और संरक्षण की प्रतीक हैं।

श्री बड़ा दुर्गा मंदिर में पूजा की वर्तमान विधि, प्रतिदिन के अनुष्ठान, पुरोहितों की परंपरा और विसर्जन की व्यवस्था का विस्तृत प्रमाणित विवरण सार्वजनिक स्रोतों में उपलब्ध नहीं है। इनका सटीक उल्लेख करने के लिए मंदिर समिति या पुराने पुजारी से पुष्टि की जानी चाहिए।

सन् 1921 और सन् 1931 : गुमला की दुर्गा पूजा के दो अलग ऐतिहासिक पड़ाव

गुमला में दुर्गा पूजा के इतिहास को समझने के लिए इन दोनों वर्षों का अंतर स्पष्ट रखना जरूरी है।

सन् 1921 — दुर्गाबाड़ी की शुरुआत: बंगाली समुदाय ने गुमला में सार्वजनिक दुर्गा पूजा की परंपरा शुरू की। शुरुआती दुर्गाबाड़ी का भवन साधारण था। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आरंभिक आयोजन में बंगाली समुदाय के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पूजा के लिए पुरोहित तथा मूर्तिकार कोलकाता से बुलाए जाते थे।

सन् 1931 — बड़ा दुर्गा मंदिर की शुरुआत: इसके बाद स्थानीय हिंदू समाज ने अधिवक्ता टोहन प्रसाद के नेतृत्व में श्री बड़ा दुर्गा मंदिर में पूजा अर्चना शुरू की।

ये दोनों घटनाएं गुमला में सार्वजनिक दुर्गा पूजा के विस्तार को दर्शाती हैं। इन्हें एक ही मंदिर की स्थापना की तारीख मानना ऐतिहासिक रूप से उचित नहीं होगा।

*मंदिर का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व*

मंदिर की महत्ता केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है। धार्मिक आयोजन लोगों को एक साथ आने, परंपराओं को साझा करने और सामुदायिक संबंध मजबूत करने का अवसर भी देते हैं।

गुमला में दुर्गा पूजा की परंपरा समय के साथ कई पूजा समितियों और सार्वजनिक आयोजनों तक विस्तृत हुई , 2024 की हिन्दुस्तान रिपोर्ट में शहर में 12 स्थानों पर दुर्गा पूजा आयोजित होने का उल्लेख था। यह आंकड़ा उस समय की रिपोर्ट से संबंधित है; इसे वर्तमान वर्ष की निश्चित संख्या नहीं माना जाना चाहिए।

श्री बड़ा दुर्गा मंदिर इस व्यापक धार्मिक परिदृश्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां की पूजा परंपरा गुमला के शहरी इतिहास, स्थानीय समाज की धार्मिक भागीदारी और सामूहिक आयोजन की संस्कृति को समझने में मदद करती है।

*इतिहास के वे पन्ने, जिन पर अभी शोध बाकी है*

*बड़ा दुर्गा मंदिर की ऐतिहासिक रिपोर्ट को और अधिक प्रामाणिक बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर अभी जुटाए जाने चाहिए*

सन् – 1931 में पूजा शुरू कराने वाले अधिवक्ता टोहन प्रसाद और अन्य सहयोगियों का विस्तृत परिचय क्या था?
– शुरुआती पूजा किस स्थान या भवन में आयोजित की गई थी?
– मंदिर का स्थायी भवन कब बनाया गया और समय के साथ उसमें क्या बदलाव हुए?
– शुरुआती वर्षों में मूर्ति निर्माण, पूजा सामग्री और आयोजन की व्यवस्था कैसे होती थी?
– मंदिर समिति के पास पुराने रजिस्टर, तस्वीरें, रसीदें, निमंत्रण-पत्र या अन्य ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं,,,,,??

इन सवालों के उत्तर मंदिर समिति, स्थानीय बड़े बुजुर्गों, पुराने परिवारों और समाचार पत्रों के अभिलेखों से मिल सकते हैं। इससे मंदिर के इतिहास को केवल प्रचलित जानकारी तक सीमित रखने के बजाय दस्तावेजों के आधार पर और समृद्ध किया जा सकेगा।आस्था से जुड़ा शहर का ऐतिहासिक अध्याय

श्री बड़ा दुर्गा मंदिर गुमला की धार्मिक विरासत का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इसकी पूजा परंपरा सन् 1931 से जुड़ी बताई जाती है, जबकि शहर में सार्वजनिक श्री बडा दुर्गा पूजा का इतिहास सन् 1921 की दुर्गाबाड़ी परंपरा से आगे बढ़ता है।

इन दोनों पड़ावों के बीच गुमला के सामाजिक जीवन में धार्मिक आयोजनों के विस्तार की कहानी छिपी है। समय बदला, शहर विकसित हुआ और पूजा के स्वरूप में बदलाव आए, लेकिन श्री बड़ा दुर्गा मंदिर को बड़ा मंदिर के रूप में ही सम्मानित किया जाता है और मान सम्मान देते हुए श्री बड़ा दुर्गा मंदिर को एक अलग दर्जा प्राप्त है, फलस्वरुप श्री बडा दुर्गा मंदिर के नेतृत्व में ही विसर्जन निकाला जाता है, अतः श्री बड़ा दुर्गा मंदिर में मां दुर्गा की आराधना और पूजा अर्चना आज भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का आधार बनी हुई है।

श्री बड़ा दुर्गा मंदिर का इतिहास केवल एक मंदिर में पूजा शुरू होने की तारीख नहीं है; यह उस शहर की कहानी है, जहां सामूहिक विश्वास ने धार्मिक परंपरा को सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बनाया।

राम भक्तों के लिए

पुलिस का बुनियादी मजहब है हवा का रुख देखकर लाठी भांजना,फर्क सिर्फ इतना होता है कि वक्त के साथ लट्ठ सहने वाली पीठें बदल जाती हैं…!

