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Wednesday, November 4, 2026
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राज्यसभा चुनाव के बाद मुश्किल में पड़ सकते हैं रघुवर,शह-मात का खेल जारी, कहीं भाजपा बैकफुट पर तो नहीं…!

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नारायण विश्वकर्मा

बदले की राजनीति का दस्तूर पुराना है. झारखंड का वर्तमान राजनीतिक माहौल कुछ ऐसा ही है. झारखंड की राजनीति अब पूरी तरह से शह-मात की लड़ाई में तब्दील हो गया है. सीएम हेमंत सोरेन ने 2 साल बाद बदली राजनीतिक परिस्थिति में 5 पूर्व मंत्रियों पर एक्शन लिया है. आय से अधिक संपत्ति के मामले में सबकी एसीबी जांच करेगा. सत्ता के गलियारे में अब इस बात की चर्चा छिड़ी हुई है कि एसीबी की जद में तो पूर्व सीएम रघुवर दास भी हैं, उन्हें सीएम ने क्यों छोड़ दिया है? हालांकि सूत्रों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के बाद रघुवर दास मुश्किल में पड़ सकते हैं. इसके पीछे की राजनीतिक मंशा को समझना बहुत मुश्किल काम नहीं है. खैर ईडी की जांच के बहाने सीएम ने बेजान एसीबी में प्राण फूंकने की कोशिश तो जरूर की है. समय, काल और परिस्थिति के अनुसार इसका इस्तेमाल सरकारें करती रही हैं.

कई मामलों में घिरे हुए हैं रघुवर

पूर्व की रघुवर सरकार के टीशर्ट और टॉफी बांटने के 6 करोड़ के घोटाले और 100 करोड़ के मोमेंटम झारखंड घोटाले पर कार्रवाई का भी लोगों को इंतजार है. इनके अलावा पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, आईएएस सुनील कुमार बरनवाल, के. रवि कुमार और पूजा सिंघल के खिलाफ भी मामले दर्ज हैं. इस संबंध में आरटीआई एक्टिविस्ट पंकज कुमार यादव ने 2020 में टीशर्ट-टॉफी और मोमेंटम झारखंड में हुए करोड़ों के घपले की जांच की मांग की थी. वैसे बता दें कि चार माह पूर्व झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले को एसीबी को टीशर्ट-टॉफी घोटाले की जांच करने को कहा है. हाईकोर्ट इसकी मॉनिटरिंग कर रहा है. यह चार माह पहले की बात है. बताया गया है कि रघुवर दास के खिलाफ एफआईआर की कॉपी सीएमओ में पड़ी हुई है. वहीं निर्दलीय विधायक सरयू राय के मैनहर्ट मामले में कार्रवाई पर सीएमओ की सहमति का इंतजार हो रहा है. इन मामलों में भी उनपर गाज गिर सकती है.

रघुवर मामले में भाजपा का शीर्ष नेतृत्व पसोपेश में

उधर, निर्दलीय विधायक सरयू राय ने प्रेम प्रकाश से ईडी से पूछताछ के बाद कहा है कि ईडी पूर्व सीएम, उनके मुख्य सचिव, ओएसडी, प्रेस सह राजनीतिक सलाहकार से भी पूछताछ करने की सलाह भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी को दे डाली है. उन्होंने पूर्व सरकार के सीएमओ के भ्रष्टाचार के बारे में श्री मरांडी द्वारा पूर्व में दिए गए अपने बयानों पर गौर करने और ईडी से जांच करने की सिफारिश के लिए कहा है. दरअसल, राज्यसभा चुनाव में रघुवर दास को प्रत्याशी क्यों नहीं बनाया गया, इसकी पीछे की वजह भी उनकी कारगुजारियों को प्रमुख माना जा रहा है. संभवत: ईडी के हाथ कुछ ऐसे सबूत हाथ लगे हैं, जिसके कारण रघुवर दास के मामले में भाजपा का शीर्ष नेतृत्व पसोपेश में है. इसलिए अंतिम समय में राज्यसभा चुनाव से उनका नाम हटाया गया. प्रदेश भाजपाइयों का अब राज्यसभा चुनाव पर ध्यान केंद्रित हो गया है. लेकिन रघुवर को राज्यसभा प्रत्याशी नहीं बनाए जाने की वजहों पर भाजपा के अंदरखाने एक अजीब तरह की खामोशी जरूर है.

पूजा पर हेमंत-रघुवर की कृपादृष्टि क्यों बनी रही?    

पिछले दिन दिल्ली में सीएम ने ईडी को दूसरी बार 25 दिन बाद भी पीसी नहीं करने पर सवाल उठाया. शायद सीएम को पता है कि ईडी की अबतक की कार्रवाई में पूर्व की सरकार लपेटे में है. मनरेगा के रास्ते ईडी ने कार्रवाई शुरू की तो, पूर्व सरकार के भ्रष्टाचार सामने आने लगे. रघुवर सरकार में कई ऐसे पात्र रहे हैं, जो उस समय सत्ता में मुख्य किरदार की भूमिका में थे. रघुवर सरकार की विदाई के बाद उनमें से कुछ आज भी सरकार की शोभा बढ़ा रहे हैं. अहम सवाल ये कि वर्तमान सरकार पूजा सिंघल जैसे अफसर से परहेज क्यों नहीं किया? इस मामले में हेमंत सरकार कटघरे में जरूर हैं. अगर पूजा सिंघल का दामन दागदार था तो, हेमंत सरकार ने उन्हें सर-माथे पर क्यों बिठाया? अचानक कोई बेवफा क्यों हो गया? मनरेगा घोटाले में कई बार नाम आने के बावजूद अगर रघुवर दास ने पूजा को मोमेंटम झारखंड का जिम्मा सौंपा तो, हेमंत सोरेन सब कुछ जानते हुए भी उन्हें अम्बेसडर बना कर विदेश क्यों भेजा? अपने अधीनस्थ विभागों की जिम्मेवारी कैसे सौंप दी? इसके अलावा 2020 में पल्स अस्पताल मामले में पूजा का नाम आने के बावजूद सीएमओ में उन्हें महत्वपूर्ण जगह क्यों दी गई. उसी के कारण पल्स अस्पताल का मामला दो वर्षों तक लटका रहा और सीएमओ इसपर खामोश रहा.

