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Friday, April 4, 2025
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परिवारवाद के आरोप पर बाबूलाल ने सफाई पेश की,कहा-असल में जेएमएम,कांग्रेस,राजद और सपा में परिवारवाद कायम है…भाजपा में सिस्टम के तहत पार्टी का संचालन होता है

रांची : परिवारवाद को लेकर भाजपा की किरकिरी होने के बाद सोमवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी सफाई पेश की है. श्री मरांडी ने कहा कि जब कोई चुनाव लड़ता है तो, कहीं ना कहीं किसी का कोई बेटा होता है, कोई बहू होती है, कोई पत्नी होती है, कोई भाई होता है। यह हो सकता है, लेकिन पार्टी का संचालन वे नहीं करते हैं। पार्टी का संचालन कार्यकर्ता करते हैं। भाजपा का एक सिस्टम है। इसी सिस्टम के तहत पार्टी का संचालन होता है। इसे परिवारवाद कहना गलत है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सोमवार को मीडिया से कहा कि परिवारवाद का मतलब परिवार से ही पार्टी की पहचान और परिवार से ही पार्टी संचालित होना है। देश में कांग्रेस पार्टी की पहचान और संचालन गांधी परिवार से होता है। झारखंड में झामुमो की पहचान और संचालन शिबू सोरेन के परिवार से होता है। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल की पहचान और संचालन लालू प्रसाद यादव के परिवार से होता है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की पहचान और संचालन भी मुलायम सिंह यादव के परिवार से होता है। इसे परिवारवाद कहते हैं। श्री मरांडी ने कहा कि चुनाव के समय कुछ लोगों की नाराजगी होती है। सभी से हम लोग बात कर रहे हैं।

भाजपा चुनाव आयोग से मिली हुई है तो, इसका कोई सबूत पेश करें…!

उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा को यह पता है कि वह चुनाव में उनकी हार तय है। इसलिए अभी से आरोप लगाना शुरू कर दिया है कि बीजेपी चुनाव आयोग से मिली हुई है। कोई सबूत है तो दे दे। बंटी और बबली पति-पत्नी हैं। 5 साल इन दोनों ने झारखंड के लोगों को ठगा है। उन्होंने कहा था कि लोगों को 1 साल में 72000 रुपए देंगे। 5 साल हो गए हेमंत सोरेन ने किसी गरीब को 72000 रुपए नहीं दिये। मां-बहनों को चूल्हा खर्च हर महीने 2000 रुपए देने की बात कही थी। 5 साल बीत गये, किसी को चूल्हा खर्च नहीं दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने बेटियों से कहा था कि शादी होने पर सोने का सिक्का देंगे। एक भी लड़की को सोने का सिक्का नहीं दिया। नौजवानों को 5 लाख नौकरी देने की बात कही थी। अपने पिताजी की कसम खाई थी। कहा था कि 5 लाख नौकरी नहीं देने पर राजनीति से संन्यास ले लेंगे। जो व्यक्ति पिताजी की कसम खाकर पूरा नहीं करता है, उन पर कौन भरोसा करेगा। विधानसभा में कहा था कि बीए पास को 5000 और एमए पास को 7000 रुपए भत्ता देंगे। एक भी काम पूरा नहीं किया। जब चुनाव आ गया, तब नया तरकीब भिड़ायी और महिलाओं को अगस्त से 1000 रुपए देने लगे। 3 महीना दिए हैं। उन्होंने दिसंबर से 2500 देने की बात कही है। यही बंटी और बबली का खेल है। आज जिन राज्यों में बीजेपी की सरकार है, वहां अलग-अलग नाम से मां-बहनों के सशक्तीकरण के लिए योजना चलाई जा रही है। सहयोग राशि दी जा रही है। भाजपा की योजना की वे नकल वे कर रहे हैं.

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