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Saturday, March 7, 2026
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क्या पंकज मिश्रा हेमंत सरकार की लुटिया डूबो देगा? सीएमओ में सियासी हलचल बढ़ी

नारायण विश्वकर्मा

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा के बीच का मधुर संबंध अब उजागर होने लगा है. ईडी की पांच हजार पन्नों की चार्जशीट में जिस तरह से पंकज मिश्रा से सीएम के कनेक्शन का खुलासा हो रहा है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि पंकज मिश्रा हेमंत सरकार की लुटिया डूबोकर ही रहेगा. ईडी के नित नए खुलासे से सरकार के अंदर बेचैनी देखी जा रही है. उधर, विपक्ष अब हमलावर हो गया है. भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने सीधे सीएम पर प्रहार करते हुए कहा है कि पंकज मिश्रा के घर से हेमंत सोरेन का ब्लैंक साइंड-अनसाइंड चेक और पासबुक मिलना क्या दर्शाता है? इसपर झामुमो की ओर से अबतक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. पंकज मिश्रा की काली करतूतों पर आंख मूंदकर ठप्पा लगानेवाले साहेबगंज के डीसी राम निवास यादव भी अब फंसते नजर आ रहे हैं. वहीं एक अन्य मामले में झारखंड हाईकोर्ट में साहेबगंज जिला प्रशासन पर पंकज मिश्रा के प्रभाव में काम करने का आरोप चस्पां हो गया है.

साहेबगंज-कटिहार डीसी को कोर्ट ने 18 अक्तूबर किया है तलब

बता दें कि झारखंड हाईकोर्ट ने कटिहार के डीएम और साहेबगंज के डीसी को अदालत के आदेश का पालन नहीं करने पर 18 अक्तूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कटिहार के डीएम उदयन मिश्रा और साहेबगंज के डीसी रामनिवास यादव से जानना चाहा है कि क्या वे कोर्ट की अवमानना के लिए जिम्मेदार नहीं हैं? पिछले साल अक्टूबर में, कोर्ट ने प्रकाश चंद्र यादव को गंगा नदी पर अपने मालवाहक जहाज को संचालित करने की अनुमति देने का आदेश पारित किया था. याचिकाकर्ता का आरोप है कि अदालत के आदेश के बावजूद उन्हें अलग तरह से काम करने की अनुमति नहीं दी गई. खंडपीठ ने जय बगरंग बली स्टोन वर्क्स के मालिक प्रकाश चंद्र यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है. अक्तूबर 2020 से रामनिवास यादव साहेबगंज के डीसी हैं. पिछले दो साल में कई अफसरों को इधर-उधर किया गया पर डीसी अभी तक साहेबगंज में जमे हुए हैं. बताया जाता है कि सीएम के बेहद करीबी माने जानेवाले पंकज मिश्रा पर ही साहेबगंज में अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग का जिम्मा है. खास कर खनन के क्षेत्र में किसी भी अफसर का हस्तक्षेप वह बर्दाश्त नहीं करते हैं. किसे साहेबगंज जिले में काम करना है, ये साहब ही तय करते हैं. कहा तो यह भी जा रहा है कि रिम्स के कॉटेज में इलाजरत पंकज मिश्रा आज भी वहीं से साहेबगंज में हुकूमत चला रहा है.  

पंकज अवैध खनन और परिवहन को संरक्षण देता था

ईडी की चार्जशीट में पंकज मिश्रा के अवैध खनन मामले की जांच के दौरान पता चला कि कैसे पंकज मिश्रा ने स्थानीय प्रशासन पर अपने और अपने सहयोगियों के खिलाफ किसी भी जांच को रोकने के लिए दबाव डाला करता था. इसमें एक फोन कॉल वह भी शामिल है, जो पंकज मिश्रा ने संतालपरगना के पूर्व कमिश्नर चंद्रमोहन कश्यप को किया था. पंकज मिश्रा ने उनसे गंगा नदी में मालवाहक जहाज दुर्घटना की कोई और जांच नहीं करने के लिए कहा था. पंकज मिश्रा ने कमिश्नर पर साहिबगंज के डीसी राम निवास यादव की रिपोर्ट को स्वीकार करने का भी दबाव बनाया था. ईडी ने विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत के साथ पंकज मिश्रा की आयुक्त के साथ हुई बातचीत की डिजिटल कॉपी पेश की है. पिछले 24 मार्च को साहेबगंज से पत्थर-चिप्स लदे ट्रकों को कटिहार ले जाया जा रहा ओवरलोडेड मालवाहक जहाज दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद जांच के दौरान खुलासा हुआ कि नियम का उल्लंघन कर जहाज को रात में चलाया जा रहा था. समदा घाट (साहेबगंज) और मनिहारी घाट (बिहार) के बीच जहाज को चलाया जाना था, लेकिन गरम घाट (साहेबगंज) और खट्टी घाट (कटिहार) के बीच जहाज को चलाया जा रहा था.  खुट्टी अवैध घाट है, जहां पर जहाज दुर्घटनाग्रस्त हुआ था.

साहेबगंज के डीसी से ईडी की पूछताछ संभव

पंकज मिश्रा ने अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर बीते 2 जून को अपने मोबाइल नंबर 9835933904 से आयुक्त को फोन किया था.  अभियोजन पक्ष की शिकायत में ईडी ने कहा है कि जांच में यह साबित हुआ है कि पंकज मिश्रा अवैध खनन और उसके परिवहन को संरक्षण देता था. जब प्रतिलेख के साथ सामना किया गया, तो पंकज मिश्रा ने अंततः स्वीकार कर लिया कि उसने कमिश्नर को बुलाया था. कमिश्नर ने माना है कि पंकज मिश्रा साहेबगंज के डीसी की रिपोर्ट को आगे नहीं बढ़ाने पर जोर दिया था. डीसी की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाई गई है. संभव है कि ईडी इसकी पुष्टि के लिए डीसी से पूछताछ करे.

साहेबगंज में साहेब ने अपना सिक्का चलाया

साहेबगंज के साहब के बारे में कहा जाता है कि खनन क्षेत्र का वह बादशाह  था. साहेब पिछले दस सालों से साहेबगंज में अपना सिक्का चला रहा था. लेकिन 2020 से वह साहेबगंज में उसकी हुकूमत है. इस बीच उसने जी भर कर मनमानी की. उसे पता था कि सरकार किसी की भी हो, उसके काले साम्राज्य में परिंदा भी पर नहीं मार सकता. मई में पूजा सिंघल प्रकरण सामने आने के बाद जून-जुलाई में ईडी की साहेबगंज में जबसे इंट्री हुई. इसके बावजूद अपने राजनीतिक आकाओं के बल पर साहेब ने बहुत ही निर्भीकता से ईडी को चुनौती दे रहा था. वैसे अब सत्ता के गलियारों में यह कहा-सुना जा रहा है कि हेमंत सरकार के लिए अब वह सिरदर्द बन चुका है. बहरहाल, पंकज मिश्रा से सीएम कनेक्शन पर ईडी आगे क्या रुख अपनाता है, ये देखना दिलचस्प होगा.   


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