ईडी की उलझन, कार्रवाई में कैसे और किस तरह से आगे

दरअसल, पूजा सिंघल के डबल क्रास ने रघुवर-हेमंत को मुसीबत में डाला है. सूत्र बताते हैं कि पूजा सिंघल ने ही खनन मामले की फाइल रघुवर दास के चेंबर तक पहुंचायी. इसकी खबर लगते ही हेमंत सोरेन ने ईडी को तुरंत मनरेगा घोटाले के लिए कार्रवाई की इजाजत दे दी. उधर, खनन मामले की फाइल मिलते ही  रघुवर दास रेस हो गए और प्रदेश भाजपा में सबको पछाड़ कर हेमंत सरकार पर हमलावर हो गए. जब मनरेगा मामले की पोल-पट्टी खुलने लगी तो रघुवर दास ने कहा कि पूजा सिंघल को क्लीन चिट अफसरों ने दी है, उसमें उनकी कोई गलती नहीं है. ये तर्क किसी के गले नहीं उतरा. उधर ईडी की कार्रवाई में विशाल चौधरी और प्रेम प्रकाश का नाम आने के बाद पूर्व सरकार का कनेक्शन भी सामने आ गया है. अगर रघुवर सरकार पाक-साफ होती तो, भाजपा अबतक हेमंत सरकार पर हमलावर हो जाती. लेकिन अब भाजपा के गोलपोस्ट से गेंद हेमंत सोरेन के पाले में जा चुकी है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि हेमंत सरकार को क्लीन चिट मिल गयी है. सच कहा जाए तो ईडी की कार्रवाई में रघुवर सरकार के समय के जिन बड़े आईएएस अफसरों की संलिप्तता और सत्ता से जुड़े दलालों के नाम सामने आ रहे हैं, उसके कारण वर्तमान सरकार के दामन पर भी छींटे पड़े हैं. इससे इंकार नहीं किया जा सकता है. ईडी कार्रवाई में कैसे और किस तरह से आगे बढ़ती है, यह देखना दिलचस्प होगा.   

राम भक्तों के लिए

कमिश्नर ने सीओ के अधूरे प्रतिवेदन पर जताया एतराज, तीन दिनों के अंदर फिर से मांगी पूरी रिपोर्ट

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नारायण विश्वकर्मा

दक्षिणी छोटानागपुर के कमिश्नर नितिन मदन कुलकर्णी ने रसूखदारों द्वारा हड़पी गई भुईँहरी जमीन को लेकर गंभीर हैं. 11 मई को आयुक्त कार्यालय द्वारा बड़गाई अंचल कार्यालय से मांगे गए आधे-अधूरे प्रतिवेदन पर ऐतराज जताया है. बड़गाई सीओ द्वारा 25 मई को आयुक्त कार्यालय को भेजे गए प्रतिवेदन में सिर्फ लॉविस्टा अपार्टमेंट को फोकस किया गया है, पर पल्स अस्पताल को छोड़ दिया गया है. इसके बाद कमिश्नर ऑफिस ने (पत्रांक 10-14/1529, 30 मई 2022) सोशल एक्टिविस्ट इंद्रदेव लाल से प्राप्त आवेदन के जांच प्रतिवेदन के क्रम में पूरक सूचनाएं उपलब्ध कराने का आदेश बड़गाई सीओ को दिया है. आयुक्त कार्यालय ने बड़गाई अंचल कार्यालय के जवाब के आलोक में (पत्रांक 465(ii) 25 मई 2022) फिर तीन बिंदुओं पर जवाब मांगा है. सीओ के प्रतिवेदन की कुल पृष्ठ संख्या 19 है. कमिश्नर ने अंचल कार्यालय को तीन दिनों के अंदर प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा है.

सीओ के प्रतिवेदन में भूखंड पर संरचनाओं का जिक्र नहीं

दरअसल, प्रासंगिक पत्र द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रतिवेदन से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि दाखिल-खारिज वाद सं-1185/2017-18 एवं 1079/2017-18 को अस्वीकृत तो कर दिया गया है, परंतु उक्त वाद में निहित भूखंड पर अभी किसका दखल-कब्जा है अथवा उसपर किसी प्रकार की संरचना का निर्माण किया गया है. यह स्पष्ट नहीं है. इसलिए कमिश्नर ने स्थल निरीक्षण कराकर फोटोग्राफ के साथ यह प्रतिवेदित किया जाए कि उक्त दोनों नामांतरण वाद में निहित भूखंड पर किनका दखल-कब्जा है? भूखंड खाली है अथवा उसपर किसी प्रकार का निर्माण हुआ है एवं निर्माण का वर्ष क्या है?

भुईंहरी जमीन की प्रकृति में बदलाव कैसे हुआ?

दूसरा, आपके द्वारा मौजा मोराबादी, थाना नं-192 के खाता सं-160, 161 एवं 162 के ऑनलाइन खतियान की प्रति संलग्न कर भेजी गयी है, जो किस्म बकास्त भुईंहरी है. इनके विभिन्न प्लॉटों एवं रकबा का विवरण तो है, परंतु इन भूखंडों पर वर्तमान में दखल-कब्जा, इनके खाली रहने अथवा इसपर हुए निर्माण की सूचना अनुपलब्ध है. अत: खाता सं- 160, 161 एवं 162 के विभिन्न प्लॉटों पर वर्तमान दखल-कब्जा किनका-किनका है, यह बताने की कृपा की जाए. साथ ही मोराबादी मौजा के सभी बकास्त भुईंहरी, खाता एवं प्लॉट संख्या में निहित भूमि के खाली रहने अथवा उसपर हुए विनिर्माण की सूचना उपलब्ध करायी जाए, ताकि इसके आगे की जांच करायी जा सके कि बकास्त भुईंहरी जमीन की प्रकृति में बदलाव कैसे हुआ एवं इस कार्य में सरकार तंत्र की संलिप्तता है अथवा नहीं? और तीसरा, श्री लाल के परिवाद पत्र में जिन 5 जमाबंदीदारों के नाम अंकित हैं, उनके खाता, खेसरा, रकबा एवं किस्म जमीन का उल्लेख आपके प्रतिवेदन में नहीं है. इनका भी उल्लेख अपने प्रतिवेदन में किया जाए.