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शम्भुनाथ चौधरी

(वरिष्ठ पत्रकार)

इतिहास के पन्ने पलटकर देख लीजिए। कालखंड कोई भी रहा हो, सत्ता कभी सीधे सवालों का सामना करने की हिम्मत नहीं जुटा पाती। जब भी किसी ने व्यवस्था के ढर्रे पर उंगली उठाई या आईना दिखाने की जुर्रत की, उसे ‘अराजक’ और ‘देशद्रोही’ की सनद अता करने में जरा भी देर नहीं लगाई गई। यह रवायत त्रेता से चली आ रही है और कलियुग में भी बदस्तूर जारी है और आगे भी जारी रहेगी.

समय अपनी चाल चलता रहता है। तारीखें बदलती हैं, हुकूमतों के नाम और झंडे बदलते हैं, मगर सत्ता का मूल चरित्र हर दौर में एक जैसा कायम रहता है। कुर्सी का पहला और सबसे पुराना गुण यही है कि वह उस पर काबिज शख्स को ‘अमर होने’ की गफलत में मुब्तला कर देती है।

खाकी का लाठी-धर्म तो वही रहेगा !

पुलिस वह बिरादरी है, जिसकी सत्ता के प्रति वफादारी हर दौर में बेमिसाल रही है। यह संस्था बनाई तो जाती है आम जनता की हिफाजत के लिए, लेकिन ताउम्र इसे सत्ता की ढाल बनकर लट्ठ बजाने की मजदूरी करनी पड़ती है।

पुलिस का बुनियादी मजहब ही है-हवा का रुख देखकर लाठी भांजना। फर्क सिर्फ इतना होता है कि वक्त के साथ लट्ठ सहने वाली पीठें बदल जाती हैं। आज जो पीठें लाठियां खाकर क्रांति का राग अलाप रही हैं, कल जब वे खुद कुर्सी पर तशरीफ फरमा होंगी, तो अपनी ही पुलिस से दूसरों की पीठों पर लट्ठ बजवाने में जरा भी संकोच नहीं करेंगी। आखिरकार, खाकी का लाठी-धर्म तो वही रहेगा!

जमीन पर रेंगकर कलमघसीटों ने अपनी वफादारी साबित की है

रही बात पत्रकारिता की, तो इस जमात का एक बड़ा धड़ा हर दौर में राजदरबार का चारण ही रहा है। ‘गोदी मीडिया’ तो इस नए दौर का आधुनिक नामकरण भर है, वरना रीढ़विहीन और साष्टांग दंडवत करने वाले प्राणी हर हुकूमत में बहुतायत में पाए गए हैं। जब-जब आका ने थोड़ा सा झुकने का इशारा किया, हमारे वीर कलमघसीटों ने बाकायदा जमीन पर रेंगकर अपनी वफादारी साबित की।

अलबत्ता, कुछ बेवकूफ किस्म के पत्रकार हर दौर में सिर पर कफन बांधकर सच बोलने की जिद पर अड़े रहते हैं। ऐसे सिरफिरे पहले भी उंगलियों पर गिने जा सकते थे और आज भी दुर्लभ प्रजाति में ही आते हैं।

25 जून 1975 की इमरजेंसी वाली तारीख को जो लोग आज ‘काला दिवस’ बताकर मातम मनाते हैं, उनके पुरखों के माथे पर भी उस वक्त के हुकूमत ने ‘अराजकतावादी’ का ठप्पा चिपकाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

हर दौर का शासक अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को अराजकता ही मानता है। आज के आंदोलनकारी अगर मौका पाकर कल कुर्सीनशीं हो जाएं, तो आज की किसी तारीख को इतिहास का काला अध्याय घोषित कर रहे होंगे।

सत्ताधारियों से भी ज्यादा मनोरंजक चरित्र इन ‘आंदोलनकारियों’ का होता है। क्रांति का झंडा उठाने वाले ज्यादातर सूरमा आगे चलकर शुद्ध अवसरवादी निकल जाते हैं। कुर्सी हाथ में आते ही सारे आदर्श कपूर की तरह उड़ जाते हैं। बेचारी तो वह भोली-भाली भीड़ है, जो इस उम्मीद में नारे लगाते-लगाते अपनी छाती फाड़ लेती है कि शायद उनके ‘अच्छे दिन’ आएंगे। उनके अच्छे दिन कभी नहीं आते।

हां, कुछ ‘समझदार’ लोग जरूर होते हैं जो ‘जब जैसा, तब तैसा’ का सुर साधना जानते हैं। यह गिरगिट-छाप प्रजाति हर दौर में, हर हुकूमत के तहत मलाई खाती है और सुखी रहती है।

