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Saturday, March 7, 2026
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झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद एवं यूनिसेफ के सहयोग से समेकित क्षेत्रीय कौशल विकास, पुनर्वास एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण केंद्र द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला के पहले बैच का समापन

 पहले बैच में राज्य के छह जिलों से आये 109 रिसोर्स शिक्षक/थेरेपिस्ट को समग्र शिक्षा अंतर्गत समावेशी शिक्षा के विभिन्न विषयो की दी गयी जानकारी

✦ शिक्षकों को विशेष शिक्षा की तकनीकों और संसाधनों का मिला ज्ञान, शिक्षकों/थेरेपिस्टों को अधिक प्रभावी कौशल किया गया प्रदान

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद एवं यूनिसेफ के सहयोग से समावेशी शिक्षा के अंतर्गत रिसोर्स शिक्षकों/थेरेपिस्टों के लिए समेकित क्षेत्रीय कौशल विकास, पुनर्वास एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण केंद्र के द्वारा झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, रांची में आयोजित 16 दिवसीय आवासीय कार्यशाला के प्रथम बैच का आज समापन हो गया। पहले बैच में राज्य के 6 जिलों यथा रांची, खूंटी, गुमला, पश्चिमी सिंघभूम, पूर्वी सिंघभूम और सरायकेला के 109 रिसोर्स शिक्षक/थेरेपिस्ट को प्रशिक्षण मिला। पहले बैच में हस्तक्षेप कौशल बढ़ाने पर क्षमता निर्माण के एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों और उनके शिक्षण, हस्तक्षेप एवं व्यवहार प्रबंधन के संबंध में रिसोर्स शिक्षकों/थेरेपिस्टों का ज्ञानवर्धन किया गया। कार्यशाला में विकासात्मक दिव्यांगता में उपचारात्मक हस्तक्षेप, विकासात्मक दिव्यांगता में संवेदी एकीकरण, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए घर-आधारित थेरेपी, व्यक्तिगत शैक्षणिक योजन विकसित करना, हस्तक्षेप प्रक्रिया में माता-पिता की समान भागीदारी, भारतीय सांकेतिक भाषा की मूल बातें, श्रवणबाधित बच्चों के लिए संचार कौशल, अधिगम दिव्यांगता के लिए हस्तक्षेप रणनीतियाँ, बच्चों को जीवन कौशल और कार्यात्मक शिक्षण सिखाना, घर में व्यवहार संबंधी चुनौतियों का प्रबंधन, CwSN (विशेष आवश्यकता वाले बच्चों) में व्यवहार संबंधी समस्याएँ और कक्षा में उनका प्रबंधन, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए पाठ योजना और शिक्षण सामग्री बनाना, बहु-दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए हस्तक्षेप रणनीतियाँ, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समावेशी शिक्षण पद्धति, दिव्यांग बच्चों के लिए सह-पाठयक्रम गतिविधियों का महत्व, CWSN (विशेष आवश्यकता वाले बच्चों) के पुनर्वास में रोजगार योग्य कौशल की भूमिका, विकलांग व्यक्तियों के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं की जागरूकता और समझ विकसित करना जैसे विषयो को विस्तार से समझाया गया। कार्यशाला के अंतिम दिन सभी शिक्षकों को अपने अपने क्षेत्रों के दिव्यांग बच्चो के डॉक्यूमेंटेशन एवं दिव्यांगता प्रमाण पत्र जल्द बनवाने का निर्देश दिया गया। जिससे उन्हें सरकारी योजनाओ का लाभ दिलवाया जा सके।

कार्यशाला की जानकारी देते हुए समावेशी शिक्षा की सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी श्रीमती अरुणा लता केरकेट्टा ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यशाला से शिक्षकों को विशेष शिक्षा की तकनीकों और संसाधनों का ज्ञान मिलता है जिससे वे कक्षा में बेहतर शिक्षा प्रदान कर सकते हैं। उन्हें CwSN (Children with Special Needs) के व्यवहार संबंधी समस्याओं का प्रबंधन करने की विधियाँ सीखने में मदद मिलती है। कार्यशाला में भाग लेने वाले शिक्षक बच्चों की जरूरतों के अनुसार व्यक्तिगत शैक्षणिक योजना बनाने की प्रक्रिया को समझते हैं, जिससे बच्चो को व्यक्तिगत रूप से मदद मिल सके। विशेष शिक्षा की सहेयक प्रोफेसर डॉ. प्रीती तिवारी ने कार्यशाला के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रकार कि कार्यशालाओं से शिक्षक बच्चों में संवेदी समस्याओं और अधिगम दिव्यांगताओ का विश्लेषण और प्रबंधन करने में अधिक कुशल बन सकते हैं। इसका उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के जीवन को सुधारना है। यह न केवल बच्चो के सीखने और व्यवहार में सुधार लाने में मदद करता है, बल्कि शिक्षकों और थेरेपिस्टों को भी अधिक प्रभावी कौशल प्रदान करता है। कार्यशाला में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के शिक्षण, पुनर्वास, रोजगार, और सरकारी योजनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों कि विस्तार से जानकारी दी गयी है, जिससे शिक्षक अधिक प्रभावी रूप से CwSN बच्चों की सहायता कर सकें। कार्यशाला में सीआरसी रांची के निदेशक श्री सूर्यमणि प्रसाद, रिसोर्स पर्सन श्री चंदन सिंह, श्री संजीव कुमार, श्री विजय ठाकुर, श्रीमती मधुमिता भट्टाचार्या, श्री विद्याकर कुमार, श्री चौधरी राजेश रंजन, श्रीमती मित्तू मुथु वर्गीस, श्रीमती सुमन कुमारी, श्री राम प्रकाश राय, श्री मुकेश कुमार, डॉ. प्रीती तिवारी, श्रीमती प्रकृति सिन्हा, श्री रणजीत रंजन, श्रीमती रश्मिका बारीकी, श्री बसंत प्रधान ने रिसोर्स शिक्षकों/थेरेपिस्टों का मार्गदर्शन किया।

अगले तीन बैच में प्रशिक्षित किये जाएंगे 275 रिसोर्स शिक्षक/थेरेपिस्ट

इस कार्यशाला के अगले तीन बैच में 275 रिसोर्स शिक्षक/थेरेपिस्ट को प्रशिक्षण दिया जाएगा। दिनांक 10-12 फरवरी, 2025 तक बोकारो, हज़ारीबाग़, सिमडेगा, लातेहार, गिरिडीह के शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। दिनांक 13-15 फरवरी, 2025 तक जामताड़ा, दुमका, धनबाद, देवघर, गोड्डा, साहिबगंज के रिसोर्स शिक्षकों/थेरेपिस्टों का प्रशिक्षण होगा। दिनांक 17-19 फरवरी, 2025 तक कोडरमा, पाकुड़, चतरा, गढ़वा, रामगढ़, पलामू, लोहदगा के रिसोर्स शिक्षकों/थेरेपिस्टों को प्रशिक्षण मिलेगा।

News Desk


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