लॉविस्टा अपार्टमेंट की फोटोग्राफी भेजी गई

दरअसल, बड़गाई अंचल कार्यालय द्वारा आयुक्त कार्यालय में 25 मई 2022 को भेजे गए जवाब से कमिश्नर संतुष्ट नहीं हुए हैं. इसलिए पुन: बड़गाई सीओ को उक्त पत्र भेजा गया है. बता दें कि पूर्व में भेजे गए पत्र में भुईंहरी जमीन पर निर्मित लॉविस्टा अपार्टमेंट की फोटोग्राफी भेजी गई है, जबकि भुईंहरी जमीन पर ही निर्मित पल्स अस्पताल के बारे में सीओ ने उल्लेख नहीं किया है. सीओ के जांच प्रतिवेदन में दाखिल-खारिज वाद सं-1185/17-18, आवेदक राजकुमार जैन, पिता-हरकचंद जैन से संबंधित है, जो मौजा मोराबादी, खाता सं-157, प्लॉट नं-1164, रकबा 16 डिसमिल में गैरमजरुआ आम दर्जा जमीन रास्ता होने के कारण अस्वीकृत किया गया है. इसके अलावा दाखिल-खारिज वाद सं-1079/17-18 आवेदिका पूजा पोद्दार पति मिलन पोद्दार के नाम दर्ज हैं, जो मौजा-मोराबादी. थाना सं-192, खाता सं-161,प्लॉट सं-1138, रकबा-1.3 डिसमिल एवं खाता सं-162, प्लॉट सं-1137, रकबा-1.3 डिसमिल से संबंधित है. उक्त रकबा अपार्टमेंट लॉविस्टा अवस्थित एक फ्लैट का आनुपातिक रकबा है, जिसे तत्कालीन अंचलाधिकारी द्वारा बकास्त भुईंहरी खाते की भूमि जो सरकार में निहित नहीं है, के आधार पर अस्वीकृत किया गया है.

लॉविस्टा अपार्टमेंट मिलन पोद्दार ग्रुप ने बनवाया

मौजा मोराबादी, खाता सं-161, प्लॉट संख्या-1138, एवं खाता सं-162, प्लॉट सं-1137,आरएस खतियान में बकास्त भुईंहरी दर्ज है. उक्त दोनों प्लॉट के अंश (लगभग 30 डिसमिल) पर लॉविस्टा अपार्टमेंट निर्मित है. जिसे मिलन पोद्दार ग्रुप के द्वारा बनवाया गया है. नामांतरण वाद सं-1079/2017-18 इसी अपार्टमेंट से संबंधित है.

अशोक कुमार जैन वगैरह पंजी-II में निम्नलिखित विवरणी दर्ज हैं-

रैयत अशोक कुमार जैन, दाखिल-खारिज वाद सं-4आर-27/71-72, वोल्यूम नं-III- पृष्ठ सं-239, 2 अनिल कुमार जैन, 3 आर-27/71-72, वोल्यूम नं-III- पृष्ठ सं-231, 3. विजय कुमार जैन,1171आर-27/89-84, वोल्यूम नं-IX-36, रमेश कुमार जैन, 7आर-27/71-72, वोल्यूम नं-III-233 एवं वरुण बक्सी, 194आर-27/66-67, वोल्यूम नं-III-145 है. बड़गाई सीओ ने प्रतिवेदन के अंत में कहा है कि बड़गाई अंचल कार्यालय की स्थापना 1 जनवरी 2016 को हुई है. अत: संबंधित अभिलेख कार्यालय में उपलब्ध नहीं है. उक्त अभिलेख की मांग जिला अभिलेखागार, रांची से इस कार्यालय के पत्रांक-464(ii)/25मई 2022 द्वारा मांग की गई है. प्रश्नगत भूमि के ऑफलाइन खतियान उपलब्ध नहीं है.

उल्लेखनीय है कि रांची के अभिलेखागार में ऑफलाइन खतियानों के गायब होने या करने की सूचना मिलती रहती है. लंबे समय से पुराने खतियानों के पन्ने फाड़े गए हैं या उनपर स्याही गिरा दी गई है. बहरहाल, मोरहाबादी मौजा में भुईंहरी जमीन का वजूद भले मिटा कर गगनचुंबी इमारतें बना ली गई हों, पर कागज पर आज भी सैकड़ों एकड़ जमीन जैन बंधुओं की नहीं है. लॉविस्टा अपार्टमेंट भुईहरी जमीन पर निर्मित है, इसका प्रमाण तो जरूर मिल गया है.

राम भक्तों के लिए

क्यों दहशत में हैं IAS बिरादरी? दागियों से प्रेम है, क्योंकि ये दाग अच्छे हैं…!

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नारायण विश्वकर्मा
सत्ता के दलालों ने झारखंड को चरागाह बना डाला है. इसमें दलालों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. पिछले एक महीने से चल रही ईडी की कार्रवाई से झारखंड में पहली बार ब्यूरोक्रेसी महकमे में तूफान के पहले की शांति है. खासकर सत्ता के दलाल प्रेम प्रकाश के पकड़े जाने के बाद आईएएस अफसरों के बीच यह दहशत है कि अब कहीं उनकी बारी न आ जाए. झारखंड के 5 सीनियर आईएएस अफसरों की तो कम से कम यही स्थिति है. ये सभी अफसर राजधानी में पोस्टेड हैं और सरकार की शोभा बढ़ाने में अपना योगदान दे रहे हैं.