हर हुक्मरान यही गलतफहमी पाल बैठता है कि वह इस धरा पर अमर होने आया है। मुगलिया दौर में एक दिन के लिए नवाब बने भिश्ती ने भी चमड़े का सिक्का चलाकर अमर हो जाने का गुमान पाला था। उस सिक्के का वजूद नहीं रहा, लेकिन इतिहास में उसका किस्सा बाकी रह गया।

 

राम भक्तों के लिए

तकनीकी विभागों की जिला स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न – निर्माण और मरम्मत कार्यों में तेजी लाने के सख्त निर्देश

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय स्थित समाहरणालय के सभागार में उपायुक्त दिलेश्वर महतो की अध्यक्षता में जिले के तमाम तकनीकी विभागों के साथ समीक्षात्मक बैठक संपन्न हुई। बैठक में उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, ग्रामीण कार्य विभाग, भवन प्रमंडल, लघु सिंचाई, जलपथ, पथ प्रमंडल, विद्युत आपूर्ति प्रमंडल तथा जिला परिषद सहित विभिन्न कार्यपालक एवं तकनीकी अभियंताओं की उपस्थिति रही।
बैठक के दौरान उपायुक्त ने जिले में चल रही विभिन्न विकास एवं निर्माण योजनाओं की बिंदुवार प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि चूंकि मानसून अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है, इसलिए मौसम की अनुकूलता को देखते हुए रुके हुए सभी निर्माण कार्यों को तत्काल गति प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आगामी त्योहारों के मद्देनजर आम जनमानस की सुविधा और सुगम यातायात सुनिश्चित करने के लिए उपायुक्त ने घाघरा रोड सहित जिले की अन्य सड़कों पर बने सभी गड्ढों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल भरने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने डीएसपी रोड के किनारे नाली निर्माण कार्य में आ रही अड़चनों को दूर करते हुए निविदा प्रक्रिया को शीघ्र अंतिम रूप देने को कहा, ताकि जलजमाव की समस्या से नागरिकों को निजात मिल सके।
प्रशासनिक स्तर पर कर्मचारियों के आवासीय भवनों की स्थिति पर संज्ञान लेते हुए उपायुक्त ने भवन प्रमंडल को निर्देश दिया कि जिन सरकारी भवनों में कर्मचारी निवास करते हैं, उनके जीर्णोद्धार और सुदृढ़ीकरण के लिए अविलंब विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन ( डीपीआर ) तैयार किया जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को दुरुस्त करने के क्रम में ग्रामीण कार्य विभाग को क्षतिग्रस्त व टूटे हुए पुल-पुलियों का स्थलीय निरीक्षण कर उनके त्वरित पुनर्निर्माण एवं मरम्मत का आदेश दिया गया। वहीं जल संरक्षण एवं सिंचाई सुविधाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जलाशय वाटर वेज की स्थिति की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने कतरी जलाशय के पानी को सुचारू रूप से अंतिम छोर तक पहुंचाने, जलाशय की आवश्यक मरम्मत कराने और उसकी समुचित सफाई के लिए त्वरित प्रभाव से डीपीआर तैयार करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया।
उपायुक्त ने सभी अभियंताओं को संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि जनहित की योजनाओं की गुणवत्ता और तय समय-सीमा पर विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि आम लोगों को विकास योजनाओं का सीधा और त्वरित लाभ मिल सके।

राम भक्तों के लिए

कांग्रेस की चुप्पी के खिलाफ भाजपा महिला मोर्चा का हुंकार, कांग्रेस कार्यालय का किया घेराव

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

जेएनयू प्रकरण में प्रो. बिमोल अकोइजम पर लगाए यौन उत्पीड़न के आरोपों के संबंध मे अपनी आपत्ति दर्ज कराने के उदेश्य से गुमला में निकाला पैदल मार्च, कांग्रेस के खिलाफ की नारेबाजी

गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय में – जेएनयू प्रकरण को लेकर कांग्रेस की चुप्पी के विरोध में सोमवार को भाजपा महिला मोर्चा ने गुमला में नारी शक्ति हुंकार आंदोलन के तहत कांग्रेस कार्यालय का घेराव किया। भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष गौरी किंडो के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में भाजपा के विभिन्न स्तरों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मामले में अपना विरोध दर्ज कराया।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ता एवं पार्टी के अन्य पदाधिकारी बड़ाइक मुहल्ला चौक के समीप एकत्र हुए। यहां से सभी पैदल मार्च करते हुए कांग्रेस कार्यालय पहुंचे। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने भारतीय जनता पार्टी जिंदाबाद, नरेंद्र मोदी जिंदाबाद और राहुल गांधी मुर्दाबाद के नारे लगाए। इसके बाद कांग्रेस कार्यालय का घेराव कर जेएनयू प्रकरण के मामले में कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल उठाए।
भाजपा महिला मोर्चा ने इस आंदोलन के माध्यम से कांग्रेस के रुख के प्रति अपना विरोध जताया। प्रदेश नेतृत्व के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम में जिले में निवास करने वाले पार्टी के विभिन्न स्तरों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने एकजुटता के साथ आंदोलन में भाग लेते हुए अपनी आवाज बुलंद की।
कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष मुनेश्वर साहू , जिलाध्यक्ष सागर उरांव , महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष गौरी किंडो के साथ सोनामनी देवी, सीता देवी, शैल मिश्रा, जिला महामंत्री संदीप प्रसाद, सुरेश सिंह, निर्मल गोयल, जय साहू, बब्लू वर्मा, विनोद प्रसाद, संजय साहू, कौशलेन्द्र जमवार, हरिहर साहू, नीलम गुप्ता, ललिता गुप्ता, पायल तिवारी, पुष्पा देवी, मीना देवी एवं रेखा सिन्हा सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
भाजपा महिला मोर्चा के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन के माध्यम से कार्यकर्ताओं ने जेएनयू प्रकरण पर कांग्रेस से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग उठाई।

राम भक्तों के लिए

गुमला का दुर्गाबाड़ी (बंगाली क्लब ) द्वारा प्रारंभ किया गया – नवरात्र माँ दुर्गा पूजा ( त्योहार ) अब समस्त गुमला जिला में विशाल रूप ले चुका है

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

आस्था, परंपरा और इतिहास की 105 वर्ष पुरानी विरासत

गुमला : – गुमला शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान दुर्गाबाड़ी ( बंगाली क्लब ) गुमला का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल नवरात्र मां दुर्गा की पूजा का स्थल नहीं, बल्कि गुमला में सार्वजनिक दुर्गा पूजा की शुरुआत, बंगाली संस्कृति के संरक्षण और बदलते सामाजिक परिवेश के बीच सामुदायिक एकता की एक लंबी कहानी अपने अंदर समेटे हुए है, बल्कि
उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार गुमला में पहली सार्वजनिक दुर्गा पूजा वर्ष 1921 में बंगाली समुदाय द्वारा शुरू की गई थी। उस समय गुमला आज जैसा विकसित शहर नहीं था, बल्कि छोटा-सा कस्बाई क्षेत्र था। ब्रिटिश शासन के दौर में कोलकाता और बंगाल क्षेत्र से यहां आकर बसे बंगाली परिवार ने अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने के उद्देश्य नवरात्र माँ दुर्गा की पूजा शुरू की।

1921 : गुमला में नवरात्र माँ दुर्गा पूजा की पहली शुरुआत

गुमला की नवरात्र माँ दुर्गा पूजा के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण वर्ष 1921 माना जाता है।

स्थानीय ऐतिहासिक स्मृतियों के अनुसार बंगाली समुदाय के लगभग दस लोग उस समय गुमला में आकर बसे थे। इनमें वकील, ठेकेदार और व्यवसाय से जुड़े लोग शामिल थे। अपने साथ वे बंगाल की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराएं भी लेकर आए।

इन्हीं लोगों ने वर्तमान बंगाली दुर्गाबाड़ी ( बंगाली क्लब ) गुमला परिसर में नवरात्र माँ दुर्गा की पूजा प्रारंभ की। एक अन्य स्थानीय विवरण में बताया गया है कि शुरुआत में पांच बंगाली परिवारों ने स्थानीय लोगों की सहभागिता के साथ कलश पूजा से परंपरा शुरू की थी। बाद में प्रतिमा स्थापित कर विधिवत नवरात्र माँ दुर्गा पूजा का स्वरूप विकसित हुआ।

यही वह धार्मिक शुरुआत थी जिसने आगे चलकर गुमला में नवरात्र माँ दुर्गा पूजा को एक बड़े सामुदायिक ने भव्य नवरात्र मां दुर्गा पूजा (त्योहार ) में बदल दिया।
उस दौर का गुमला और दुर्गाबाड़ी
आज जहां पक्का भवन, सड़क, बिजली और शहर की चहल-पहल दिखाई देती है, वहां लगभग एक सदी पहले का दृश्य बिल्कुल अलग था।
स्थानीय बुजुर्गों के संस्मरणों के अनुसार उस समय दुर्गाबाड़ी का भवन खपरैल और मिट्टी की संरचना वाला था। पूजा के लिए अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ती थी और मां दुर्गा की मूर्ति को मिट्टी से बने मां दुर्गा की मूर्ति को सुखाने के लिए उस समय नीली रोशनी वाले लैंप का इस्तेमाल किए जाने की स्मृति भी स्थानीय लोगों ने साझा की है।
पूजा के लिए मूर्तिकार और पुरोहित बंगाल से बुलाए जाते थे। संसाधन सीमित थे, लेकिन माता भवानी के प्रति श्रद्धा – विश्वास – भक्ति और सामुदायिक उत्साह में कोई कमी नहीं थी।

एक छोटे से भवन में शुरू हुई पूजा धीरे-धीरे गुमला की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई।

प्रारंभिक संस्थापकों की भूमिका

गुमला में दुर्गा पूजा की इस ऐतिहासिक शुरुआत में कई लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

स्थानीय स्रोतों में रेवती मोहन सेन, लाल बाबू, कन्हैयालाल घोष, प्राण रंजन सेन और हरिदास अधिकारी जैसे लोगों का नाम प्रमुखता से मिलता है। इन्हीं अग्रणी लोगों के प्रयासों से नवरात्र मां दुर्गा पूजा ( त्योहार ) की व्यवस्था आगे बढ़ी।
उनका उद्देश्य केवल पूजा आयोजित करना नहीं था, बल्कि परदेश में रहते हुए अपनी सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना भी इस प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा था।

इस दृष्टि से दुर्गाबाड़ी (बंगाली क्लब ) केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि उस समय गुमला में बसे बंगाली समाज के लिए सांस्कृतिक मिलन केंद्र भी रहा।