आईएएस खेमे में सनसनी
ईडी से लगातार तीन दिन से चल रही पूछताछ के बाद प्रेम प्रकाश के कुछ ऐसे दस्तावेज हाथ लगे हैं, जिनसे आईएएस खेमे में सनसनी फैली गई. सूत्र बताते हैं कि प्रेम प्रकाश के पास से कुछ ऐसे अश्लील वीडियोज भी हाथ लगे हैं, जिसे अगर सार्वजनिक कर दिया जाए तो इन पांचों आईएएस अफसर कहीं मुंह दिखाने के लायक नहीं रहेंगे. अगर ऐसे अश्लील वीडियोज इनकी पत्नियां देख लें तो, घर में महाभारत छिड़ जाएगा. सूत्र बताते हैं कि सत्ता के गलियारे में अश्लील वीडियोज को लेकर ब्यूरोक्रेट्स के बीच यह चर्चा आम है कि प्रेम प्रकाश तो डूब ही रहा है, अब वो हम सबको भी लेकर डूब सकता है. इसकी चर्चा दिल्ली में भी हो रही है. बताया गया कि दिल्ली में जांच एजेंसियों की आंच से बचाने के लिए प्रभावशाली आईएएस लॉबी अपने प्रिय पात्रों को संरक्षण देने की फिराक में हैं. अब वे इसमें कितने सफल हो पाते हैं, यह कहना अभी मुश्किल है.
ब्यूरोक्रेट्स की प्रेम लीलाओं की चर्चा दिल्ली तक
सूत्र बताते हैं कि प्रेम प्रकाश के रंगमहल में सुरा-सुंदरियों के बीच खोए अफसरों के वीडियोज को अगर सार्वजनिक कर दिया जाए तो झारखंड की राजनीति में भूचाल आ जाएगा. क्योंकि अगर इन पांचों ब्यूरोक्रेट्स पर आंच आयी तो इसकी तपिश से सत्ता प्रतिष्ठान का माहौल भी गरमा जाएगा. हालांकि प्रेम प्रकाश का सत्ता प्रतिष्ठान से संबंध करीब 8 सालों से है. यानी पूर्व की रघुवर सरकार में पांच साल और हेमंत सरकार के ढाई साल के शासनकाल में प्रेम प्रकाश का वही रुतबा कायम रहा, जो पूर्व की सरकार में था. जाहिर है कि प्रेम प्रकाश की कारगुजारियों से सत्ता प्रतिष्ठान पूरी तरह से वाकिफ है. मतलब सत्ता चरित्र वही है, सिर्फ चेहरे बदल गए हैं. पर दलाल वही हैं जिसका सत्ता से अवांछित गठबंधन चला आ रहा है. अगर ऐसा नहीं है तो वर्तमान सरकार ने दलालों को छुट्टे सांड़ की तरह सत्ता के गलियारे में मौज-मस्ती के लिए क्यों छोड़ दिया? यानी काजल की कोठरी (सत्ता) में सभी दाग लगाए बैठे हैं. पर दागियों से प्रेम है क्योंकि ये दाग अच्छे हैं.

राम भक्तों के लिए

रांची डीसी के कारनामे का हाईकोर्ट में खुलेगा पिटारा !, सरकार की हो सकती है फजीहत

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नारायण विश्वकर्मा
सत्ता प्रतिष्ठान में यह बात स्थापित हो गयी है कि सत्ता के इशारे पर ब्यूरोक्रेट्स को काम करना पड़ता है. अक्सर देखा-सुना गया है कि दागी अफसर सत्ता का संरक्षण पाने में सफल भी हो जाता है. इन दिनों अपनी कार्यशैली को लेकर रांची के डीसी छवि रंजन सुर्खियों में हैं. पिछले दिन झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी कार्यशैली के खिलाफ तल्ख टिप्पणी की है. खान-खनिज के मामले में चार्जशीटेड आइएएस अफसर से राज्य सरकार द्वारा शपथ पत्र दायर करने पर कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. हाईकोर्ट अब रांची डीसी को नोटिस जारी करेगा और उनके लंबित केस का स्टेटस जानेगा.
इंद्रदेव लाल को तीन माह बाद भी नकल की कॉपी हासिल नहीं
कोर्ट के कड़े रुख के बाद आरटीआई एक्टिविस्ट इंद्रदेव लाल ने कहा है कि रांची डीसी के खिलाफ पांच साल से पेंडिंग क्रिमिनल केस का जिन्न अब बाहर निकलने के लिए मचल रहा है. वे कहते हैं कि सत्ता प्रतिष्ठान के इशारे पर काम करने का अब उन्हें परिणाम भुगतना पड़ सकता है. कोडरमा में जिला परिषद परिसर में लकड़ी कटाई के मामले में अभियुक्त छवि रंजन का हाईकोर्ट में पांच साल से केस लंबित रहने पर इंद्रदेव लाल ने केस की सुनवाई के लिए एसीबी कोर्ट से तीन माह पूर्व दस्तावेज की मांग की थी. उन्होंने बताया कि झारखंड हाईकोर्ट से पिछले 5 साल से जमानत पर चल रहे रांची डीसी के खिलाफ हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू नहीं होने पर एफआईआर और चार्जशीट की कॉपी के लिए रांची एसीबी कोर्ट में नकल निकलवाने के लिए आवेदन दिया था. कोर्ट के पेशकार ने बताया कि छविरंजन का मामला हजारीबाग एसीबी कोर्ट में है. वहीं से नकल की कॉपी पाना संभव है. इंद्रदेव लाल ने हजारीबाग जाकर पता किया तो कहा गया कि अभी एफआईआऱ और चार्जशीट की कॉपी हजारीबाग एसीबी कोर्ट में नहीं है. यहां आने पर ही आपको नकल की कॉपी मिल पाएगी.

इसे कहते हैं आ बैल मुझे मार…!