दुर्गाबाड़ी (बंगाली क्लब ) : केवल पूजा स्थल नहीं

“दुर्गाबाड़ी (बंगाली क्लब) गुमला” नाम अपने भीतर ही एक व्यापक सांस्कृतिक उद्देश्य को समेटे हुए है।
शुरुआती दौर में यहां धार्मिक आयोजन के साथ-साथ बंगाली समाज के लोग आपस में मिलते-जुलते थे। पूजा के अवसर पर सांस्कृतिक गतिविधियां होती थीं और समुदाय के लोग अपनी भाषा, साहित्य, गीत संगीत तथा सामाजिक परंपराओं से जुड़े रहते थे।
इस प्रकार बंगाली क्लब ने गुमला में रहने वाले बंगाली परिवारों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लेकिन इसकी सबसे बड़ी विरासत बनी— नवरात्र मां दुर्गा की सार्वजनिक पूजा

आस्था : नवरात्रि मां दुर्गा के प्रति पीढ़ियों का विश्वास

बंगाली क्लब की दुर्गा पूजा में आस्था का स्वरूप बंगाल की पारंपरिक पूजा-पद्धति से गहराई से आज भी जुड़ा हुआ है।
मांँ भवानी- मांँ दुर्गा यहां केवल भक्ति और शक्ति की देवी नहीं, बल्कि परिवार और समाज की आराध्या के रूप में पूजित हैं। नवरात्र और दुर्गोत्सव के दौरान श्रद्धालु मांँ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और सुख-शांति, समृद्धि तथा परिवार की मंगलकामना करते हैं।

पूजा के दिनों में मंदिर परिसर में शंखध्वनि, घंटियों की आवाज, धूप-अगरबत्ती की सुगंध और मंत्रोच्चार का वातावरण श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुभूति से भर देता है।

पुरानी परंपरा को बनाए रखते हुए आज भी पूजा में बंगाली रीति-रिवाजों की छाप दिखाई देती है।
परंपरा की सबसे बड़ी विशेषता : पुरानी पूजा-पद्धति का संरक्षण

बंगाली क्लब की पूजा की विशेष पहचान यह है कि आधुनिकता के बावजूद पुरानी पूजा-पद्धति को बचाए रखने का प्रयास किया जाता है।

2013 में प्रकाशित एक विस्तृत रिपोर्ट में पूजा समिति से जुड़े लोगों ने बताया था कि पूर्वजों द्वारा शुरू की गई पूजा-पद्धति और उसकी मौलिकता को आज भी बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।

यह परंपरा केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है।

मांँ दुर्गा, मांँ लक्ष्मी मांँ सरस्वती, भगवान गणेश महाराज और भगवान कार्तिक महाराज की प्रतिमा, पूजा की विधि, पुरोहितों की परंपरा, सांस्कृतिक वातावरण और सामूहिक आयोजन—इन सभी में पुराने समय की स्मृतियों को जीवित रखने का प्रयास दिखाई देता है।

बंगाल से गुमला तक : मूर्तिकारों – रोहित की परंपरा सहित
इस दुर्गा पूजा की एक उल्लेखनीय विशेषता परंपरागत बंगाला की झलक वाली प्रतिमा निर्माण की परंपरा भी है।

ऐतिहासिक विवरण बताते हैं कि शुरुआती वर्षों में मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने के लिए बंगाल से मूर्तिकार बुलाए जाते थे। बाद के वर्षों में भी बंगाल से जुड़े कलाकारों और पुरोहितों की परंपरा जारी रही। 2025 की रिपोर्ट में पूजा से जुड़े लोगों ने बताया कि मूर्ति बनाने वाले एक कारीगर परिवार की चौथी पीढ़ी तक के कलाकार गुमला आकर प्रतिमा निर्माण करते रहे हैं।

इससे स्पष्ट होता है कि यह केवल गुमला में आयोजित बंगाली शैली की पूजा नहीं, बल्कि बंगाल की पारंपरिक कला और शिल्प को भी यहां तक लाने वाली सांस्कृतिक कड़ी रही है।

सौ साल पुराना लकड़ी का आधार

बंगाली क्लब की दुर्गा पूजा की ऐतिहासिकता का एक अनूठा पहलू पुराना लकड़ी का संरचना मंच है।

स्थानीय पूजा समिति से जुड़े लोगों के अनुसार जिस लकड़ी के संरचना मंच पर लगभग एक सदी पहले से लेकर आज भी मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती हैं, उसका उपयोग आज भी पूजा में किया जा रहा है।

यह संरचना मंच केवल लकड़ी का ढांचा नहीं हैं बल्कि यह उन हजारों श्रद्धालुओं की स्मृतियों का प्रतीक है जिन्होंने अलग-अलग पीढ़ियों में उसी पर स्थापित मां भवानी – मांँ दुर्गा के दर्शन कर रहे हैं।

एक दृष्टि से देखें तो उक्त लकड़ी की संरचना – मंच – गुमला की माँ दुर्गा पूजा के इतिहास का जीवित दस्तावेज है।
1921 से 2026 तक : परंपरा की लंबी यात्रा

वर्ष 2026 में गुमला की बंगाली क्लब की माँ दुर्गा पूजा परंपरा 105 वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। सितंबर 2026 की स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार सनातन दुर्गा पूजा समिति, जिसे दुर्गाबाड़ी (बंगाली क्लब) के नाम से भी जाना जाता है, ने 2026 के दुर्गा पूजा और काली पूजा आयोजन की तैयारियों के लिए नई कार्यकारिणी का गठन किया।
इसका अर्थ है कि 1921 में शुरू हुई धार्मिक परंपरा ने एक सदी से अधिक समय पार कर लिया है।

इतने लंबे समय में शासन बदला, सामाजिक व्यवस्था बदली, गुमला शहर का विस्तार हुआ और जीवनशैली में बड़ा परिवर्तन आया— लेकिन दुर्गाबाड़ी में मांँ दुर्गा की आराधना की परंपरा आज बनी हुई है।

ब्रिटिश काल से स्वतंत्र भारत तक

नवरात्रि माँ दुर्गा पूजा की सबसे बड़ी ऐतिहासिक विशेषता यह है कि इसकी शुरुआत ब्रिटिश शासनकाल में हुई

1921 में जब देश स्वतंत्र नहीं हुआ था, उस समय गुमला में बंगाली समुदाय के लोगों ने अपनी धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को कायम रखते हुए मां दुर्गा की पूजा शुरू की।

इसके बाद देश ने स्वतंत्रता प्राप्त की।

गुमला जिला और पूरा क्षेत्र सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन से गुजरा।

लेकिन दुर्गाबाड़ी की पूजा लगातार आगे बढ़ती रही।

इस दृष्टि से बंगाली क्लब की नवरात्रि मां दुर्गा पूजा केवल धार्मिक इतिहास नहीं, बल्कि गुमला के सामाजिक परिवर्तन की भी साक्षी है।

सामुदायिक एकता का केंद्र

बंगाली क्लब की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है कि समय के साथ यह पूजा केवल बंगाली समाज तक सीमित नहीं रही।

स्थानीय हिंदू समाज के प्रमुख लोगों ने भी नवरात्र दुर्गा पूजा में प्रारंभ से ही पूजा में सहभागिता निभाता रहा, पुराने विवरणों में स्थानीय लोगों की भागीदारी का उल्लेख मिलता है।

आज यह नवरात्र मां दुर्गा पूजा ( त्योहार ) व्यापक सामुदायिक सहभागिता का रूप ले चुकी है।

यही कारण है कि गुमला की नवरात्र माँ दुर्गा पूजा ( त्योहार ) केवल किसी एक समुदाय का धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप और सांस्कृतिक साझेदारी का नवरात्र माँ दुर्गा पूजा ( त्योहार ) समस्त गुमला जिला में एक विशाल रूप ले चुका है।

राम भक्तों के लिए

पिता द्वारा अपने ही नाबालिक पुत्री का गला दबाकर निर्मम हत्या कर दी गई, अभियुक्त पिता को गिरफ्तार कर गुमला जेल भेज दिया गया

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – गुमला जिला अंतर्गत स्थित पालकोट थाना अंतर्गत ग्राम तपकारा के चैतु लकड़ा उर्फ चैतु उराँव के द्वारा पालकोट थाना में सूचित किया गया कि दिनांक 24.06.2026 की शाम में करीब 7.00 बजे उसकी नाबालिग बेटी को अज्ञात लोगों द्वारा अचेत अवस्था में अपने घर के बरामदे में छोड़ दिया गया था। उसकी ऐसी हालत देखकर मुझे लगता है कि अज्ञात वयक्ति के द्वारा उसके साथ दुष्कर्म किया गया है। सूचक और उसके बयान के आधार पर पालकोट थाना द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए पालकोट थाना कांड सं० 55/2026 दिनांक 25.09.2026 धारा-65 (1) बी०एन०एस० 2023 3/4 पोक्सो एक्ट 2012 के तहत दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया। कांड की गम्भीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित उदभेदन हेतु पुलिस अधीक्षक ( गुमला पुलिस कप्तान हरिस बिन जामां ) गुमला द्वारा एसडीएमओ बसिया के नेतृत्व में एक एस आईटी का गठन किया गया। ईलाज के कम में दिनांक 26.09.2026 को पीड़िता की मृत्यु रिम्स राँची में हो गयी तथा मेडिकल बोर्ड गठित कर पोस्टमार्टम कराया गया। अग्रतर अनुसंधान, तकनीकी एवं मानवीय साध्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य तथा पोस्टमार्टम रिर्पोट के आधार पर नाबालिग पीड़िता सह मृतिका के साथ यौनाचार की बात की पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में मृतिका के परिजनों से अलग-अलग, एवं गहनता पूर्वक पुछताछ करने पर बताये कि 24.09.2026 को मृतिका के पिता चैतु लकड़ा द्वारा ही अपने नाबालिग बेटी को जान मारने की नीयत से गला दबाया गया था। तथा सभी परिवारजनों को यह धमकी दिया गया कि कोई भी इस घटना के बारे बतायगा तो उसके साथ भी ऐसा ही करेंगे।

इस संबंध में अनुसंधानकर्ता द्वारा परिजनों के बयानों को माननीय न्यायालय में अंकित कराया गया है। आज दिनांक 11.10.2020 को अभियुक्त मृतिका के पिता चैतु उराँव उर्फ चैतु लकड़ा, उम्र करीब 50 वर्ष, पिता-विशवजीत लकड़ा, ग्राम-तपकारा, थाना-पालकोट, जिला-गुमला को विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में उपस्थापित करते हुए न्यायिक हिरासत में भेजा गया। गिरफ्तार अभियुक्त चैतु उरीव उर्फ चैतु लकड़ा ने अपने अपराध को स्वीकार किया है।