इंद्रदेव लाल ने बताया कि 15 फरवरी 2022 को उन्होंने रांची के विशेष निगरानी कोर्ट के जज ए. दुबे की अदालत में निगरानी केस नं-1, 2016, झारखंड राज्य बनाम छविरंजन के खिलाफ (निगरानी केस नंबर 76/2015) केस से संबंधित दस्तावेज की मांग की. श्री लाल ने बताया कि जब दस्तावेज लेने पहुंचे तो, उन्हें बताया गया कि छविरंजन के खिलाफ लंबित मामला हजारीबाग के एसीबी के विशेष जज के कोर्ट में 18 फरवरी 22 को भेज दिया गया है, वहीं से मिलेगा. जब यहां पता किया तो कहा गया कि अभी इसमें समय लगेगा. उन्होंने कहा कि एसीबी के टालमटोल रवैये से यह पता चल गया कि सत्ता के संरक्षण में पलनेवाले अफसर के खिलाफ कुछ नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में अब उनके लंबित केस का पिटारा खुलेगा. सत्ता का साथ देने की फिराक में अब वे खुद ही उलझ गए हैं या उन्हें उलझा दिया गया है यह तो कहना मुश्किल है पर इसे ही कहते हैं आ बैल मुझे मार.
आला अफसरों ने दुबारा वही गलती दोहरायी
सबसे हैरतअंगेज बात यह है कि सरकार के आला अफसरों से यह भूल कैसे हो गई? जबकि 13 मई 2022 को ही हाईकोर्ट ने डीसी छवि रंजन द्वारा शपथ पत्र दायर करने पर आपत्ति की थी. हाईकोर्ट ने कहा था कि खनन विभाग के किसी जिम्मेदार अफसर ने नहीं, बल्कि रांची डीसी की ओर से दायर की गई है. अदालत ने यह सवाल किया था कि यह कैसे संभव है कि डीसी को खान विभाग के बारे में इतनी विस्तृत जानकारी हो. दरअसल, खान निदेशक अमित कुमार ने रांची डीसी को शपथ पत्र दायर करने का निर्देश दिया था. खान निदेशक ने चार मई को डीसी को पत्र लिखा और शिवशंकर शर्मा की याचिका पर कोर्ट में शपथ पत्र दायर करने के लिए प्राधिकृत किया. इसके बावजूद आला अफसरों ने फिर वही गलती क्यों दुहरा दी? मात्र छह दिन बाद छवि रंजन को हाईकोर्ट में शपथपत्र दायर करने फिर निर्दैश दे दिया गया. इसके बाद कोर्ट ने डीसी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिनके खिलाफ क्रिमिनल केस पेंडिंग है और चार्जशीटेड है उससे राज्य सरकार ने शपथ पत्र कैसे दायर कराया. अब इस मामले में रांची डीसी बुरी तरह से घिरते नजर आ रहे हैं.
सत्ता शीर्ष दागदार डीसी पर मेहरबान क्यों?
श्री लाल ने कहा कि सत्ता शीर्ष से यह सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए कि आखिर चार्जशीटेड अफसर को राजधानी में डीसी क्यों बना दिया गया? क्यों नहीं हेमंत सरकार ने उनके पूर्व की केस हिस्ट्री पर गौर किया? आखिर हाईकोर्ट से जमानत पर चल रहे आईएएस अफसर को राजधानी में डीसी बनाने की क्या मजबूरी थी? ऐसे कई सवालों से घिरने के बावजूद छवि रंजन की छवि पर अबतक कोई आंच नहीं आना यह साबित करता है कि उन्हें सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। हालांकि सत्ता प्रतिष्ठान में इसके भी मायने निकाले जा रहे हैं। पहले से दागदार छवि के अफसर को राजधानी रांची का डीसी बना देने से हेमंत सरकार पर भी उंगलियां उठ रही हैं। सूत्र बताते हैं कि सरकार के सहयोगी कांग्रेस के विधायक-मंत्री भी चाहते हैं कि मुख्यमंत्री रांची डीसी को चलता करें. कहा गया कि किसी एक आईएएस की वजह से उनकी सरकार की बदनामी हो रही हो और मुख्यमंत्री उन्हें हटाने के बदले उनसे काम ले रहे हैं, यह उचित नहीं है. श्री लाल ने कहा कि आखिर क्या वजह है कि ऐसे अफसर को सरकार पोस रही है? आखिर सरकार दागदार डीसी पर मेहरबान क्यों है?
क्या है आरोप?
छवि रंजन पर आरोप है कि उन्होंने कोडरमा के डीसी रहते हुए जिला परिषद के सरकारी परिसर से पांच बड़े सागवान के पेड़ और एक बड़े शीशम के पेड़ को अवैध रूप से कटवाया, जिसका मूल्य 20-22 लाख रुपए के आसपास बताया गया। इसके बाद छवि रंजन के खिलाफ कोडरमा के मरकच्चो थाने में पीएस केस (83/2015) दर्ज किया गया। कुछ दिनों बाद हजारीबाग के एसीबी विभाग में (केस सं 11/2016) सीआरपीसी की धारा 41ए के तहत याचिकाकर्ता (छवि रंजन) को नोटिस जारी किया गया था। बाद में इस मामले को रांची स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को रेफर किया गया। इस मामले में प्रारंभिक जांच में यह पता चला कि छवि रंजन के मौखिक आदेश पर जिला परिषद परिसर से पेड़ कटवाए गए थे।

डीडीसी को एफआईआर दर्ज करने से रोका गया
बता दें कि विजिलेंस के विशेष पीपी ने कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर याचिकाकर्ता की जमानत अर्जी का विरोध किया था. उन्होंने जवाबी हलफनामे के पैरा 6 का हवाला देते हुए गवाह कैलाश नाथ पांडे और सुबोध कुमार यादव द्वारा धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज अपने बयानों में अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन किया गया. इस मामले में कोडरमा के तत्कालीन डीडीसी कौशल किशोर ठाकुर ने अपनी गवाही में कहा कि याचिकाकर्ता (छवि रंजन) ने उन्हें नामित प्राथमिकी दर्ज करने से रोकने की पूरी कोशिश की थी और उन पर कैलाश नाथ पांडे और सुबोध कुमार यादव के लिखित बयान को बदलने के लिए भी दबाव बनाया गया था।
बहरहाल, हाकिम के समक्ष छवि रंजन के खिलाफ लंबित मामले की पोटली खुलने की उम्मीद है. इसके बाद ही पता चलेगा कि छवि रंजन के साथ क्या सलूक होनेवाला है. भ्रष्ट अफसरों की सूची में उनका नाम पहले से शामिल है. ईडी के रडार पर भी उनका नाम आ रहा है. अब देखना है कि कोर्ट में सरकार उनका बचाव करती है या उन्हें अपने हाल पर छोड़ देती है, इसका हमें अभी इंतजार करना होगा.

राम भक्तों के लिए

पल्स अस्पताल की भुईंहरी जमीन के मामले में कमिश्नर सख्त, सीओ से एक हफ्ते में मांगी रिपोर्ट, किसके आदेश से जमाबंदी हुई कायम

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नारायण विश्वकर्मा

रांची: भुईंहरी जमीन पर निर्मित आलीशान पल्स हॉस्पिटल की जिस जमीन पर बुनियाद खड़ी है, अब इसके बारे में ईडी की खोजबीन जारी है. अबतक यह जगजाहिर हो चुका है कि फर्जी कागजात के आधार पर भुईंहरी जमीन पर आईएएस पूजा सिंघल ने अपने प्रभाव से करोड़ों का अस्पताल खड़ा किया है. अब ईडी इसकी छानबीन में लग गई है. इसके कारण पल्स अस्पताल के आसपास की करीब 8-9 एकड़ भुईंहरी जमीन पर निर्मित गगनचुंबी इमारतों के मालिक अब सकते में आ गए हैं. उधर, रांची जिला प्रशासन को पल्स अस्पताल की भुईंहरी जमीन की जांच रिपोर्ट 5 दिन बाद भी उपलब्ध नहीं हो पायी है. वहीं दूसरी ओर दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त के कार्यालय से 11 मई को बड़गाई अंचल कार्यालय को पत्र जारी कर एक सप्ताह के अंदर मोरहाबादी मौजा की भुईंहरी जमीन की अद्यतन रिपोर्ट मांगी गई है.