राम भक्तों के लिए

जिला मंडल कारा के बंदियों की समुचित सुविधा व सुरक्षा प्रबंधन का अधिकारियों ने लिया जायजा

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न्यूज – गनपत लाल चौरसिया – ब्यूरो प्रमुख – गुमला

गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय स्थित जिला मंडल कारा गुमला में बोर्ड ऑफ विजिटर्स की टीम ने निरीक्षण किया। टीम ने कारा की व्यवस्थाओं, बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सुविधाओं, सुरक्षा प्रबंधन का जायजा लिया। निरीक्षण का नेतृत्व पीडीजे अजीत कुमार सिंह ने किया। इस दौरान गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महतो, गुमला पुलिस अधीक्षक हरिस बिन जमां, एंव झालसा सचिव राम कुमार लाल गुप्ता उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मंडल कारा के विभिन्न वार्डों, बंदियों के आवासन कक्षों, रसोईघर, चिकित्सा इकाई, पेयजल, स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। टीम ने बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, भोजन व्यवस्था, साफ-सफाई, कारा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति का अवलोकन किया। अधिकारियों ने यह भी देखा कि बंदियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं। अधिकारियों ने विभिन्न वार्डों में जाकर बंदियों से बातचीत की। उन्होंने उनकी समस्याओं, शिकायतों, उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की, साथ ही साथ उक्त बंदियों ने अपनी आवश्यकताओं, समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष खुलकर रखा। इस पर अधिकारियों ने कारा प्रशासन को प्राप्त शिकायतों और समस्याओं की गंभीरता से समीक्षा की। उन्होंने आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पीडीजे ने कहा कि बंदियों के अधिकारों की रक्षा करना कारा प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। डीसी ने कारा परिसर में स्वच्छ वातावरण बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर करने की बात कही। एसपी ने मंडल कारा की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने संबंधित कर्मियों को निर्धारित सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया।

राम भक्तों के लिए

प्रेम प्रसंग में फंसाकर युवती से 15 लाख रुपए की ठगी और ब्लैकमेलिंग, पुलिस छानबीन में जुटी

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न्यूज – गनपत लाल चौरसिया – ब्यूरो प्रमुख – गुमला

गुमला : – गुमला जिले में प्रेम प्रसंग में फंसाकर एक युवती से 15 लाख रुपए की भारी-भरकम ठगी करने और उसे ब्लैकमेल करने का मामला प्रकाश में आया है। पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर गुमला सदर थाने में लिखित आवेदन देकर आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है। इस पूरे प्रकरण में लोहरदगा जिले के सेन्हा थाना क्षेत्र के निवासी प्रभास्कर कुजूर को मुख्य आरोपी बनाया गया है। पुलिस से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कुछ महीने पहले उक्त युवती की पहचान प्रभास्कर कुजूर से हुई और इसके बाद दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ और धीरे-धीरे गहरे प्रेम प्रसंग में बदल गया। आरोप है कि इसी जान-पहचान और कथित प्रेमजाल का फायदा उठाकर उक्त युवक ने विभिन्न बहानों बनाकर , अलग-अलग किस्तों में, उक्त युवती से कुल 15 लाख रुपए ठग लिए। कुछ अंतराल के बाद उक्त युवती को अपने साथ हुई ठगी का शिकार होने का एहसास हुआ, तब उसने अपनी रकम वापस मांगी, तब उक्त आरोपी ने पैसे लौटाने से सीधा इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, उसने उक्त युवती को ब्लैकमेल करना भी शुरू कर दिया। इससे पीड़िता भारी मानसिक तनाव में आ गई, और अपने आप को संभालते हुए अंततः स्थिति गंभीर होने पर, उक्त पीड़िता अपने परिवार और परिजनों के साथ गुमला सदर थाना पहुंचकर उसने न्याय की गुहार लगाते हुए लिखित आवेदन देकर उक्त आरोपी युवक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई। गुमला सदर थाना पुलिस ने उक्त आवेदन प्राप्त करते ही त्वरित कार्रवाई करते हुए, उक्त युवक के विरुद्ध अनुसंधान और गहन छानबीन शुरू कर दी है। गुमला सदर थाना प्रभारी दिनेश कुमार ने बताया कि उक्त मामले की हर पहलू से निष्पक्ष जांच की जा रही है और तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राम भक्तों के लिए

खाद्य सुरक्षा विभाग ने अस्पताल परिसर स्थित नर्सिंग कौशल कॉलेज, गुमला की कैंटीन का किया औचक निरीक्षण, छात्राओं को दिए स्वच्छता व पोषण के टिप्स

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न्यूज – गनपत लाल चौरसिया – ब्यूरो प्रमुख – गुमला

गुमला : – गुमला सदर अस्पताल स्थित के नर्सिंग कौशल कॉलेज में शुक्रवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम द्वारा औचक निरीक्षण सह जागरूकता अभियान चलाया गया, उक्त निरीक्षण खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी प्रकाश चंद्र गुग्गी, कुमार प्रभाकर एवं आशा राज ने संयुक्त रूप से किया। 

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कॉलेज के छात्रावास एवं कैंटीन परिसर की साफ-सफाई व्यवस्था का बारीकी से मुआयना किया। अधिकारियों ने कैंटीन संचालक व कर्मियों को स्वच्छता मानकों का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी। उन्होंने निर्देश दिया कि खाना पकाने और परोसने के दौरान सभी कर्मी अनिवार्य रूप से एप्रन, ग्लव्स और हेडगियर का उपयोग करें। इसके साथ ही परिसर में नियमित पेस्ट कंट्रोल कराने, रसोई कर्मियों की मेडिकल फिटनेस जांच कराने और पीने के पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए वाटर टेस्टिंग रिपोर्ट प्रस्तुत करने का कड़ा निर्देश दिया गया।

निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने छात्रावास में रहने वाली छात्राओं को सुरक्षित व पौष्टिक खानपान को लेकर जागरूक किया। इस दौरान उन्हें खाद्य सुरक्षा से जुड़े प्रमुख पहलुओं की जानकारी दी गई पैकेटबंद उत्पादों की पहचान पैकेट पर बने लाल (मांसाहारी) और हरे (शाकाहारी) निशानों के बारे में विस्तार से समझाया गया। छात्राओं को फोर्टिफाइड फूड में उपस्थित सुक्ष्म पोषक तत्वों की महत्ता के साथ अंकित ‘+ F’ के बारे में विस्तार से चर्चा की गयी। इसी क्रम में खाने पीने की पदार्थों में मिलावट यथा, ताजा अंडे की पहचान, हल्दी में रंग की मिलावट, खाद्य पदार्थों में औद्योगिक रंग की पहचान के साथ दूध एवं दूध उत्पादों में स्टार्च की मिलावट की पहचान के बारे में विस्तार से चर्चा की गयी।

अधिकारियों ने छात्राओं एवं आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी भी खाद्य पदार्थ में मिलावट, गुणवत्ता में कमी या कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आती है, तो वे जागरूक नागरिक की तरह इसकी शिकायत दर्ज कराएं। इसके लिए वे भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण , ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ ऐप का उपयोग कर सकते हैं अथवा सीधे खाद्य सुरक्षा कार्यालय, गुमला में संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेकर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

राम भक्तों के लिए

खाद्य प्रतिष्ठान स्वयं सुधारात्मक कार्रवाई अपनाये नहीं तो होगी सख़्त कार्रवाई ,खाद्य विभाग की लगातार दबिश से बाजार में मचा हड़कंप, आज कई दुकानों से सील हुए सैंपल

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न्यूज – गनपत लाल चौरसिया – ब्यूरो प्रमुख – गुमला

गुमला : – दुर्गा पूजा एंव अन्य त्योहारों को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरी पर रोक लगाने के लिए शहर में विशेष जांच अभियान चलाया। लोगों को त्योहारों के दौरान शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री मिले, इसके लिए टीम ने कई दुकानों में औचक निरीक्षण किया, उक्त अभियान से जुड़े खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी प्रकाश चंद्र गुग्गी, कुमार प्रभाकर और आशा राज ने संयुक्त रूप से किया।

जांच टीम ने बाजार के कई प्रतिष्ठानों में जाकर सामान की गुणवत्ता जांची और शक के आधार पर नमूने लिए मेसर्स गुरमीत ट्रेडर्स गुमला जशपुर रोड से पैकेज्ड सलोनी और हाथी मार्का सरसों तेल ,मेसर्स महामाए आयुर्वेद, जशपुर रोड गुमला से घी एवं मेसर्स चॉकलेट अंकल, पालकोट से पनीर का सैंपल लिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि इन सभी सैंपलों को जांच के लिए राज्य खाद्य जाँच प्रयोगशाला, राँची भेज दिया गया है। लैब से रिपोर्ट आने के बाद नियमों के अनुसार आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विभाग ने होटल, ठेले और खोमचे पर सामान बेचने वाले सभी दुकानदारों, खासकर गोलगप्पा विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे खाना तैयार करने और ग्राहकों को पिलाने के लिए केवल प्रमाणित आर.ओ. प्लांट के शुद्ध पानी का ही उपयोग करें। इसके साथ ही, FSSAI का लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दुकान या ठेले पर ऐसी जगह लगाना अनिवार्य है, जहां ग्राहक उसे आसानी से देख सकें।

जांच टीम ने निर्देश दिया कि सभी होटलों, ठेलों एवं खोमचों में काम करने वाले कर्मचारी अनिवार्य रूप से एप्रन, ग्लव्स और हेडगियर (सिर ढकने वाली टोपी) का प्रयोग करें। साथ ही खाद्य सामग्री परोसने या लपेटने के लिए अखबार (न्यूज पेपर) और मिलावट अथवा छोले या चाट के लिए अखाद्य रंगों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की सख्त हिदायत दी गई। अधिकारियों ने दो टूक कहा कि ऐसा करते पाए जाने पर संबंधित संचालक के खिलाफ तत्काल खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई होगी।

फूड सेफ्टी कनेक्ट’ ऐप पर करें शिकायत
अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें किसी भी दुकान में मिलावटी सामान, खराब गुणवत्ता या कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो वे FSSAI के ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ ऐप पर शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा सीधे गुमला स्थित खाद्य सुरक्षा कार्यालय में भी शिकायत की जा सकती है। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि शिकायत मिलते ही तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

राम भक्तों के लिए
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