आयुक्त ने बड़गाई सीओ से एक हफ्ते में मांगा जवाब
आयुक्त के सचिव जुल्फिकार अली के हस्ताक्षर से जारी पत्र (पत्रांक नं-10-14/1288) के हवाले से कुल चार बिंदुओं पर आरटीआई एक्टिविस्ट इंद्रदेव लाल से प्राप्त परिवाद पत्र की छायाप्रति संलग्न करते बड़गाई अंचलाधिकारी से पूछा गया है, जो निम्न है-परिवाद में अंकित कितनी भुईंहरी जमीन की लगान रसीद कब से एवं किसके नाम से निर्गत की जा रही है, विवरणी उपलब्ध करायी जाए.

नामांतरण वाद संख्या 1185R27/2017-18 को दिनांक 22.09.2017 को अस्वीकृत कर दिया गया था, उक्त वाद का अभिलेख उपलब्ध कराया जाए.

किस परिस्थिति में एवं किस अधिकारी के आदेश से अशोक जैन, अनिल कुमार जैन, विजय कुमार जैन, रमेश कुमार जैन एवं वरुण बक्सी के नाम से जमाबंदी कायम हुई एवं लगान रसीद निर्गत हुआ? इससे संबंधित अभिलेख भी उपलब्ध कराए जाएं.

प्रश्नगत भूमि का खतियान एवं पंजी-ii की छायाप्रति भी उपलब्ध करायी जाए. अंत में कहा गया है कि विस्तृत प्रतिवेदन एवं अपेक्षित अभिलेख एक सप्ताह के अंदर उपलब्ध करा दिया जाए.

इंद्रदेव लाल के आवेदन पर आयुक्त ने की कार्रवाई
बता दें कि आरटीआई एक्टिविस्ट इंद्रदेव लाल ने इस संबंध में 2 फरवरी 2022 को आयुक्त कार्यालय में आवेदन दिया था. इस संबंध में कार्रवाई का आग्रह करते हुए तमाम दस्तावेज उपलब्ध कराए थे. आयुक्त के सचिव ने पत्रांक-680, 16 मार्च 2022 को रांची के उपायुक्त को भुईंहरी जमीन के नामांतरण अस्वीकृत होने के बावजूद कतिपय लोगों के नाम से रसीद निर्गत किये जाने की शिकायत की गई थी. इसकी अद्यतन जानकारी देकर प्रश्नगत मामले में नियमानुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया था. ढाई माह बाद भी डीसी द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने के बाद इंद्रदेव लाल ने फिर आयुक्त से मिलकर कार्रवाई का अनुरोध किया था. इसके बाद आयुक्त के सचिव ने इस बार बड़गाई सीओ को जवाब देने का आदेश दिया है. इसकी प्रतिलिपि रांची के डीसी और अपर समाहर्ता को भी भेजी गई है.


दो साल भी सीएमओ ने सुध नहीं ली
यहां याद दिलाना जरूरी है कि हमने सीएम हेमंत सोरेन को ट्विट कर भुईंहरी जमीन पर निर्मित पल्स अस्पताल के बारे में 13 फरवरी 2020 को इसकी जानकारी दी थी. इसके बाद सीएम ने रिट्विट कर उस वक्त के रांची डीसी रहे महिमापत रे को इसकी जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था. इस बीच दो साल से अधिक समय गुजर गये, पर जांच रिपोर्ट का अभी तक कहीं कोई अता-पता नहीं है. इधर, रांची के अपर समाहर्ता राजेश कुमार बरवार को रांची डीसी छवि रंजन ने उन्हें जांच रिपोर्ट खोजवाने का निर्देश दिया था. अभी 5 दिनों से अपर समाहर्ता कार्यालय में खोजबीन चल रही है पर अभी तक रिपोर्ट हाथ नहीं लगी है. वैसे सूत्र बताते हैं कि जब जांच ही नहीं हुई तो रिपोर्ट कहां से आएगी. दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि तत्कालीन डीसी महिमापत रे ने आईएएस पूजा सिंघल के दबाव में इस जांच रिपोर्ट को दबा दिया था. दरअसल जांच रिपोर्ट की खोज-खबर जब सीएमओ ने नहीं लिया तो, इस रिपोर्ट का हश्र यही होना था.


पल्स हॉस्पिटल के आसपास की अधिकतर जमीन भुईंहरी नेचर की
उल्लेखनीय है कि रांची जिले में भुईंहरी जमीन हड़पने का इतिहास पुराना है। पल्स हॉस्पिटल के आसपास की अधिकतर जमीन भुईंहरी नेचर की है। पल्स हॉस्पिटल के पीछे की जमीन पर राम प्यारी आर्थो हॉस्पिटल रिसर्च सेंटर, रचित हाईट, हैरिटेज अपार्टमेंट, हेल्थ प्वाइंट, बरियातू नर्सिंग होम, रिलायंस फ्रेश, श्यामा पेट्रोल पंप के अलावा बरियातू रोड पर ही स्थित लॉ विस्टा आदि अपार्टमेंट भी शामिल है, जो भुईंहरी जमीन पर आबाद है। वैसे अभी भुईंहरी जमीन के कई किस्सों पर से पर्दा उठना बाकी है।

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राम भक्तों के लिए

महिला हिंसा रोकने लिए पुलिस शक्ति स्कॉड संसाधन का इस्तेमाल करेगी

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गिरिडीह:  (कमलनयन) महिला हिंसा को रोकने के लिए गिरिडीह पुलिस अब शक्ति स्कॉड संसाधन का इस्तेमाल करेगी। पीएम मोदी की सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण योजना को लेकर निर्भया फंड से गिरिडीह पुलिस को रविवार को 18 स्कूटी और 18 टैबलेट उपलब्ध कराएं गए हैं।

102 नंबर कॉल करने पर पहुंचेगी पुलिस

एसपी अमित रेणु और प्रशिक्षु आईपीएस हारिश-बिन-जमां ने संयुक्त रूप से जिले के महिला थाना समेत 18 थानों के पुलिस पदाधिकारियों को शक्ति स्कॉड स्कूटी और टैबलेट का वितरण किया। बताया गया कि स्कूटी में लगे टैबलेट के सहारे इन 18 थानों की पुलिस अब जीपीएस सिस्टम से हर उस पीड़ित महिला और छेड़खानी की शिकार युवती के पास पहुंचेगी, जो गिरिडीह पुलिस को 102 नंबर कॉल कर घरेलू हिंसा और छेड़खानी से बचने के लिए सहयोग मांगेगी। पीड़िता द्वारा कॉल करने के महज 10 मिनट के भीतर मौके पर पुलिस मौजूद रहेगी। कॉल करने और 102 नंबर पर संपर्क होने के बाद शिकायत करनेवाली पीड़िता के नंबर पर जीपीएस सिस्टम से पुलिस कंट्रोल रुम उसके लोकेशन को तब तक खंगालते हुए इसी शक्ति स्कॉड से सहयोग पहुंचाएगी।

18 थानों को स्कूटी व टैबलेट उपलब्ध कराए गए

रविवार को जिन 18 थानों के पुलिस पदाधिकारियों को स्कूटी और टैबलेट एसपी अमित रेणु ने उपलब्ध कराया, उनमें नगर थाना प्रभारी रामनारायण चौधरी, महिला थाना प्रभारी मनिता कुमारी, मुफस्सिल थाना, बगोदर थाना, डुमरी थाना, सरिया थाना, देवरी थाना, निमियाघाट थाना, धनवार थाना, बेंगाबाद थाना, जमुआ थाना, बिरनी थाना शामिल है।

महिला हिंसा को रोकना प्राथमिकता होगी: एसपी

इधर एसपी अमित रेणु ने जानकारी दी कि केन्द्र सरकार की केन्द्रीय सेक्टर स्कीम योजना के वूमेन हेल्प डेस्क के निर्भया फंड से गिरिडीह पुलिस के इन 18 थानों को स्कूटी और टैबलेट उपलब्ध कराया गया है। और इसी शक्ति स्कॉड से महिला हिंसा को रोकना प्राथमिकता है।

राम भक्तों के लिए

सरकारें देश में सबसे बड़ी मुकदमेबाज, मामलोँ को जानबूझ कर अटकाती है : CJI

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नई दिल्ली: 

विज्ञान भवन में हाईकोर्ट्स के चीफ जस्टिस एनवी रमना ने मुख्यमंत्रियों के संयुक्त सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट  सीजेआई ने इस मौके पर यह भी कहा कि सरकारें देश में सबसे बड़ी मुकदमेबाज है और 50 फीसदी से ज्यादा मामलों में पक्षकार है. सीजेआई ने लंबित मुकदमों का मामला उठाते हुए कहा कि सरकार सबसे बड़ी मुकदमेबाज है.  कई बार सरकार ही मामलो को जानबूझ कर अटकाती है. उन्होंने कहा कि नीति बनाना हमारा काम नहीं लेकिन कोई नागरिक इन मुद्दों को लेकर आता है तो हमें बताना पड़ता है. इसके अलावा सीजेआई ने हाईकोर्ट्स में अंग्रेजी के अलावा स्थानीय भाषाओं में भी सुनवाई की वकालत की है.

पीएम ने कहा-हमने सैकड़ों अप्रासंगिक कानूनों को खत्म करने की पहल की

पीएम ने कहा कि अच्छा हुआ कि ये मुद्दा सीजेआई ने ही उठाया और मीडिया को सुर्खियां मिलीं लेकिन उसमें समय लगेगा क्योंकि अर्जी डालने से लेकर फैसला आने तक ये काफी पेचीदा मामला है. पीएम ने यह भी कहा कि हमने सैकड़ों कानून जो अब प्रासंगिक नहीं हैं, उनको खत्म करने की पहल की थी लेकिन राज्यों ने अब तक सिर्फ 75 कानून ही निरस्त किए हैं. पीएम ने मुख्यमंत्रियों से आग्रह किया कि वो लोगों को ऐसे कानून के जाल से बाहर निकालें.

लीगल एजुकेशन अंतरराष्ट्रीय स्तर का हो: पीएम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सीजेआई की इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय के लिए न्याय के तराजू तक जाने की जरूरत ही काफी नहीं, बल्कि भाषा भी अड़चन होती है. उन्होंने कहा, हमारे यहां सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में कार्यवाही अंग्रेजी में होती है. अब कोर्ट्स में स्थानीय भाषा को प्रोत्साहन देने की जरूरत है. पीएम ने कहा कि इससे सामान्य नागरिक का न्याय में भरोसा बढ़ेगा. पीएम मोदी ने कहा कि तकनीकी और मेडिकल शिक्षा सामान्य भाषा में क्यों ना हो?  उन्होंने कहा कि युवाओं की क्षमता के विकास के लिए लीगल एजुकेशन अंतरराष्ट्रीय स्तर का होना चाहिए. इस दिशा में नए आयाम विकसित करने होंगे.

राम भक्तों के लिए

JSSC ने लिपिकों के 991 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की, 20 मई से 19 जून तक ऑनलाइन फार्म भरे जाएंगे

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रांची

झारखंड में बेरोजगारी झेल रहे युवाओं के लिए राहत भरी खबर है. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने लिपिकों के 991 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य सरकार के दस विभागों में निम्नवर्गीय लिपिक, निजी सहायक आदि पदों पर नियुक्ति होगी। जेएसएससी ने इंटरमीडिएट स्तर (कंप्यूटर ज्ञान एवं कंप्यूटर में हिन्दी टकंण अहर्ता धारक पद हेतु) संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस परीक्षा में शामिल होने के लिए 20 मई से 19 जून तक ऑनलाइन फार्म भरे जाएंगे। इस परीक्षा के माध्यम से 991 पदों पर नियुक्ति होगी। इनमें 986 पद नियमित तथा पांच पद बैकलॉग के हैं।

अनुदेशकों की नियुक्ति प्रक्रिया स्थगित
दूसरी तरफ राज्य के सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण अधिकारियों (अनुदेशकों) की नियुक्ति प्रक्रिया स्थगित कर दी गई है। जेएसएससी ने प्रशिक्षण अधिकारियों की नियुक्ति के लिए शुरू की गई ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को अपरिहार्य कारण बताते हुए स्थगित कर दिया है। कुल 727 पदों के लिए 19 अप्रैल से ऑनलाइन आवेदन भरे जा रहे थे। इनमें नियमित एवं बैकलॉग दोनों श्रेणी के पद शामिल हैं। राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में लंबे समय बाद प्रशिक्षण अधिकारियों की नियुक्ति हो रही थी।

राम भक्तों के लिए

मोदी काल में ईंधन की कीमतों में सबसे कम 30 फीसदी वृद्धि हुई, 80 फीसदी नहीं: पुरी

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नई दिल्ली

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि को लेकर अजीबोगरीब तर्क गढ़े जा रहे हैं. पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि मोदी काल में ईंधन की कीमतों में वृद्धि सबसे कम 30 फीसदी हुई है, 80 फीसदी नहीं, जबकि मूल वेतन में दशकों से लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही सरकार विभिन्न श्रेणियों के तहत लोगों को मुफ्त योजनाएं दे रही है।

 मोदी राज में सबसे कम 30 फीसदी की वृद्धि हुई

मंत्री ने यह भी कहा कि यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई हुई जिससे तेल की कीमतें 19.56 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 130 डॉलर हो गईं। उन्होंने कहा कि मोदी राज में सबसे कम 30 फीसदी हुई वृद्धि, लेकिन लोगों की बेसिक सैलरी भी तो बढ़ी है. पुरी ने कहा कि हम अभी भी महामारी से उबर नहीं पाए हैं। अभी भी 80 करोड़ लोगों को भोजन दे रहे हैं और टीके लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने पेट्रोल-डीजल पर 32 रुपये उत्पाद शुल्क लगाया, दिवाली से पहले हमने इसे घटाया और दरें कम हुई थीं।  

राज्यों को भी अपनी जिम्मेवारी लेनी चाहिए

मंत्री कहा कि पीएम लगातार कोशिश कर रहे हैं कि तेल के दाम कम हों, उन्होंने आजीविका के मुद्दे से संबंधित सहकारी संघवाद की सर्वोत्तम भावना दिखाई है। बोझ का बंटवारा समान नहीं होना चाहिए, केंद्र ने ईंधन क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी संभाली है। राज्यों को भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि हम ईरान जैसे खाड़ी देशों के करीब स्थित हैं, जहां बहुत सारा तेल है। हमारे रूस के साथ ऊर्जा संबंध हैं, हम उनसे कच्चा तेल खरीदते हैं लेकिन हमारा कुल आयात 0.2 फीसदी से अधिक नहीं है, हम शर्तों के अनुसार खरीदने के लिए तैयार हैं।

राम भक्तों के लिए

कोयले की लूट के लिए केंद्र ही ज्यादा जिम्मेवार

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रंजन झा

झारखंड में इन दिनों बिजली संकट गहरा गया है. कोयले के दम पर ही यहां के सभी मुख्यमंत्री जीरो पावर कट का राग अलापते रहे हैं.  सरप्लस बिजली की बात बार-बार कही जाती रही है. पर यह सपना अबतक साकार नहीं हुआ है, वैसे मूल रूप से कोयले पर केंद्र का अधिकार है. इस लिहाज से कोयले की लूट के लिए केंद्र सरकार ज्यादा जिम्मेवार है. कोयला केंद्र सरकार का है. उसकी रक्षा के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की तैनाती की गई है. सीबीआई, विजिलेंस आदि भी बीसीसीएल की संपत्तियों की हिफाजत के लिए ही है.

कुख्यात कोयला चोर बीजेपी में जाकर पवितर हो गये.

झारखंड में कोयला चोरी कभी नहीं रूकी है और शायद कभी रूकेगी भी नहीं. ऐसा नहीं था कि रघुवर सरकार में कोयला चोरी रुक गई थी. इतनी चोरी थी कि धनबाद के सांसद पीएन सिंह ने तत्कालीन कोयला मंत्री पीयूष गोयल को कंप्लेन की. कोयला चोरी का मामला तब जोर-शोर से संसद में उठा. नतीजा, ढाक के तीन पात. निरसा के एक कुख्यात कोयला चोर ने बीजेपी ज्वाइन कर ली. वह पवितर हो गये. बीजेपी सरकार बनी रहती तो वे पवितर ही बने रह जाते. इस सरकार में उनके सील भट्ठा से भारी पैमाने पर चोरी का कोयला निकला.

सरकार की पॉलिसी में ही कोयला चोरी समाहित है

इस सरकार के क्या कहने. सरकार की पॉलिसी में ही कोयला चोरी समाहित है. गुरुजी ने पहले ही इसे गरीब का हक बता दिया. हालांकि चोरी के कोयले से पले-बढ़े माफिया. खबर थी कि चोरी के कोयले के पैसे से ही आपणो घर बसा है. ऊंची अट्टालिकाएं. इसमें कोयला चोरी का पैसा लगा है. यह हम नहीं इनकम टैक्स विभाग ने कहा. मगर, होता जाता क्या है? उनकी बड़ी ऊंची पहुंच है.

कोयला चोरी मामले में सब हैं मौसेरे भाई

रघुवर सरकार ने कोयला चोरी के मामले की एसीबी से जांच की घोषणा की. मगर, जांच हुई ही नहीं. भला एक इंस्पेक्टर डीआइजी, एसपी के खिलाफ जांच करता? कोयला चोरी मामले में सब मौसेरे भाई. एक सिंडिकेट में कयी दलों के काले चेहरे. कोई जिला परिषद का, कोई भाजपा से झामुमो में कूदनेवाला. कोई और…. क्या यहां बंगाल से कम कोयला चोरी होती है? अगर, हां तो बंगाल की तरह धनबाद की कोयला चोरी की जांच भी सीबीआई को क्यों नहीं सौंपी जाती है? इसमें तो किसी स्टेट का परमिशन नहीं चाहिए. दूध-का-दूध पानी का पानी हो जाएगा…!

राम भक्तों के लिए
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